MC Markets Poll : 2026 में भारतीय बाजार कर सकते हैं ग्लोबल शेयरों से बेहतर प्रदर्शन, FIIs की हो सकती है वापसी – mc markets poll indian markets could outperform global stocks in 2026 and fiis may return



MC Markets Poll : मनीकंट्रोल के एक पोल के मुताबिक 2026 में भारतीय इक्विटी मार्केट ग्लोबल मार्केट से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। हालांकि, निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को लेकर सतर्क रह सकते हैं। इस पोल में म्यूचुअल फंड, PMS, AIF और ब्रोकिंग फर्मों के 50 इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स शामिल हुए। पोल में शामिल 57 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि अगले साल भारतीय इक्विटीज़ ग्लोबल मार्केट से बेहतर प्रदर्शन करेंगी। इससे घरेलू ग्रोथ और बेहतर अर्निंग आउटलुक में उनके भरोसे को दिखाता है। लगभग 25 प्रतिशत लोगों का मानना ​​है कि ग्लोबल मार्केट बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि 18 प्रतिशत अभी तक कुछ तय नहीं कर पाए हैं।

बता दें कि 2025 में, MSCI इंडिया इंडेक्स ने US डॉलर के हिसाब से सिर्फ़ 2.2 प्रतिशत का कुल रिटर्न दिया। यह ब्रॉडर MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में हुई लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी और एशियाई देशों में हुई मज़बूत ग्रोथ से काफी पीछे रहा।

भारतीय बाजारों में तेजी आने की ये उम्मीद, विदेशी निवेशकों के व्यवहार को लेकर बनी सावधानी के बावजूद कायम है। लगभग 68 प्रतिशत जवाब देने वालों को उम्मीद है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) 2026 में नेट सेलर बने रहेंगे। गौरतलब है कि 2025 में FIIs ने भारतीय इक्विटी बाजारों में लगभग 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके चलते IT, FMCG और पावर स्टॉक्स में हुए निवेश में तेज़ी से कमी आई है। जबकि टेलीकॉम, तेल और गैस और सर्विसेज़ में विदेशी निवेश बढ़ा है।

ग्लोबल संकेत अच्छे

कई मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि कई ऐसे मैक्रो फैक्टर्स जो भारत में विदेशी निवेश की रिकवरी को सपोर्ट कर सकते हैं। लगभग 63 प्रतिशत उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि US फेडरल रिज़र्व 2026 में दो बार दरें घटाएगा, जबकि 33 प्रतिशत को एक बार कटौती की उम्मीद है। ओमनीसाइंस कैपिटल के फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट विकास गुप्ता का कहना है कि नए फेड चेयरमैन के आने बाद अमेरिका 2-3 बार दरें घटाई जा सकती हैं। इससे ज़्यादा रिटर्न के लिए निवेशक दूसरे बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं। गुप्ता ने आगे कहा कि बड़े उभरते बाजारों या किसी भी ट्रिलियन-डॉलर से ज़्यादा की अर्थव्यवस्था और स्टॉक मार्केट में भारत सबसे अलग नजर आ रहा है। हाई रियल GDP ग्रोथ और 50 करोड़ डॉलर या उससे ज़्यादा के मार्केट कैप वाली लगभग 500 कंपनियों के साथ भारत में निवेश के अच्छे मौके हैं। साथ ही बड़े घरेलू निवेशक आधार के कारण यहां हाई लेटेंट लिक्विडिटी भी है।

रुपए को लेकर चिंता नहीं

इस पोल के मुताबिक रुपये पर सीमित दबाव के संकेत हैं। पोल में शामिल 57 प्रतिशत एक्सपर्ट्स रुपए में 0-3 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं और 35 प्रतिशत 3-4 प्रतिशत की गिरावट देख रहे हैं। इससे विदेशी निवेशकों के लिए करेंसी रिस्क कम होगा और भारतीय इक्विटी की रिलेटिव अट्रैक्टिवनेस को सपोर्ट मिलेगा। SBI सिक्योरिटीज के सनी अग्रवाल का कहना है कि USD INR 91 के हालिया निचले स्तर पर पहुंचने के बाद स्थिर हो गया है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में किसी भी बड़ी देरी या जियोपॉलिटिकल टेंशन में बढ़ोतरी से USD INR पर फौरी तौर पर दबाव पड़ सकता है।

कंपनियों के नतीजों में सुधार साबित होगा मेन ड्राइवर

कंपनियों के नतीजों में सुधार को लेकर बनी उम्मीद साल 2026 में FII की भारत वापसी के मुख्य कारणों में से एक हैं। सनी अग्रवाल का कहना है कि लगभग 15 महीनों के कंसोलिडेशन के बाद डबल-डिजिट अर्निंग ग्रोथ और तुलनात्मक रूप से बेहतर वैल्यूएशन के कारण FII निवेश में रिकवरी होने की संभावना है। जेफरीज ने हाल ही में एक नोट में कहा था कि 2026 में कॉर्पोरेट अर्निंग ग्रोथ में तेज बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे MSCI इंडिया EPS FY25/26 में लगभग 8-9 प्रतिशत से बढ़कर FY26/27 में 13-14 प्रतिशत ग्रोथ होने का अनुमान है। इस ग्रोथ में बैंक, ऑटो और पावर सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान होगा। ब्रोकरेज ने यह भी कहा है कि म्यूचुअल फंड, SIP, बीमा कंपनियों, प्रोविडेंट फंड, AIF और डायरेक्ट इक्विटी की जरिए लगातार हो रहे निवेश(औसतन $7–$8 बिलियन प्रति माह) के चलते हमारे बाजार नेट विदेशी बिकवाली की भरपाई कर सकते हैं,जिससे बाजार को अतिरिक्त सपोर्ट मिलेगा।

विकास गुप्ता आगे कहा कि हेडलाइन वैल्यूएशन मल्टीपल्स अभी भी महंगे लग रहे हैं, लेकिन नॉर्मलाइज़्ड P/E रीज़नेबल है। कम महंगाई और बहुत ज़्यादा रियल इंटरेस्ट रेट को देखते हुए RBI रेट में कटौती कर सकता है। वहीं, सरकारी नीतियों से ग्रोथ, एक्सपोर्ट और FDI को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

AI और ट्रेड डील पर रहेगी नजर

AI रिवर्सल ट्रेंड और भारत-अमेरिका ट्रेड डील भी बड़े ड्राइवर हो सकते हैं। मनीकंट्रोल के साथ हाल ही में हुई एक बातचीत में, एक्सिस MF के इक्विटी हेड श्रेयश देवलकर ने कहा कि ग्लोबल AI ट्रेड से US बाजारों को बहुत ज़्यादा फायदा हुआ है,जिससे भारत में निवेश कम हुआ है। उन्होंने कहा, “AI-आधारित ट्रेड में थोड़ी भी कमी से पैसा भारत जैसे बाजारों की ओर जा सकता है।”

देवलकर ने यह भी कहा कि रुपये की गिरावट से भारतीय एसेट्स की रिलेटिव अट्रैक्टिवनेस बेहतर हुई है, जबकि नॉमिनल GDP ग्रोथ का डबल डिजिट के करीब पहुंचना अर्निंग्स विजिबिलिटी को काफी बढ़ाएगा।

विकास गुप्ता की राय है कि जैसे-जैसे ग्लोबल रेट साइकिल बदल रही है, भारत में FII निवेश के वापस आने की संभावना बढ़ रही है। भारत का बड़ा इक्विटी मार्केट, हाई रियल GDP ग्रोथ, घरेलू लिक्विडिटी और सपोर्टिव पॉलिसी माहौल इसे बड़े उभरते बाजारों में खास बनाता है।

कुल मिलाकर, इस पोल से पता चलता है कि मार्केट एक्सपर्ट 2026 में भारतीय इक्विटीज़ को लेकर पॉजिटिव हैं। उनका मानना है कि अच्छी घरेलू ग्रोथ और बेहतर अर्निंग की उम्मीद के कारण भारतीय बाजार बेहतर पर सकते है। हालांकि विदेशी निवेश एक अहम फैक्टर बना हुआ है जिस पर नज़र रखनी होगी।

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