
NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ को लेकर एक बड़ी अपडेट है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन, तुहिन कांता पांडे ने शनिवार को बताया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आईपीओ के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है।
उन्होंने चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में बताया कि यह मंजूरी इसी महीने के भीतर मिल सकती है। उनके इस बयान से बाजार में यह उम्मीद मजबूत हुई है कि NSE का आईपीओ लॉन्च होने की प्रक्रिया अब अपने फाइनल स्टेज में आ गई है।
लंबे इंतजार के बाद आगे बढ़ता IPO
उनके मुताबिक, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलने के बाद करीब चार महीने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करने में लगेंगे। उसके बाद सेबी की ओर से इन डॉक्यूमेंट्स की जांच और सवाल-जवाब की प्रक्रिया में लगभग चार महीने और लग सकते हैं।
पहले से ही बड़ा पब्लिक शेयरहोल्डर बेस
NSE की खास बात यह है कि कंपनी के पास पहले से ही एक बड़ा पब्लिक शेयरहोल्डर बेस मौजूद है। फिलहाल NSE के करीब 1.72 लाख शेयरहोल्डर्स हैं और इसमें कोई प्रमोटर हिस्सेदारी नहीं है। यह इसे एक पूरी तरह से इंस्टीट्यूशनल स्ट्रक्चर वाला एक्सचेंज बनाता है।
2016 से अटका है NSE IPO
NSE ने पहली बार 2016 में अपना DRHP दाखिल किया था, लेकिन उसके बाद से आईपीओ प्रक्रिया लगातार अटकी रही। एक्सचेंज ने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के लिए कई बार सेबी से संपर्क किया। एक बार 2019 में, दो बार 2020 में, और फिर अगस्त 2024 में। हालांकि, को-लोकेशन और डार्क फाइबर एक्सेस जैसे मामलों से जुड़े नियामकीय और कानूनी मुद्दों के कारण इस प्रक्रिया में देरी होती रही।
सेबी और NSE के बीच बातचीत जारी
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने इससे पहले अप्रैल 2025 में मनीकंट्रोल बातचीत में कहा था कि NSE और सेबी के बीच गवर्नेंस, टेक्नोलॉजी, लंबित मुकदमों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा चल रही है। उन्होंने तब कहा था, “उम्मीद है कि इन सभी विषयों पर एक स्पष्ट रोडमैप के साथ समाधान निकल आएगा, जिसके बाद NSE IPO आगे बढ़ सकेगा।”
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