
Share Market Down: भारतीय शेयर बाजारों में आज 8 जनवरी को लगातार चौथे दिन गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 450 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी लुढ़ककर 26,000 के नीचे चला गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकतों से शेयर मार्केट का सेंटीमेंट दबाव में रहा। इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता के चलते निवेशक सतर्क दिखाई दिए।
सुबह 10:20 बजे के करीब, बीएसई सेंसेक्स 426.65 अंक यानी 0.50 फीसदी टूटकर 84,534.49 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 164.20 अंक या 0.63 फीसदी की गिरावट के साथ 25,976.55 पर कारोबार करता दिखा। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1 फीसदी से अधिक टूट गए। यहां तक कि सभी सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सबसे अधिक गिरावट मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों में देखने को मिली।
शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 5 मुख्य कारण रहे-
1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
बाजार में दबाव का सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली रही। विदेशी निवेशकों ने बुधवार को करीब 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जनवरी में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में करीब 4,650 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। उन्होंने इस महीने एक दिन छोड़कर, बाकी सभी दिन बिकवाली की है। इसके चलते शेयर मार्केट पर लगातार दबाव बना हुआ है।
2. कमजोर ग्लोबल संकेत
ग्लोबल शेयर बाजारों से भी भारतीय शेयर मार्केट को सपोर्ट नहीं मिला। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। जापान का Nikkei 225 और हांगकांग का Hang Seng Index लाल निशान में कारोबार करते दिखे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को कमजोरी के साथ बंद हुए। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के एनालिस्ट अभिषेक सराफ ने रॉयटर्स को बताया कि कि भू-राजनीतिक हालात और ग्लोबल व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं ने शेयर मार्केट के सेंटीमेंट पर दबाव बनाए रखा है।
3. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चिंता
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार पर भारी पड़ी। बीते तीन दिनों में निफ्टी 50 इंडेक्स करीब 0.7 फीसदी और सेंसेक्स लगभग 0.9 फीसदी टूट चुका है। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी है। अमेरिका पहले ही कई भारतीय सामानों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगा चुका है। इनमें से 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से कच्चे तेल खरीदने के चलते लगाया गया है। ट्रंप के हालिया बयानों से दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार के मुताबिक, अमेरिका-भारत व्यापार समझौता भारत की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ संभावनाओं और मैक्रो-आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि इस समझौते में देरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली दोनों ही फिलहाल बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं।
4. क्रूड के दाम में तेजी
कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव गुरुवार को 0.4 फीसदी चढ़कर 60.20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर निवेशकों की आशंका बढ़ा देती है।
5. सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी
गुरुवार को सेंसेक्स डेरिवेटिव्स की वीकली एक्सपायरी थी, जिसके चलते ट्रेडर्स द्वारा पोजिशन अनवाइंड करने या रोलओवर करने से बाजार में वॉल्यूम और उतार-चढ़ाव दोनों बढ़ गए। एक्सपायरी वाले दिनों में अक्सर बाजार की दिशा अनिश्चित रहती है और छोटी-छोटी खबरों पर भी तेज मूवमेंट देखने को मिलता है।
टेक्निकल एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
HDFC सिक्योरिटीज में प्राइम रिसर्च के हेड देवर्ष वकील का कहना है कि भले ही बाजार में फिलहाल थोड़ी कमजोरी दिख रही हो, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड अभी भी मजबूत और पॉजिटिव बना हुआ है। डेली चार्ट पर लगातार ऊपर के हाई और ऊपर के लो बन रहे हैं, जो तेजी का संकेत देते हैं। उन्होंने बताया कि ऊपर की तरफ 26,373 का स्तर फिलहाल बड़ी रुकावट (रेजिस्टेंस) बन सकता है। वहीं नीचे की ओर 26,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट के तौर पर काम कर सकता है।
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