SEBI ने म्यूचुअल फंड्स के फीस स्ट्रक्चर में किए बड़े बदलाव, इनवेस्टर्स के हित में लिए कई फैसले – sebi revises fees structure of mutual funds investors will have to pay less fees



सेबी ने म्यूचुअल फंड्स इनवेस्टर्स के हित में बड़ा फैसला लिया है। सेबी के बोर्ड ने 17 दिसंबर को टोटल एक्सपेंस रेशियो (टीईआर) फ्रेमवर्क में बदलाव के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। इससे म्यूचुअल फंड्स के निवेशकों पर फंड मैनेजमेंट से जुड़े एक्सपेंसेज का बोझ घटेगा। सेबी ने पहले नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट पेश किया था।

सेबी के नए नियम में कहा गया है कि टीईआर के कैलकुलेशन में अब एसटीटी, जीएसटी, स्टैंप ड्यूटी और कमोडिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स शामिल नहीं होंगे। रेगुलेटर ने ब्रोकरेज और डिस्ट्रिब्यूशन कमीशन के नियमों को भी सख्त किया है। उसने कुछ खास स्कीमों के लिए परफॉर्मेंस आधारित एक्सपेंस स्ट्रक्चर्स की इजाजत दी है।

सेबी बोर्ड की 17 दिसंबर को हुई मीटिंग में सेबी (म्यूचुअल फंड्स) रेगुलेशंस, 2026 को मंजूरी मिल गई। यह 1996 के कानून की जगह लेगा। व्यापक विचार के बाद नए कानून को मंजूरी दी गई है। अब एसटीटी/सीटीटी, जीएसटी, स्टैंप ड्यूटी, सेबी और एक्सचेंज फीस जैसी लेवीज बेस एक्सपेंस रेशियो (बीईआर) से अलग वसूली जाएगी।

एग्जिट लोड से जुड़े अतिरिक्त 5 बीपीएस एक्सपेंस को हटा दिया गया है। म्यूचुअल फंड्स की तरफ से चुकाई जाने वाली ब्रोकरेज फीस की सीमा तय करने के अपने पहले के प्रस्ताव में संशोधन किया है। इक्विटी कैश ट्रांजेक्शंस के लिए इस लिमिट को पहले के 2 बेसिस प्वाइंट्स से बढ़ाकर 6 बेसिस प्वाइंट्स कर दिया है।

अभी फंड मैनेजर्स अपने पोर्टफोलियो में शेयर खरीदने और बेचने के लिए 12 बेसिस प्वाइंट्स तक की फीस चुकाते हैं। सेबी ने डेरिवेटिव म्यूचुअल फंड्स डील्स के लिए ब्रोकरेज रेट को 1 बेसिस प्वाइंट्स से बढ़ाकर 2 बेसिस प्वाइंट्स (लेवी छोड़कर) कर दिया है। अब टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) में बीईआर, ब्रोकरेज और स्टैचुटेरी/रेगुलेटरी लेवीज शामिल होंगे।

सेबी ने इंडेक्स फंड, ईटीएफ के लिए बेस एक्सपेंस रेशियो को 1.0 फीसदी से घटाकर 0.9 फीसदी कर दिया है। लिक्विड स्कीम आधारित फंड ऑफ फंड्स के बेस एक्सपेंस रेशियो को घटाकार 0.9 फीसदी कर दिया गया है। क्लोज-एंडेड इक्विटी स्कीम के लिए बेस एक्सपेंस रेशियो 1.25 फीसदी की जगह 1 फीसदी कर दिया गया है।



Source link

Scroll to Top