
Reliance share price : रिलायंस इंडस्ट्रीज में आज 4.5% की गिरावट देखने को मिली है। रिलायंस, HDFC बैंक, कोटक और ITC ने आज बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव बनाया है। दरअसल रिलायंस इंडस्ट्रीज ने देर रात बयान जारी कर ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को पूरी तरह से नकार दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को गलत बताया है। उसके बाद भी आज ये शेयर दबाव में दिखा। फिलहाल 2.50 बजे के आसपास ये शेयर 69.40 रुपए यानी 4.40 फीसदी की गिरावट के साथ 1507 रुपए के आसपास दिख रहा है।
आज का इसका इंट्राडे लो 1,496.30 रुपए और इंट्राडे हाई 1,569 रुपए है। बता दें कि कल 05 जनवरी को RIL ने 1611.20 रुपये के अपने नए ऑल टाइम हाई को छू लिया था। आज की गिरावट के साथ कंपनी का मार्केट कैप घटकर 20.57 लाख करोड़ रुपये हो गई है। वहीं, कल इसकी मार्केट कैप 20.57 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी।
क्यों आई गिरावट
रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयर में यह गिरावट ब्लूमबर्ग उस खबर के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि रूस से कच्चा तेल लेकर 3 जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर आ रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया। कंपनी ने साफ कहा कि पिछले तीन हफ्तों में जामनगर रिफाइनरी को रूसी तेल का कोई कार्गो नहीं मिला है और जनवरी में ऐसी किसी डिलीवरी की उम्मीद भी नहीं है।
ब्लूमबर्ग की खबर पर RIL का बयान
ब्लूमबर्ग की खबर पर RIL ने अपने बयान में कहा है कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट गलत है। रूसी तेल से भरे जहाज आने की खबर पूरी तरह झूठी है। जामनगर रिफाइनरी को रूसी तेल की कोई खेप नहीं मिली है। पिछले 3 हफ्तों से रूसी तेल की कोई खेप नहीं मिली है। जनवरी में रूस से तेल मिलने की कोई संभावना नहीं है।
RIL शेयर प्राइस हिस्ट्री
फिलहाल रिलायंस के शेयर 70.80 रुपए यानी 4.49 फीसदी की गिरावट के साथ 1507.30 रुपए के स्तर पर दिख रहे हैं। इसका 52 वीक लो 1,114.85 रुपए और 52 वीक हाई 1,611.80 रुपए है। स्टॉक का ट्रेडिंग वॉल्यूम 25,203,207 शेयर के आसपास दिख रहा है। पिछले 1 हफ्ते में ये शेयर 2.14 फीसदी और 1 महीने में 2.18 फीसदी टूटा है। वहीं, 3 महीने में इसमें 9.65 फीसदी की तेजी आई है। 1 साल में इस शेयर ने 23.75 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, 3 साल में इसमें 18.78 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।
स्टॉक पर एक्सपर्ट्स की राय
जेफरीज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और ONGC को लेकर सकारात्मक नजरिया रखा है। इस ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि वेनेजुएला के तेल पर प्रतिबंध हटने से रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ब्रेंट के मुकाबले 5–8 डॉलर प्रति बैरल सस्ता कच्चा तेल खरीद सकती है, जिससे उसका ग्रॉस रेवेन्यू मार्जिन बढ़ेगा। उसने यह भी कहा कि ONGC को सैन क्रिस्टोबल फील्ड से लगभग 50 करोड़ डॉलर का बकाया डिविडेंड मिल सकता है। जेफ़रीज़ ने आगे कहा कि हालांकि मीडियम-टर्म में कुछ जोखिम हो सकते हैं। लेकिन वेनेज़ुएला के उत्पादन में फिर से बढ़ोतरी से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
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