Gold-Silver Prices: रिकॉर्ड हाई से गिरा सोना-चांदी का भाव, क्या यही है खरीदने का सही मौका? – gold and silver prices fall from their all-time highs should you buy the dip



Gold and Silver Prices: साल 2025 में जबरदस्त तेजी दिखाने के बाद सोना और चांदी अब अपने ऑल-टाइम हाई स्तरों से कुछ नीचे फिसलते नजर आ रहे हैं। हालिया गिरावट ने निवेशकों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सिर्फ मुनाफावसूली और तकनीकी करेक्शन है, या फिर इन धातुओं में कुछ समय के लिए सुस्ती का दौर शुरू हो सकता है?

बाजार जानकारों के मुताबिक, हालिया कमजोरी का बड़ा कारण तकनीकी फैक्टर्स हैं। OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग का कहना है कि बीते एक हफ्ते में सोना-चांदी में आई तेज उछाल के बाद कीमतें जरूरत से ज्यादा खिंच गई थीं। ऐसे में लीवरेज्ड पोजीशन में फंसे निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया, जिससे ओवरबॉट जोन में पहुंचे मोमेंटम इंडिकेटर्स अब सामान्य स्तर की ओर लौट रहे हैं। इसी तकनीकी अनवाइंडिंग की वजह से कीमतों पर दबाव देखने को मिला।

घरेलू बाजार की बात करें तो यहां गिरावट बहुत तेज नहीं रही। सोने के भाव विभिन्न शुद्धता स्तरों पर लगभग स्थिर बने हुए हैं, जबकि चांदी में सीमित कमजोरी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल घबराहट में बिक्री नहीं कर रहे, बल्कि ग्लोबल संकेतों के बीच सतर्क रुख अपना रहे हैं।

VT मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल का मानना है कि स्टेबिलिटी और मैक्रोइकोनॉमिक रिस्क से मिलने वाले सपोर्ट की वजह से गोल्ड आने वाले साल में भी एक मजबूत कोर एसेट के रूप में बना रह सकता है। सेंट्रल बैंकों की ओर से लगातार खरीद भी इसे सपोर्ट दे रही है। वहीं, चांदी में ज्यादा तेजी की संभावना जरूर है, लेकिन इसकी कीमतें इंडस्ट्रियल मांग पर निर्भर होने के कारण ज्यादा उतार-चढ़ाव झेलती हैं।

मेहता इक्विटीज के वीपी (कमोडिटी) राहुल कलंत्री का कहना है कि हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे टेक्निकल वजहों के साथ-साथ हॉलिडे सीजन में कम ट्रेडिंग और CME की ओर मार्जिन बढ़ाए जाने जैसे फैक्टर्स भी जिम्मेदार हैं। इससे कई ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन कम करनी पड़ी। हालांकि, उनका मानना है कि जियोपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल अनिश्चितता निचले स्तरों पर सोना-चांदी को सपोर्ट दे सकती है।

2025 में सोने की तुलना में चांदी ने कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तेजी चांदी को करेक्शन के लिए भी संवेदनशील बनाती है। आर्थिक ग्रोथ में जरा सी कमजोरी चांदी पर बड़ा असर डाल सकती है। इसके उलट, सोना संस्थागत निवेशकों की पसंद बना रह सकता है, खासकर तब जब राजकोषीय स्थिरता, करेंसी क्रेडिबिलिटी और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर चिंताएं बनी रहें।

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