
भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 बेहतर रहने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन, 8 जनवरी को बाजार को बड़ा झटका लगा। इसकी वजह उस बिल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एप्रूवल है, जिसमें रूस से क्रूड ऑयल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स के मुताबिक, 8 जनवरी को आई गिरावट से एक दिन में निवेशकों को 8 लाक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
8 जनवरी को निफ्टी 1.01 फीसदी गिरकर 25,876.85 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.92 फीसदी गिरकर 84,180.96 प्वाइंट्स पर बंद हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.98 फीसदी की गिरावट आई। इंडिया वीआईएक्स में उछाल दिखा। इससे शॉर्ट टर्म में मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रहने का संकेत मिलता है। 9 जनवरी को भी बाजार में गिरावट जारी रही। निफ्टी 0.75 फीसदी गिरकर 25,683 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.72 फीसदी लुढ़ककर 83,576 अंक पर बंद हुआ।
एक एनालिस्ट ने बताया, “अमेरिका के 500 फीसदी टैरिफ लगाने की उम्मीद कम है। लेकिन, अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर पड़ेगा। उनकी कॉस्ट बढ़ जाएगी, क्योंकि ये कंपनियां ज्यादा कीमत पर रूस की जगह दूसरे देशों से क्रूड खरीदने को मजबूर होंगी। कंपनियां कॉस्ट बढ़ने का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकेंगी। इससे अंडररिकवरी और मार्जिन पर दबाव दिखेगा।”
इंडिया के कुल क्रूड इंपोर्ट में रूस की हिस्सेदारी 35 फीसदी से ज्यादा है। इंडिया को ज्यादा प्राइस पर ब्राजील और पश्चिमी एशिया जैसे देशों से क्रूड खरीदने पर मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “इंडियन रिफाइनिंग कंपनियां पहले से डायवर्सिफिकेशन कर रही हैं, लेकिन जब डिस्काउंट्स करीब 5 से 6 डॉलर प्रति बैरल हो तो डील की इकोनॉमिक्स मायने रखती है। डिस्काउंट करीब 4 डॉलर प्रति बैरल से कम रहने पर रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो कमजोर होगा।”
नानोलिया के को-फाउंडर और सीआईओ शैलेंद्र कुमार ने कहा, “तेल की सप्लाई को लेकर भारत को झटका लगने वाला नहीं है। भारत में रिफानिंग की पर्याप्त क्षमता है। भारत में हर तरह के क्रूड की रिफाइनिंग हो सकती है। इकलौता नुकसान रूस से तेल खरीदने पर मिलने वाला डिस्काउंट है।” उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म में ट्रेड डिफिसिट पर इसका असर नहीं पड़ेगा। लेकिन, क्रूड की कीमतें बढ़कर 60-75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
अमेरिकी टैरिफ बढ़ने का असर पीएसयू, मेटल स्टक्स और एनर्जी कंपनियों के शेयर पर पड़ सकता है। कुमार ने कहा, “पहली तिमाही में मिडकैप और स्मॉलकैप में 6-7 फीसदी गिरावट आ सकती है। उसके बाद कीमतों में स्टैबिलिटी दिख सकती है। अप्रैल तक अर्निंग्स और ट्रेड्स को लेकर तस्वीर साफ हो जाने पर साल दर साल आधार पर मार्केट में 15-16 फीसदी रिकवरी आ सकती है।”
9 जनवरी को सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में मिलाजुला रुख रहा। बीपीसीएल का शेयर 0.18 फीसदी चढ़कर 355 रुपये पर बंद हुआ। एचपीसीएल का शेयर 0.50 फीसदी गिरकर 449.95 रुपये पर बंद हुआ। IOC का शेयर 0.73 फीसदी की मजबूती के साथ 157.50 रुपये पर बंद हुआ।