Hindustan Zinc share price : चांदी ने दिया झटका, 2 दिनों में करीब 7% फिसले हिंदुस्तान जिंक के शेयर, अब क्या करें? –  hindustan zinc shares have fallen by nearly 7 percent in two days what should be the strategy now



Hindustan Zinc share price : हिंदुस्तान जिंक के शेयर पर आज भी दबाव देखने को मिल रहा है। 2 दिनों में ये शेयर करीब 7 फीसदी फिसल गया है। फिलहाल एनएसई पर ये शेयर 36.35 रुपए यानी 5.77 फीसदी की गिरावट के साथ 594 रुपए के आसपास कारोबार कर रह है। आज का इसका दिन का हाई 623.45 रुपए और दिन का लो 588.35 रुपए है। 1 हफ्ते में ये शेयर 3.01 फीसदी टूटा है। वहीं, 1 महीने में इसमें 20.91 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।

7 जनवरी को भी हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में गिरावट देखने को मिली थी। चांदी की कीमतों में गिरावट से इस स्टॉक को तगड़ा झटका लगा है। वहीं, आज 8 जनवरी को हिंदुस्तान जिंक के शेयर लगभग 5 प्रतिशत गिरकर तीन हफ़्ते के निचले स्तर पर आ गए। कंपनी भारत में चांदी की सबसे बड़ी प्रोड्यूसर है। यह कम से कम 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली रिफाइंड चांदी बनाती है।

हिंदुस्तान जिंक में गिरावट क्यों

तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर सिल्वर के प्रोडक्शन में 1 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तिमाही के दौरान कंपनी ने सिल्वर प्रोडक्शन का गाइडेंस घटाया था। प्रोडक्शन गाइडेंस घटाकर 680 टन किया गया था। इससे पहले 700-710 टन प्रोडक्शन का गाइडेंस दिया गया था। ग्लोबल मार्केट में चांदी कीमतें रिकॉर्ड हाई से 6 फीसदी नीचे आ गई हैं।

घरेलू बाजार की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर मार्च एक्सपायरी वाले चांदी के वायदा भाव 3,000 रुपये से ज़्यादा गिरकर 2,47,529 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। इसके पहले ये कॉन्ट्रैक्ट 2,59,692 रुपये प्रति किलोग्राम के नए लाइफटाइम हाई पर पहुंच गया था। इसी तरह मई एक्सपायरी वाले वायदा का भाव 3,300 रुपये से ज़्यादा गिरकर 2,54,876 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। वहीं, जुलाई एक्सपायरी वाले वायदा कॉन्ट्रैक्ट 4,000 रुपये से ज़्यादा गिरकर 2,62,399 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं।

इस तेज़ गिरावट की वजह प्रॉफ़िट बुकिंग हो सकती है। इस हफ़्ते आने वाले अहम अमेरिकी रोज़गार डेटा से पहले मज़बूत डॉलर ने कीमती धातुओं के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया है।

सिल्वर ETF पर एक नजर

सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। एडलवाइस सिल्वर ETF, HDFC सिल्वर ETF, UTI सिल्वर ETF, एक्सिस सिल्वर ETF, ज़ेरोधा सिल्वर ETF, ग्रोव सिल्वर ETF, टाटा सिल्वर ETF, SBI सिल्वर ETF, DSP सिल्वर ETF, आदित्य बिड़ला सिल्वर ETF, मिराए एसेट सिल्वर ETF, निप्पॉन सिल्वर ETF और ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF में से हर एक में 3 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई है। वहीं, कोटक सिल्वर ETD, मोतीलाल ओसवाल सिल्वर ETF और 360 ONE सिल्वर ETF में लगभग 3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।

अब क्या हो रणनीति

VSRK कैपिटल के अग्रवाल का कहना है कि सोने की तुलना में चांदी ज़्यादा वोलेटाइल है। इसमें बबल जैसा व्यवहार दिखा रह है। उन्होंने आगे कहा कि जब इसकी कीमतें सपोर्ट ज़ोन के पास स्थिर हो जाएं और मार्केट सेंटीमेंट बेहतर हो,तो एंट्री की स्ट्रेटेजी प्लान की जा सकती है। लेकिन यह ध्यान रखें कि एक मज़बूत रैली के बाद मेटल्स कई सालों तक वोलेटाइल रह सकते हैं।

INVasset PMS के बिजनेस हेड, हर्षल दसानी ने कहा कि 2026 के नजरिए से देखें तो खासकर चांदी के लिए मीडियम-टर्म आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ी स्ट्रक्चरल इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत बनी हुई है, जबकि कई सालों से सप्लाई में कमी बनी हुई है। इसके चलते मार्केट में इसकी कमी बनी हुई है।

दासानी ने आगे कहा कि खास तौर पर चांदी 2025 में एक मोमेंटम ट्रेड बन गई थी। इसमें साल भर तेजी रही। ऐसे में सेंटीमेंट बदलने पर यह प्रॉफिट-बुकिंग और लेवरेज्ड अनवाइंड्स का शिकार बन गई। सोने ने भी पिछले साल ज़बरदस्त मुनाफा दिया। इतनी मज़बूत तेजी के बाद जब रूटीन करेक्शन भी होते हैं तो वे गंभीर लगते हैं।

एनालिस्ट्स का कहना है कि शॉर्ट टर्म में चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में US डॉलर और रियल इंटरेस्ट रेट की अहम भूमिका होगी।

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