
Stocks To Buy: ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने हेल्थकेयर सेक्टर के दो शेयरों को कवर करना शुरू किया है। इनमें इन्वेंटुरस नॉलेज सॉल्यूशंस (IKS) और सैजिलिटी के शेयर शामिल हैं। ब्रोकरेज का कहना है कि ये दोनों शेयर मौजूदा स्तर से 30% से अधिक का रिटर्न दे सकते हैं। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, इन दोनों कंपनियों की EPS (अर्निंग्स प्रति शेयर) बढ़ने की दर सबसे मजबूत है, जो निवेशकों के लिए अच्छा संकेत है।
मोतीलाल ओसवाल ने इन्वेंटुरस नॉलेज सॉल्यूशंस (IKS) के शेयर को ‘Buy (खरीदें)’ रेटिंग के साथ कवर करना शुरू किया है और इसके लिए टारगेट प्राइस 2,107 रुपये रखा है। यह इसके शेयर में मौजूदा स्तर से करीब 32% की बढ़त का अनुमान है। ब्रोकरेज का कहना है कि FY25-28 के दौरान कंपनी की EPS CAGR 32% रहने की उम्मीद है, जो हेल्थकेयर BPO सेक्टर में इसके कई कॉम्पिटीटर से बेहतर है। मजबूत क्लाइंट बेस, बढ़ती डिमांड और लंबे समय की ग्रोथ स्टोरी कंपनी के पक्ष में काम कर रही है।
इसके साथ ही मोतीलाल ओसवाल ने सैजिलिटी के शेयरों को भी ‘Buy (खरीदें)’ रेटिंग के साथ कवर करना शुरू किया है। इसके लिए टारगेट प्राइस 63 रुपये तय किया गया है, जो इसके शेयरों में लगभग 31% की तेजी का अनुमान है। ब्रोकरेज का कहना है कि FY25-28 में कंपनी की EPS लगभग 31% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। क्लाइंट एक्सपैंशन और स्थिर ग्रोथ विजिबिलिटी को कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बताया गया है।
दूसरी ओर, इंडेजीन (Indegene) को मोतीलाल ओसवाल ने ‘Neutral’ रेटिंग दी है और इसके लिए 595 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। यह इस मौजूदा स्तर से करीब 13% के रिटर्न का अनुमान है। ब्रोकरेज का कहना है कि इंडेजीन की EPS ग्रोथ अपने सेक्टर की बाकी कंपनियों की तुलना में धीमी है, इसलिए रेटिंग को न्यूट्रल रखा गया है।
मोतीलाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि सैजिलिटी, इंडेजीन और IKS भारतीय BPM और हेल्थकेयर IT सेक्टर के मजबूत प्लेयर्स के रूप में उभरकर सामने आए हैं। ये कंपनियां हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज सेगमेंट में अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रही हैं।
ब्रोकरेज का मानना है कि ग्लोबल क्लाइंट्स इस समय बढ़ती लागत, जटिल रेगुलेशन और डिजिटलीकरण की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय कंपनियों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। ऐसे माहौल में ये तीनों कंपनियां अपनी विशेषज्ञता, मजबूत एक्जिक्यूशन और डिजिटल क्षमताओं की बदौलत तेज ग्रोथ हासिल कर सकती हैं।
किन जोखिमों पर नजर रखें?
मोतीलाल ओसवाल ने कुछ प्रमुख जोखिमों की भी चेतावनी दी है। इसमें अमेरिका और यूरोप में हेल्थकेयर खर्च में कमी, नीतियों में बदलाव, करेंसी उतार-चढ़ाव, ऑटोमेशन से मार्जिन पर दबाव, क्लाइंट्स का मर्जर या कंसॉलिडेशन, फार्मा और लाइफ साइंस के R&D बजट में देरी, कर्मचारियों का कंपनी छोड़ना और टेक्नोलॉजी में तेजी से बदलाव आदि शामिल हैं।
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