
LG Electronics Share Price: होम एंप्लाएंसेज और मोबाइल फोन को छोड़ बाकी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के शेयरों में आज बिकवाली का जोरदार दबाव दिखा। यह दबाव इसलिए आया क्योंकि कंपनी के करीब 2% आउटस्टैंडिंग इक्विटी का तीन महीने का लॉक-इन पीरियड खत्म हुआ तो शेयर धड़ाम हो गए और यह 4% से अधिक फिसललकर यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद शेयर संभल नहीं पाए और अभी भी यह काफी कमजोर स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 2.68% की गिरावट के साथ ₹1418.70 पर है। इंट्रा-डे में यह 4.45% फिसलकर ₹1392.80 तक आ गया था।
LG Electronics India के कितने शेयरों का लॉक-इन हुआ खत्म?
नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च के मुताबिक एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के करीब 1.52 करोड़ शेयरों यानी करीब 2% आउटस्टैंडिंग इक्विटी का तीन महीने का लॉक-इन खत्म हुआ है। वैसे बता दें कि शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म होने का मतलब ये नहीं है कि शेयरहोल्डर्स इनकी बिक्री करने ही वाले हैं बल्कि इसका मतलब ये है कि लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद इनके होल्डर्स मुनाफावसूली कर सकते हैं। जितने शेयरों का लॉक-इन खत्म हुआ है, एक कारोबारी दिन पहले 7 जनवरी को क्लोजिंग प्राइस ₹1,457.70 के हिसाब से उनकी वैल्यू करीब ₹2,215 करोड़ है।
क्या है ब्रोकरेज फर्मों का रुझान?
हाल ही में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स को इसका सबसे लोएस्ट टारगेट प्राइस मिला। 24 दिसंबर को एवेंदुस स्पार्क (Avendus Spark) ने एलदी इलेक्ट्रॉनिक्स की रिड्यूस रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की और ₹1536 का टारगेट प्राइस फिक्स किया। ब्रोकरेज फर्म ने अपने नोट में जिक्र किया है कि कॉम्पटीशन काफी बढ़ चुका है औ ग्राहकों की बार्गेनिंग पावर कमजोर हो चुकी है लेकिन एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की व्यापक पहुंच कंपनी के लिए एक प्रमुख ताकत बनी हुई है।
अब तक कैसी रही शेयरों की चाल?
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के ₹11,607 करोड़ के आईपीओ के तहत निवेशकों को ₹1140 के भाव पर शेयर जारी हुए थे और इसकी घरेलू स्टॉक मार्केट में 14 अक्टूबर 2025 को एंट्री हुई थी। इसके आईपीओ को ₹400000 करोड़ से अधिक की बोली मिली थी और घरेलू मार्केट में इसकी 50% प्रीमियम पर एंट्री हुई थी। लिस्टिंग के ही दिन यह ₹1736.40 के रिकॉर्ड हाई तक पहुंचा था। इस हाई से तीन ही महीने में यह 19.79% फिसलकर आज 8 जनवरी 2026 को ₹1392.80 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया।
अब कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो 13 अक्टूबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से इसमें प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 85% है और बाकी 15% पब्लिक शेयरहोल्डर्स हैं। इसमें 32 म्यूचुअल फंड्स की 2.67%, 38 बैंकों की 0.88% और 48 बीमा कंपनियों की 0.72% हिस्सेदारी है। हालांकि किसी एक म्यूचुअल फंड, बैंक या बीमा कंपनियों की होल्डिंग कंपनी में 1% या इससे अधिक नहीं है क्योंकि किसी का भी नाम शेयरहोल्डिंग पैटर्न में दिख नहीं रहा है और नियमों के मुताबिक कंपनियों को सिर्फ 1% या इससे अधिक होल्डिंग वाले निवेशकों के नाम का खुलासा करना अनिवार्य है। वहीं ₹2 लाख तक के निवेश वाले 4,84,74,444 खुदरा निवेशकों की कंपनी में 7.14% हिस्सेदारी है।
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