
BSE, NSE के बाद अब MSEI में भी जल्द ट्रेडिंग शुरु होने वाली है। इस तीसरे एक्सचेंज MSEI (मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज )की 27 जनवरी से शुरुआत होगी। एक्सचेंज 1 फरवरी को बजट के दिन भी खुला रहेगा। इस पर शुरुआत में 130 शेयरों के साथ ट्रेडिंग शुरू होगी। इसका लंबे समय से इंतजार हो रहा था। लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए MSE की खास योजना तैयार है। इसके लिए मार्केट मेकर्स की नियुक्ति की जा रही है। 130 शेयरों के लिए लिक्विडिटी देने की तैयारी है।
मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज में फुल फ्लेज्ड ट्रेडिंग शुरू होने से BSE और NSE को सीधी चुनौती मिलेगी। इससे निवेशकों और ब्रोकर्स दोनों के लिए ट्रेडिंग कॉस्ट और ऑप्शंस के नए रास्ते खुल सकते हैं। अब तक भारत के शेयर बाजार पर BSE और NSE का लगभग पूरा कंट्रोल रहा है। MSE के ऑपरेशनल होने से मार्केट में असली कॉम्पिटिशन आएगा। SEBI अप्रूवल के बाद इक्विटी, डेरिवेटिव्स और कमोडिटी सेगमेंट में नया विकल्प तैयार होगा।
जानकारों का मानना है कि शुरुआती दौर में कैश सेगमेंट पर फोकस कर निवेशकों और ट्रेडर्स का भरोसा जीतने की कोशिश की जाएगी। फंडिंग के मोर्चे पर भी MSEI ने अपनी स्थिति मजबूत की है। एक्सचेंज ने दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में कुल ₹1,240 करोड़ जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड में प्रमुख ब्रोकरेज और फिनटेक कंपनियां Groww और Zerodha भी निवेशकों के रूप में शामिल हैं, जिससे MSE की रणनीति को लेकर बाजार में भरोसा बढ़ा है।
BSE और NSE से होगा मुकाबला
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि MSEI के लिए BSE और NSE को टक्कर देना मुश्किल है। दोनों एक्सचेंज की पकड़ मजबूत है। इनको चुनौती देना मुश्किल है। F&O में सेबी के नियम MSEI की मुश्किल बढ़ाएंगे। सेबी नियमों के तहत मंगलवार और गुरुवार को ही F&O एक्सपायरी होगी। निफ्टी एक्सपायरी मंगलवार को और सेंसेक्स की गुरुवार को होती है। इसलिए डेरिवेटिव्स में पकड़ बनाना MSEI के लिए चुनौती होगी।
मार्केट शेयर पर एक नजर
मार्केट शेयर की बात करें तो कैश में NSE की 90-92 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, स्टॉक F&O में इसकी 95 फीसदी और इंडेक्स F&O में 80 फीसदी हिस्सेदारी है। दूसरी तरफ कैश में BSE की 8-10 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, स्टॉक F&O में इसकी 5 फीसदी और इंडेक्स F&O में 20 फीसदी हिस्सेदारी है।