NSE IPO: खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं होगा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, CEO ने बताई वजह – nse will not list its shares on its own platform when it goes public md and ceo ashish chauhan explained the reason



नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जब पब्लिक होगा, तो वह अपने शेयर अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं करेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय नियम इसकी इजाजत नहीं देते हैं। यह बात NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) आशीष चौहान ने कही है। ANI के मुताबिक, चौहान ने कहा, “यह भारत का एक नियम है, और हमें इसका पालन करना होगा।” उन्होंने समझाया कि एक रेगुलेटेड इंस्टीट्यूशन होने के नाते NSE खुद को रेगुलेट नहीं कर सकता है। इसलिए उसे किसी दूसरे एक्सचेंज पर लिस्ट होना होगा। भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत, कॉन्फ्लिक्ट-ऑफ-इंटरेस्ट कारणों से स्टॉक एक्सचेंजों को अपने प्लेटफॉर्म पर खुद को लिस्ट करने की इजाजत नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि एक्सचेंज को अपने IPO का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करने और फाइल करने में कुछ महीने लगेंगे, जिसके बाद SEBI डॉक्यूमेंट को रिव्यू करेगा और आगे की मंजूरी देगा। प्रस्तावित IPO में केवल ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा, जिसमें मौजूदा निवेशक शेयरों को बिक्री के लिए पेश करेंगे। इसलिए एक्सचेंज को कोई नई कैपिटल हासिल नहीं होगी।

NSE में अभी 195000 शेयरहोल्डर

NSE में अभी लगभग 195,000 शेयरहोल्डर हैं, जिनके पास कुल मिलाकर एक्सचेंज का 100 प्रतिशत हिस्सा है। चौहान ने IPO को काफी हद तक प्रोसिजरल बताया, जिसका मकसद मौजूदा शेयरहोल्डर्स को लिक्विडिटी उपलब्ध कराना है, न कि विस्तार के लिए फंडिंग जुटाना। एक्सचेंज अपने ग्रोथ प्लान को पूरा करने के लिए काफी प्रॉफिट में है। उन्होंने कहा कि लिस्टिंग से शेयरहोल्डर्स के लिए ज्यादा पार्टिसिपेशन और लिक्विडिटी बढ़ती है। पब्लिक लिस्टिंग से ट्रांसपेरेंसी और गवर्नेंस मजबूत हो सकता है।

इनवेस्टमेंट बैंकों को पिच के लिए किया इनवाइट

NSE ने इनवेस्टमेंट बैंकों को एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया है। इसमें उन्हें IPO में रोल के लिए पिच करने के लिए इनवाइट किया गया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया है कि एक्सचेंज मार्च 2026 के मध्य तक IPO के लिए एडवाइजर चुनने का प्लान बना रहा है। NSE ने फरवरी महीने की शुरुआत में नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और LIC के पूर्व MD तबलेश पांडेय की अध्यक्षता में IPO कमेटी बनाई थी। साथ ही लिस्टिंग प्रोसेस की देखरेख के लिए रॉथ्सचाइल्ड एंड कंपनी को एक इंडिपेंडेंट एडवाइजर अपॉइंट किया था।

NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO 8 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग है। NSE ने दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। पिछले साल अगस्त में, NSE ने अपने प्रस्तावित IPO के लिए SEBI से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया था। यह सर्टिफिकेट इसे मिल चुका है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।



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