
टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया के शेयरों में 19 दिसंबर को दिन में 6 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली। BSE पर शेयर का भाव 12 रुपये के हाई तक गया। खरीद बढ़ने की अहम वजह है कि वोडाफोन आइडिया की सब्सिडियरी VITIL ने 3300 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह फंड नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के माध्यम से हासिल किया गया।
एक दिन पहले Vodafone Idea ने शेयर बाजारों को बताया था कि वोडाफोन आइिडया टेलिकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (VITIL) ने अनलिस्टेड, अनरेटेड, सिक्योर्ड NCD जारी करके 3300 करोड़ रुपये जुटाए हैं। बड़ी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs), फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPIs) और अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स (AIFs) सहित कई बड़े निवेशकों ने कंपनी के NCDs में उम्मीद से ज्यादा दिलचस्पी दिखाई।
इस इश्यू से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल VITIL, वोडाफोन आइडिया को बकाए का पेमेंट करने के लिए करेगी। इससे वोडाफोन आइडिया को अपने पूंजीगत खर्च को मजबूत करने और बिजनेस ग्रोथ को सपोर्ट करने में मदद मिलेगी। वोडाफोन आइडिया के CEO अभिजीत किशोर का कहना है कि पूंजीगत खर्च को सपोर्ट करने के लिए लॉन्ग टर्म डेट जुटाने से संबंधित बातचीत बैंकों के साथ जारी है।
6 महीनों में 90 प्रतिशत तक चढ़ा Vodafone Idea शेयर
शेयर में तेजी से Vodafone Idea का मार्केट कैप बढ़कर 1.28 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। शेयर 6 महीनों में लगभग 90 प्रतिशत और 3 महीनों में 40 प्रतिशत मजबूत हुआ है। कंपनी में सितंबर 2025 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 25.57 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। ICICI Securities ने शेयर के लिए ‘होल्ड’ रेटिंग के साथ 10 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है। Citi ने ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 10 रुपये का टारगेट दिया है।
हाल ही में खबर आई थी कि सरकार कंपनी को 83000 करोड़ रुपये से अधिक के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया के भुगतान पर 4 से 5 साल की इंटरेस्ट-फ्री मोहलत दे सकती है। मोहलत खत्म होने के बाद वोडाफोन आइडिया को यह बकाया राशि 6 किश्तों में चुकानी होगी। कंपनी पहले भी कह चुकी है कि बिना सरकारी और वित्तीय मदद के उसका कारोबार जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
सितंबर तिमाही में घाटे में आई गिरावट
वोडाफोन आइडिया का जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट लॉस सालाना आधार पर कम होकर 5524 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले कंपनी 7175.9 करोड़ रुपये के घाटे में थी। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 2.4 प्रतिशत बढ़कर 11195 करोड़ रुपये हो गया, जो सितंबर 2024 तिमाही में 10932.2 करोड़ रुपये था।
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