Share Buyback New Tax Rules: बजट 2026 में शेयर बायबैक के टैक्स नियमों में क्या हुआ है बदलाव? – share buyback new tax rules government has proposed a change in share buyback tax rules in union budget 2026



यूनियन बजट 2026 में सरकार ने शेयर बायबैक के टैक्स के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है। इससे सरकार ने शेयर बायबैक पर टैक्स के नियमों को लेकर रिटेल इनवेस्टर्स की शिकायतें दूर करने की कोशिश की है। सरकार के बायबैक के टैक्स के नियमों में क्या बदलाव किया है?

अभी शेयर बायबैक पर टैक्स का नियम क्या है?

अभी शेयर बायबैक प्रोग्राम में पार्टिसिपेट करने पर रिटेल इनवेस्टर्स को जो पैसे मिलते हैं, उस पूरे पैसे को डिविडेंड इनकम माना जाता है। इस पर इनवेस्टर के टैक्स-स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इससे रिटेल इनवेस्टर्स को शेयर बायबैक में पार्टिसिपेट करने पर काफी टैक्स चुकाना पड़ता है। ज्यादा टैक्स ब्रैकेट में आने वाले इनवेस्टर्स पर टैक्स का बोझ काफी बढ़ जाता है। रिटेल इनवेस्टर्स टैक्स के इस नियम में काफी समय से बदलाव की मांग कर रहे थे।

रिटेल इनवेस्टर्स को क्यों ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ता है?

बजट 2026 में पेश प्रस्ताव के मुताबिक, रिटेल इनवेस्टर्स को अब पूरे बायबैक अमाउंट पर टैक्स की जगह सिर्फ कैपिटल गेंस पर टैक्स चुकाना होगा। इससे कंपनी के शेयर बायबैक प्रोग्राम करने वाले रिटेल इनवेस्टर्स पर टैक्स का बोझ कम हो जाएगा। इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद शेयर बायबैक प्रोग्राम में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी फिर से बढ़ सकती है।

 रिटेल इनवेस्टर्स को अब कैसे कम टैक्स चुकाना पड़ेगा?

नए नियम को एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। पहले अगर किसी इनवेस्टर ने 1000 रुपये में शेयर खरीदा था और शेयर बायबैक प्रोग्राम में पार्टिसिपेट करने पर उसे शेयर की कीमत 1,800 रुपये मिलती थी तो पूरे 1800 रुपये को डिविडेंड इनकम माना जाता था। 30 फीसदी टैक्स ब्रैकेट में आने वाले इनवेस्टर को इस अमाउंट पर 30 फीसदी यानी 560 रुपये का टैक्स चुकाना पड़ता था। इससे बायबैक में पार्टिसिपेट करने पर उसका मुनाफा काफी कम हो जाता था। नए नियम में उसे सिर्फ 800 रुपये पर टैक्स चुकाना होगा।

क्या प्रमोटर्स और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए नियम एक जैसे हो जाएंगे?

शेयर बायबैक में पार्टिसिपेट करने वाले प्रमोटर्स को सिर्फ कैपिटल गेंस पर टैक्स चुकाना पड़ता है। इसका रेट 22 से 30 फीसदी (प्लस टैक्स) के बीच होता है। इसका मतलब है कि शेयर बायबैक में पार्टिसिपेट करने पर प्रमोटर्स को रिटेल इनवेस्टर्स के मुकाबले ज्यादा मुनाफा होता है। बजट में पेश प्रस्ताव के लागू होने पर टैक्स के नियमों में यह फर्क खत्म हो जाएगा। साथ ही रिटेल इनवेस्टर्स की पुरानी शिकायत भी दूर हो जाएगी।

कंपनियां शेयर बायबैक प्रोग्राम क्यों पेश करती हैं?

कंपनियां अपना सरप्लस कैश शेयरहोल्डर्स को रिटर्न करने के लिए शेयर बायबैक प्रोग्राम का ऐलान करती हैं। यूनियन बजट 2024 में शेयर बायबैक के टैक्स के नियमों में बदलाव के बाद रिटेल इनवेस्टर्स बायबैक प्रोग्राम में दिलचस्पी नहीं दिखाते थे। अब फिर से इसमें उनकी दिलचस्पी बढ़ने के आसार हैं।



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