
IDBI Bank Stake Sale: आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया की अब अंतिम चरण तक पहुंचती दिख रही है। डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने शॉर्टलिस्ट किए गए बोलीदाताओं को 5 फरवरी तक अपनी फाइनल बोली जमा कराने को कहा है। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि चुने गए बोलीदाताओं को अंतिम बोली के लिए आमंत्रण और समयसीमा भेज दी गई है।
बता दें कि IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री के लिए कोटक महिंद्रा बैंक, एमिरेट्स एनबीडी और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स को दावेदार चुना गया है। सूत्रों ने ूताया कि DIPAM की ओर से इन तीनों कंपनियों के जनवरी के तीसरे हफ्ते में फाइनल बोली जमा कराने की सूचना भेजी गई है।
SEBI नियमों के तहत होगी बोली कीमत
IDBI बैंक के शेयर, स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड हैं। ऐसे में अंतिम बोली की कीमत SEBI के टेकओवर नियमों के अनुरूप तय की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया में अधिग्रहण मूल्य को सेबी के ओपन ऑफर और टेकओवर मानदंडों के अनुसार दिखाना होगा। इस संबंध में DIPAM, कोटक महिंद्रा बैंक, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स को भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।
कैसे आगे बढ़ेगी चयन प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, वित्तीय बोलियां जमा होने के बाद उन्हें ट्रांजैक्शन सलाहकारों, अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG) के सदस्यों और बोली लगाने वाली कंपनियों के अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला जाएगा। इसके बाद सबसे ऊंची बोली (H1) की पहचान की जाएगी। सूत्र ने बताया कि बोली का मूल्यांकन करना और सबसे ऊंची बोली (H1) की पहचान करना एक सीधी प्रक्रिया है और इसमें ज्यादा समय नहीं लगता।
H1 चुने जाने के बाद प्रस्ताव को अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG) के पास सिफारिश के लिए भेजा जाएगा, और इसके बाद इसे वित्त मंत्री की मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। अगर सभी चरण तय समय पर पूरे होते हैं, तो IDBI बैंक के विनिवेश के लिए साफ विजेता की पहचान मार्च 2026 तक हो सकती है।
भुगतान और मालिकाना हक का ट्रांसफर
हालांकि, सफल बोलीदाता को बैंक की अंतिम जिम्मेदारी सौंपना इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे की प्रक्रियाएं कितनी जल्दी पूरी होती हैं और विजेता बोलीदाता बिक्री की पूरी राशि चुकाने के लिए कितना तैयार है। RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) के अनुसार, सफल बोलीदाता को पूरी राशि नकद में चुकानी होगी। इसके साथ ही, सूत्रों का कहना है कि विनिवेश के बाद भी IDBI बैंक की पहचान को बनाए रखने पर जोर दिया जा सकता है।
एक सरकारी सूत्र ने बताया कि IMG से मंजूरी मिलने के बाद सफल बोलीदाता के नाम को अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
2020 से चली आ रही है प्रक्रिया
IDBI बैंक के विनिवेश का प्रस्ताव पहली बार फरवरी 2020 में सामने आया था, जब वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2021 का बजट पेश किया था। इसके बाद अक्टूबर 2022 में इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया गया।
इस बीच, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानदंडों के तहत चार इच्छुक निवेशकों को बोली लगाने के लिए मंजूरी दी थी। इनमें कोटक महिंद्रा बैंक, फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स, एमिरेट्स NBD और ओकट्री कैपिटल शामिल थे। जनवरी 2025 में IDBI बैंक में क्लोजिंग ड्यू डिलिजेंस की प्रक्रिया शुरू हुई थी और अब एक साल से अधिक समय बाद DIPAM ने अंतिम बोलियां मंगाई हैं।
सरकार और LIC बेचेंगे 60% से ज्यादा हिस्सेदारी
विनिवेश योजना के तहत भारत सरकार और लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) मिलकर IDBI बैंक में अपनी मेजॉरिटी हिस्सेदारी बेचेंगे। सरकार 30.48 प्रतिशत और LIC 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी।
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