
Voda Idea Share Price: अस्तित्व के संकट से जूझ रही वोडाफोन आइडिया के शेयरों में आज जोरदार तेजी आई। इस तेजी की वजह एक रिपोर्ट है जिसमें दावा किया गया कि DoT (दूरसंचार विभाग) की कमेटी के रीएसेसमेंट के बाद कंपनी के एजीआर बकाए में बड़ी कटौती हो सकती है। इस रिपोर्ट ने निवेशकों में जोश भर दिया और इस कारण शेयर 3% से अधिक उछल गया और ₹12 के पार चला गया। इस तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाया जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन अब भी यह काफी मजबूत स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 1.29% की बढ़त के साथ ₹11.77 पर है। इंट्रा-डे में यह 3.61% उछलकर ₹12.04 तक पहुंच गया था। एक और रिपोर्ट ने भी इसके शेयरों पर असर डाला है, जिसमें दावा किया गया कि हाल ही में यूनियन कैबिनेट ने एजीआर को लेकर जिस राहत पैकेज को मंजूरी दी, वह सरकार के लिए कंपनी से बाहर निकलने का रास्ता बना सकती है।
Voda Idea के बकाए में कितनी हो सकती है कटौती?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वोडाफोन आइडिया को अपने 95% से अधिक एजीआर बकाए के पेमेंट के लिए तकनीकी रूप से 10 साल की राहत मिल गई है। टेलीकॉम कंपनी के ₹87,695 करोड़ के बकाए को फ्रीज करने को लेकर अधिकारियों का कहना है कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट इसके पैसे को 50% से अधिक घटा सकती है और जो भी अमाउंट तय होगा, कंपनी को उसका पेमेंट वित्त वर्ष 2036 से वित्त वर्ष 2041 के बीच करना होगा। एक अधिकारी का तो कहना है कि सरकार ने मूल रूप से वोडाफोन आइडिया को उबरने के लिए जरूरी समय दे दिया है। हालांकि मनीकंट्रोल इस रिपोर्ट के सत्यता की पुष्टि नहीं कर सकता है।
वोडाफोन आइडिया से बाहर निकलेगी सरकार?
अब बात करें वोडाफोन आइडिया में सरकार के हिस्सेदारी की तो एक दूसरी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल ही में यूनियन कैबिनेट ने जिस एजीआर (एडजस्टेड ग्रास रेवेन्यू) राहत पैकेज को मंजूरी दी, उससे सरकार को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने का रास्ता मिल सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्राइवेट सेक्टर के किसी निवेशक को सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। बता दें कि कैबिनेट के ₹87,695 करोड़ के भारी-भरकम एजीआर बकाए को पांच साल तक फ्रीज करने के फैसले से आने वाले समय में देनदारियों को लेकर स्पष्टता मिलती है, जो प्राइवेट इंवेस्टर्स की एक प्रमुख शर्त थी।
दो बड़े प्राइवेट ग्रुप पहले ही इसमें निवेश की दिलचस्पी दिखा चुके हैं। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक सरकार अपनी हिस्सेदारी तभी बेचेगी, जब इसे मुनाफा मिले लेकिन अभी तक इस मामले में कोई फैसला नहीं लिया गया है। मनीकंट्रोल इस रिपोर्ट के भी सत्यता की पुष्टि नहीं कर सकता है। बता दें कि सरकार ने पिछले साल मार्च 2025 में ₹36,950 करोड़ के बकाए को इक्विटी में बदलकर अपनी हिस्सेदारी लगभग 49% कर ली और सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई। इससे पहले वर्ष 2023 में सरकार ने ₹16 हजार करोड़ से अधिक के स्टैटुअरी ड्यू के बदले 33% हिस्सेदारी हासिल की थी।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।