
Share Market Fall: भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार 15 दिसंबर को एक बार फिर गिरावट लौट आई। लगातर दो दिनों की तेजी के बाद बाजार ने आज लाल निशान के साथ कारोबार की शुरुआत की। सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी गिरकर 25,950 के नीचे आ गया। रुपये में लगातार गिरावट, कमजोर ग्लोबल संकेत और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों ने मनोबल को कमजोर किया। बीएसई मिडकैप इंडेक्स भी करीब 0.3 फीसदी तक टूट गया। कई प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
सुबह करीब 9:50 बजे, सेंसेक्स 320 अंकों से ज्यादा टूटकर 84,944 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी-50 करीब 112 अंक गिरकर 25,935 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
शेयर मार्केट में आज की इस गिरावट के पीछे 4 बड़ी वजहें रहीं-
1. रुपये में तेज गिरावट
शेयर बाजार में आज की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण रुपये में आई तेज गिरावट रही। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नए ऑलटाइम लो पर पहुंच गया और 90.63 के स्तर तक फिसल गया। यह लगातार तीसरा दिन है जब रुपये ने अपना नया निचला स्तर छुआ है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर अब तक स्पष्टता न होना, विदेशी निवेशकों की बिवाली और ग्लोबल अनिश्चितताओं ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा रुपये की स्थिरता, FIIs के रुझान और व्यापार समझौतों पर मिलने वाले संकेतों पर निर्भर करेगी।
2. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह बनी हुई है। NSE पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को करीब 1,114 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। दिसंबर महीने में अब तक विदेशी निवेशक, भारतीय शेयर बाजार से करीब 19,605 करोड़ रुपये की राशि निकाल चुके है। विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली के चलते शेयर मार्केट का सेंटीमेंट कमजोर बना हुआ है।
3. कमजोर ग्लोबल संकेत
कमजोर ग्लोबल संकेतों ने भी शेयर बाजार पर असर डाला। शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली थी। नैस्डैक कंपोजिट करीब 1.6 फीसदी टूटा, जबकि एसएंडपी 500 में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई। डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज भी करीब 0.5 फीसदी फिसला। एशियाई बाजारों में भी दबाव रहा। इस बीच जापान का केंद्रीय बैंक इस हफ्ते ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। बैंक ऑफ जापान की ओर से रेट बढ़ाने की उम्मीदों के चलते सोमवार सुबह निक्केई 225 इंडेक्स करीब 800 अंक यानी लगभग 1.6% टूट गया।
वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों में कमजोरी के बीच निवेशक खासतौर पर टेक शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर सतर्क नजर आए। इन तमाम कारकों के चलते भारतीय बाजार में शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला और प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बने रहे।
4. भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील में देरी भी शेयर बाजार को परेशान कर रही है। ट्रेड डील में देरी से एक्सपोर्ट पर नेगेटिव असर पड़ रहा है और व्यापार घाटा बढ़ रहा है। हालांकि पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में फोन पर हुई बातचीत के बाद उम्मीदें थोड़ी बड़ी है। लेकिन बाजार अभी भी इस दिशा में किसी ठोस संकेत के मिलने का इंतजार कर रहा है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
मौजूदा हालात को देखते हुए, चॉइस ब्रोकिंग का कहना है कि निवेशकों और ट्रेडर्स को सावधानी बरतनी चाहिए। बाजार में केवल गिरावट के समय और वह भी मजबूत सपोर्ट लेवल के पास ही खरीदारी करें, साथ ही सख्त स्टॉप-लॉस जरूर लगाएं। जब तक बाजार अहम रेजिस्टेंस लेवल को साफ तौर पर नहीं तोड़ता, तब तक ज्यादा आक्रामक खरीदारी से बचना बेहतर होगा। इस उतार-चढ़ाव वाले और सीमित दायरे में चल रहे बाजार में, हल्की तेजी आने पर कुछ मुनाफा निकाल लेना समझदारी होगी।
टेक्निकल नजरिए से देखें तो, शाह के अनुसार सेंसेक्स को 85,700–85,800 के स्तर पर तुरंत रुकावट यानी रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है, जिससे शुरुआती तेजी सीमित रह सकती है। वहीं, 84,700–84,800 के आसपास सपोर्ट मौजूद है, जो गिरावट आने पर बाजार को सहारा दे सकता है। कुल मिलाकर, सेंसेक्स में हल्की मजबूती के साथ ऊपर की ओर झुकाव बना रह सकता है।
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