India-EU ट्रेड डील ने KPR मिल और वेलस्पन लिविंग में भरा जोश, जानिए और किन शेयरों और सेक्टरों को होगा फायदा – india eu trade deal has boosted sentiment of kpr mill and welspun living gains in other textile pharmaceutical and chemical stocks



India-EU trade deal : आज भारत-ई.यू. ट्रेड डील की घोषणा हो गई है। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि इस डील से घरेलू इक्विटी मार्केट में जोश पैदा होगा। डील से जुड़ी उम्मीदों के कारण KPR मिल, वेलस्पन लिविंग और नितिन स्पिनर्स के शेयरों में अच्छी तेज़ी आई है। इनको इस फ्री-ट्रेड डील ( FTA) से फायदा होने की उम्मीद है। अभी, यूरोपीय संघ को भारत का एक्सपोर्ट उसके कुल एक्सपोर्ट का 17 प्रतिशत है। एमके ग्लोबल के अनुसार इस द्विपक्षीय समझौते के चलते भारत से यूरोपियन यूनियन को होने वाला एक्सपोर्ट लगभग 50 अरब डॉलर तक बढ़ा सकता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि इस डील के चलते भारत का इंपोर्ट सस्ता हो सकता और देश में ज़्यादा FDI आ सकता है। इससे भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की सहूलियत भी बढ़ेगी। इस डील के चलते रेगुलेटरी दिक्कतें कम होगी। इससे IT सर्विसेज़ एक्सपोर्ट में बढ़त देखने को मिल सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस डील से फार्मा, टेक्सटाइल और केमिकल जैसे एक्सपोर्ट फोकस्ड शेयरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। हालांकि, एमके ग्लोबल का कहना है कि भारत-E.U. डील का बाजार पर अच्छा असर होगा। लेकिन रुपये में स्थिरता और ग्लोबल दबाव कम होने के लिए एक अच्छी U.S-भारत ट्रेड डील ज़रूरी है।

टेक्सटाइल

भारतीय टेक्सटाइल और कपड़ों के कुल एक्सपोर्ट में यूरोपियन यूनियन कि लगभग 38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं भारतीय टेक्सटाइल का इंपोर्ट, E.U. के कुल इंपोर्ट का सिर्फ़ 5 प्रतिशत है।

साल 2024 में टेक्सटाइल और कपड़ों के लिए E.U. के टॉप सप्लायर चीन (28 प्रतिशत), बांग्लादेश (22 प्रतिशत), तुर्की (11 प्रतिशत), वियतनाम (6 प्रतिशत), भारत (5 प्रतिशत)रहे। इसके अलावा, जहां भारत पर 10-12 प्रतिशत टैरिफ लगता है, वहीं बांग्लादेश, वियतनाम, इथियोपिया पर FTA के कारण ज़ीरो प्रतिशत टैरिफ लगता है।

एमके का कहना है कि “अगर टैरिफ 10-12 प्रतिशत से घटकर 0 प्रतिशत हो जाता है, तो भारत को कीमत के मामले में मुकाबला करने में बहुत बड़ा फ़ायदा होगा, और यह वियतनाम और बांग्लादेश के बराबर हो जाएगा। भारत निटवियर, आउटरवियर और ट्राउज़र में ज़्यादा मार्केट शेयर हासिल करने के लिए अच्छी स्थिति में है।

अगर भारत वेजिटेबल टेक्सटाइल फाइबर, पेपर यार्न और बुने हुए कपड़ों पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करता है तो इससे भारतीय कपड़ा बनाने वाली कंपनियों को फायदा होने की संभावना है, क्योंकि उनकी इनपुट कॉस्ट कम हो जाएगी। ऐसे में अरविंद, वर्धमान टेक्सटाइल्स और KPR मिल्स को फायदा होगा।

फार्मास्युटिकल्स

भारत का E.U को होने वाला फ़ॉर्मूलेशन एक्सपोर्ट 2.95 अरब डॉलर के आसपास है जो भारत के कुल फ़ार्मा फ़ॉर्मूलेशन एक्सपोर्ट का लगभग 12 प्रतिशत है। हालांकि, E.U. के कुल फ़ार्मा इंपोर्ट में भारत का हिस्सा सिर्फ़ 2.2 प्रतिशत है,जिससे पता चलता है कि इसमें ग्रोथ की काफ़ी गुंजाइश है।

एमके (Emkay) ने बताया कि E.U. में दवाओं को मंज़ूरी मिलने की प्रक्रिया बहुत धीमी है। इसमें आमतौर पर 2-3 साल लगते हैं और फीस भी बहुत ज़्यादा होती है। सख्त री-फाइलिंग नियमों और भारी लालफीताशाही के कारण, जेनेरिक दवाओं की E.U. मार्केट में एंट्री में अक्सर देरी होती है।

इस डील के चलते अप्रूवल में सरलता आने से भारतीय जेनेरिक कंपनियों को E.U. पोर्टफोलियो बढ़ाने, ज़्यादा टेंडर जीतने और US पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही यूरोपीय फार्मा कंपनियों को लागत और सोर्सिंग में फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। इससे भारतीय CDMO कंपनियों को फायदा हो सकता है। भारतीय बायोसिमिलर कंपनियों को भी E.U. मार्केट में तेज़ी से और आसानी से एंट्री मिलेगी।

इस डील से बायोसिमिलर सेगमेंट में बायोकॉन और डॉ. रेड्डीज़ को फायदा होगा। वहीं, जेनेरिक्स में ल्यूपिन, ऑरोबिंदो, टोरेंट फार्मा, इप्का लेबोरेटरीज और सन फार्मा फायदे में रहेंगी।

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