Land vs Home Investment: भारत के रियल एस्टेट बाजार में निवेश करने के कई रास्ते हैं। आप बड़े शहरों में घर या फ्लैट खरीद सकते हैं, या उभरते इलाकों में जमीन ले सकते हैं। दोनों विकल्पों के अपने फायदे और जोखिम हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि रिटर्न, लिक्विडिटी, टैक्स और जोखिम प्रोफाइल को समझे बिना फैसला नहीं करना चाहिए।
किस निवेश में ज्यादा बढ़ेगा पैसा
रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी ने लंबे समय में स्थिर बढ़त दिखाई है। Fortune Primero में रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर राहिल रेड्डी कहते हैं कि भारत के बड़े शहरों में घरों की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। कई जगह यह बढ़ोतरी महंगाई से भी ज्यादा रही है। कुछ बाजारों में पिछले 10 साल में कीमतें 100 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी हैं।
लग्जरी प्रॉपर्टी सेगमेंट में भी अच्छी ग्रोथ
The Chapter में बिजनेस ग्रोथ और स्ट्रैटेजी की वाइस प्रेसिडेंट दर्शिनी थानावाला के मुताबिक, नॉर्थ गोवा जैसे हाई डिमांड माइक्रो मार्केट में अच्छी डिजाइन और ब्रांडेड लक्जरी घरों ने आम बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया है। सीमित सप्लाई, खास डिजाइन और लाइफस्टाइल अपील कीमतों को लंबे समय तक सपोर्ट देती है।

जमीन का प्रदर्शन ज्यादा लोकेशन पर
The House of Abhinandan Lodha के सीईओ समुज्ज्वल घोष बताते हैं कि अयोध्या, वृंदावन और अमृतसर जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों में जमीन की मांग बढ़ी है। राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के बाद वहां कीमतों में तेजी आई है।
उनका कहना है कि अच्छी लोकेशन वाली जमीन ज्यादा तेजी से बढ़ती है। अगर जमीन लंबी अवधि की योजना से जुड़ी हो, तो समय के साथ उसकी कीमत में तेज रीप्राइस देखने को मिल सकता है। पिछले पांच साल में वृंदावन में करीब 29 प्रतिशत और अयोध्या में 40 प्रतिशत से ज्यादा CAGR की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
लिक्विडिटी और बेचने में आसानी
घर या फ्लैट बेचने में आम तौर पर ज्यादा आसानी होती है, क्योंकि खरीदारों की संख्या बड़ी होती है। बैंक लोन की सुविधा भी मिलती है। राहिल रेड्डी का भी कहना है कि रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी तेजी से बिक सकती है, क्योंकि संभावित खरीदार ज्यादा होते हैं।
लेकिन, जमीन के मामले में खरीदार सीमित हो सकते हैं। कई बार कागजी मंजूरियों की प्रक्रिया लंबी होती है। समुज्ज्वल घोष का कहना है कि अब ब्रांडेड और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित जमीन प्रोजेक्ट्स, जिनमें साफ टाइटल और इंफ्रास्ट्रक्चर हो, वहां लिक्विडिटी पहले से ज्यादा बेहतर और भरोसेमंद हुई है।
दर्शिनी थानावाला के मुताबिक, चाहे घर हो या जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति, कम्युनिटी प्लानिंग और डिजाइन की गुणवत्ता, रीसेल की रफ्तार और कीमत पर असर डालती है।

टैक्स और नियमों का असर
जमीन और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी दोनों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। घोष बताते हैं कि जिन जमीन प्रोजेक्ट्स के टाइटल साफ हों और रेगुलेटरी मंजूरियां पूरी हों, वहां ट्रांजैक्शन का जोखिम कम होता है। वहीं RERA लागू होने के बाद रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित हुए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
राहिल रेड्डी बताते हैं कि जमीन खरीदते समय जोनिंग और एग्जिट प्लान पर ध्यान देना जरूरी है। वहीं, रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में कंप्लायंस, फाइनेंसिंग और टैक्स प्लानिंग अपेक्षाकृत ज्यादा स्पष्ट होती है। दर्शिनी थानावाला का कहना है कि ब्रांडेड लग्जरी प्रोजेक्ट्स में मेंटेनेंस स्टैंडर्ड और रेगुलेटरी स्पष्टता लंबे समय तक वैल्यू बनाए रखने में मदद करती है।
जोखिम और रिटर्न का संतुलन
रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी तुरंत इस्तेमाल में लाई जा सकती है और उससे किराये की आय भी मिल सकती है। लेकिन इसमें रखरखाव का खर्च होता है और समय के साथ इमारत की घिसावट भी होती है। वहीं,जमीन में नियमित आय नहीं मिलती, लेकिन लंबी अवधि में कीमत बढ़ने या भविष्य में डेवलपमेंट की संभावना हो सकती है।
घोष के मुताबित, जमीन अपने आप में जोखिम भरी नहीं होती, बल्कि बिना जांचे या बिना योजना वाले प्रोजेक्ट्स जोखिम पैदा करते हैं। सही लोकेशन और साफ योजना वाली जमीन लंबी अवधि में वैल्यू बना सकती है। थानावाला कहती हैं कि चुने हुए माइक्रो मार्केट में लग्जरी घर, जहां असली खरीदारों की मांग बनी रहती है, बाजार के उतार चढ़ाव में भी अपनी वैल्यू संभाल कर रखते हैं।
पोर्टफोलियो में कैसे रखें संतुलन
एक्सपर्ट का मानना है कि रेजिडेंशियल और जमीन दोनों तरह के एसेट को मिलाकर रखने से संतुलित पोर्टफोलियो बनाया जा सकता है। रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न और किराये की आय दे सकती है, जबकि सोच समझकर चुनी गई जमीन इंफ्रास्ट्रक्चर या नीति बदलाव से जुड़ी तेजी का फायदा दे सकती है।
निवेशकों को अपने लक्ष्य, निवेश की अवधि और चुने गए माइक्रो मार्केट की स्थिति को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए, ताकि पोर्टफोलियो मजबूत और टिकाऊ बन सके।
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