
Budget Day Nifty Returns: शेयर बाजार ने पिछले 15 सालों में बजट के दिन सीमित रिटर्न दिए हैं और निफ्टी इंडेक्स का इस दिन का औसत रिटर्न महज 0.2 फीसदी रहा है। ये आंकड़े SAMCO सिक्योरिटीज के मार्केट पर्सपेक्टिव्स एंड रिसर्च के हेड अपूर्व शेठ ने दिए हैं। अपूर्व शेठ ने बताया कि पिछले डेढ़ दशक के आंकड़ों से यह साफ होता है बजट का दिन शेयर बाजार के लिए आमतौर पर बड़ा ट्रिगर साबित नहीं हुआ है। साथ ही बजट को लेकर बाजार में बनने वाला उत्साह अक्सर किसी बड़े ट्रेडिंग मूवमेंट में तब्दील नहीं होता है।
अपूर्व शेठ ने बताया कि बजट को लेकर निवेशक काफी पहले से भी बाजार की ओर ध्यान देने लगते हैं। लेकिन ऐतिहासिक आंकड़े बताता है कि बजट वाले दिन बाजार की चाल अक्सर सीमित और अस्थिर रहती है।
2010 से अब तक के आंकड़ों के आधार पर शेठ ने बताया कि बजट के दिन Nifty 50 इंडेक्स का औसत मूवमेंट महज 0.19 प्रतिशत, जबकि Nifty Bank का औसत मूवमेंट 0.42 प्रतिशत का रहा है। अलग-अलग सालों में नतीजों में बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिससे संकेत मिलता है कि बजट के दिन की चाल नीतिगत घोषणाओं से ज्यादा पोजिशनिंग और पहले से बनी उम्मीदों पर निर्भर करती है।
आमतौर पर बजट से पहले का दौर सतर्कता भरा रहता है। इस दौरान निवेशक जोखिम कम करते नजर आते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बजट से पहले वाले चरण के दौरान निफ्टी का औसत रिटर्न –0.46 प्रतिशत और निफ्टी बैंक का –0.03 प्रतिशत रहा है, जो बजट से पहले मुनाफावसूली की ओर इशारा करता है।
इसके उलट, बजट के बाद वाले चरण में बाजार का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से बेहतर रहा है। बजट के बाद अगले दिन निफ्टी ने औसतन 1.35 प्रतिशत और निफ्टी बैंक ने 1.69 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इस दौरान निवेशक नीतियों में स्पष्टता, लिक्विडिटी, अर्निंग्स आउटलुक और ग्रोथ विजिबिलिटी पर ज्यादा फोकस करते हैं।
SAMCO के विश्लेषण के मुताबिक, 26 फरवरी 2010 को बजट के दिन निफ्टी में 1.2 प्रतिशत की तेजी आई थी, जबकि उससे पहले के रिटर्न 1.6 प्रतिशत और बाद के रिटर्न 4.1 प्रतिशत रहे। वहीं, 2017 में बजट की तारीख 1 फरवरी किए जाने के बाद, बजट के दिन निफ्टी का औसत मूवमेंट करीब 1.8 प्रतिशत रहा है।
अगर पिछले साल 2025 के बजट को देखें, तो उस दिन निफ्टी 0.11 प्रतिशत फिसलकर बंद हुआ। हालांकि उससे एक दिन पहले इंडेक्स में 2.8 प्रतिशत की तेजी आई थी, जबकि बजट के बाद रिटर्न –0.43 प्रतिशत रहा।
अपूर्व शेठ के मुताबिक, “बजट का दिन खुद शायद ही कभी कमाई का सबसे बड़ा मौका देता है। इतिहास बताता है कि धैर्य रखने वाले निवेशकों को ज्यादा फायदा हुआ है। बजट से पहले की अस्थिरता पोजिशनिंग के मौके देती है, जबकि बजट के बाद का समय ज्यादा स्थिर और रिटर्न-फ्रेंडली साबित हुआ है।”
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