
Nifty Outlook: साल 2025 के तकरीबन खत्म होने के साथ ही शेयर बाजार बहुत ही सीमित दायरे में घूम रहा है। पिछले पूरे हफ्ते निफ्टी सिर्फ 150 अंकों के उतार-चढ़ाव के भीतर ही बना रहा।
हफ्ते की शुरुआत में निफ्टी ने 26,000 का स्तर दोबारा हासिल किया। बुल्स इसे बचाए रखने में कामयाब भी रहे। हालांकि, पिछले दो कारोबारी सत्रों में बाजार धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकता नजर आया।
आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि अब सोमवार, 29 दिसंबर से शुरू हो रहे हफ्ते में निफ्टी और निफ्टी बैंक की चाल कैसी रहेगी, कौन से लेवल अहम रहेंगे। साथ ही, किन महत्वपूर्ण फैक्टर पर नजर रहेगी।
निफ्टी का टेक्निकल ट्रेंड क्या कहता है
चार्ट पर लगातार पांच दिनों तक ऊंचे हाई और ऊंचे लो बनने का सिलसिला शुक्रवार को टूट गया। उस दिन निफ्टी 26,000 के नीचे जाने के बेहद करीब था, लेकिन अंत में किसी तरह इस अहम स्तर के ऊपर ही बंद हुआ।
अब 2025 के आखिरी तीन ट्रेडिंग सेशंस में निफ्टी के लिए 26,000 का लेवल सबसे अहम माना जा रहा है। यह साल वैसे भी बाजार के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। ऊपर की तरफ 26,200 का स्तर बड़ी रुकावट बना हुआ है। मंगलवार और बुधवार को निफ्टी इस लेवल के ऊपर गया जरूर, लेकिन वहां टिक नहीं पाया और क्लोजिंग नहीं दे सका।
निफ्टी पर एक्सपर्ट्स की सलाह
एंजल वन के राजेश भोसले का कहना है कि निफ्टी के लिए नीचे की तरफ 25,900 पहला सपोर्ट है। इसके बाद 25,700 का स्तर एक मजबूत बेस की तरह काम करेगा, जिससे शॉर्ट टर्म ट्रेंड बना रह सकता है। ऊपर की तरफ 26,250 से 26,350 का जोन बड़ा रेजिस्टेंस है।
भोसले के मुताबिक, अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर निकलता है, तो नए और अनछुए स्तर देखने को मिल सकते हैं। उनकी सलाह है कि गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाई जाए।
25950 से 25900 का दायरा अहम
SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह के मुताबिक, आगे चलकर 25,950 से 25,900 का दायरा निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट रहेगा। अगर निफ्टी लगातार 25,900 के नीचे बना रहता है, तो कमजोरी बढ़कर 25,800 और फिर 25,600 तक जा सकती है। वहीं ऊपर की ओर 26,200 से 26,250 का दायरा मजबूत रेजिस्टेंस बना रहेगा।
ब्रॉडर मार्केट में असली दबाव
इस उतार-चढ़ाव का सबसे ज्यादा असर ब्रॉडर मार्केट पर पड़ा है। हालांकि साल के अंत तक मिडकैप इंडेक्स ने रिकॉर्ड हाई जरूर छुआ, लेकिन तस्वीर पूरी तरह मजबूत नहीं दिखती।
भले ही स्क्रीन पर ज्यादा बदलाव नजर न आ रहा हो, लेकिन एडवांस-डिक्लाइन डेटा चिंता बढ़ाने वाला है। गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से लगभग दोगुनी रही। यह स्थिति बुल्स को बिल्कुल पसंद नहीं आएगी। खास बात यह है कि यह सब तब हो रहा है, जब रेलवे और मेटल जैसे सेक्टर्स में भारी वॉल्यूम के साथ तेजी दिख रही है।
रेलवे और मेटल शेयर क्यों चमके
पिछले हफ्ते रेलवे शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। निफ्टी 500 के टॉप 10 साप्ताहिक गेनर्स में से 7 शेयर रेलवे सेक्टर के ही रहे।
इसी बीच, कीमती धातुओं में आई तेजी भी बाजार की सबसे बड़ी चर्चा रही, खासकर चांदी। शुक्रवार रात कॉमेक्स पर चांदी के फ्यूचर्स 11% तक उछल गए और कीमतें लगभग 80 डॉलर प्रति औंस के पास पहुंच गईं।
देश में सिल्वर से जुड़ा एकमात्र लिस्टेड स्टॉक हिंदुस्तान जिंक पिछले एक महीने में करीब 31% चढ़ चुका है। वहीं हिंदुस्तान कॉपर के शेयर भी 2010 के बाद के सबसे ऊंचे स्तरों पर पहुंच गए हैं, क्योंकि तांबे की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं।
कोफोर्ज पर रहेगी निवेशकों की नजर
सोमवार को सबसे ज्यादा ध्यान कोफोर्ज पर रहने वाला है। पिछले तीन सत्रों में स्टॉक 11% से ज्यादा टूट चुका है। इसके बावजूद कंपनी ने बाजार बंद होने के बाद एक बड़ा अधिग्रहण घोषित किया है। ब्रोकरेज हाउस अब भी स्टॉक को लेकर पॉजिटिव हैं, लेकिन उनकी भाषा में सतर्कता साफ झलक रही है।
निफ्टी बैंक के लिए अहम लेवल
निफ्टी बैंक में प्राइवेट फाइनेंशियल शेयर फिलहाल कोई खास योगदान नहीं दे पा रहे हैं। ऊपर की तरफ 59,500 अब भी बड़ी रुकावट है। वहीं नीचे की ओर इंडेक्स 59,000 के नीचे जाने के करीब है। दिसंबर महीने में निफ्टी बैंक सिर्फ तीन बार ही इस लेवल के नीचे बंद हुआ है। फिलहाल इंडेक्स लगातार तीन दिनों से गिरावट में है और बाजार से कमजोर प्रदर्शन कर रहा है।
सैमको सिक्योरिटीज के ओम मेहरा के मुताबिक, निफ्टी बैंक के लिए पहला शॉर्ट टर्म सपोर्ट 38.2% फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल यानी 58,980 पर है, जो शुक्रवार के क्लोजिंग लेवल के बेहद पास है। इसके नीचे 50% रिट्रेसमेंट लेवल 58,630 अगला अहम सपोर्ट होगा।
वहीं 58,400 का स्तर, जो 61.8% फिबोनाची रिट्रेसमेंट से मेल खाता है, ट्रेंड तय करने वाला अहम पॉइंट है। उनका मानना है कि निकट भविष्य में निफ्टी बैंक भी सीमित दायरे में ही बना रह सकता है।
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