
साल 2025 में कई बड़ी डील देखने को मिलीं। जापान के एमयूएफजी बैंक ने श्रीराम फाइनेंस में 4.45 अरब डॉलर में हिस्सेदारी खरीदी। टाटा मोटर्स ने इटली की इवेको का 4.36 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया। एमिरेट्स एनबीडी ने 3 अरब डॉलर में आरबीएल बैंक में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी। आईटी कंपनी कोफोर्ज ने अमेरिकी कंपनी एनकोरा में 2.35 अरब डॉलर निवेश किया। सवाल है कि क्या 2026 में भी बड़ी डील्स का सिलसिला जारी रहेगा? यूनियन बजट 2026 से पहले मनीकंट्रोल ने कई एक्सपर्ट्स से यह सवाल पूछा और बजट से उनकी उम्मीदों के बारे में चर्चा की।
सिरिल अमरचंद मंगलदास के मैनेजिंग पार्टनर सिरिल श्रॉफ का मानना है कि शेयर बाजार से कंपनियों की डीलिस्टिंग के नियम आसान होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में काफी ज्यादा कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। प्रोसेस और प्राइसिंग के मामले में डीलिस्टिंग के नियम आसान होने चाहिए। यह पीएन3 के नियम में बदलाव करने का सही वक्त है। सरकार को पीएन3 को संवेदनशील सेक्टर्स और एक निश्चित वैल्यू की डील तक सीमित रखना चाहिए। बाकी सभी इनवेस्टमेंट सेक्टर से जुड़े एफडीआई के नियमों के तहत आने चाहिए।
खेतान एंड कंपनी के सीनियर पार्टनर एच खेतान ने कहा कि कैपिटल गेंस और सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) के नियमों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत है। इसके लिए एलटीसीटी, एसटीसीजी और एसटीटी के नियमों को और आसान बनाया जा सकता है। इससे दुनिया के दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी। फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) का रुख भी भारतीय बाजार को लेकर बदलेगा।
ईवाय में पार्टनर और नेशनल लीडर (प्राइवेट इक्विटी सर्विसेज) विवेक सोनी ने कहा, “एलटीसीजी रेट्स और सेस में बदलाव करने की जरूरत है। इससे रिटर्न के लिहाज से इंडियन मार्केट्स का आकर्षण बढ़ेगा।” कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूनियन बजट 2026 इनवेस्टर्स का कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए बड़ा मौका है। हाल में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर इनवेस्टर्स पर पड़ा है। इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा था कि टाइगर ग्लोबल को 2018 में फ्लिपकार्ट में अपनी हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचने पर भारत में टैक्स चुकाना होगा।
एंबिट कैपिटल में इनवेस्टमेंट बैंकिंग के को-हेड राहुल मोदी का मानना है कि अधिग्रहण और विलय (M&A) से संबंधित गतिविधियां 2026 में भी जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि 2025 में एमएंडए डील का वॉल्यूम 150 अरब डॉलर को पार कर गया। हमें इस साल भी एंडएंडए से जुड़ी गतिविधियां जारी रहने की उम्मीद है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट 2026 में कई बड़े ऐलान कर सकती हैं। वह कई सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बड़े उपाय कर सकती हैं।