Gold-Silver Prices: ईरान युद्ध और महंगाई जैसे अनिश्चितता के माहौल में अमूमन सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जाती है। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं हो रहा। उलटे कीमतों में कुछ हद तक गिरावट ही आई है। गोल्ड मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX अपने 2 मार्च के हाई लेवल से फिलहाल करीब 5% नीचे है। वहीं, चांदी तो लगभग 10% टूट चुका है। आइए जानते हैं कि सोने और चांदी में नरमी क्यों बनी है और इनका आगे का रुख कैसा है।
MCX पर गोल्ड-सिल्वर में नरमी
गुरुवार को MCX पर सोना और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई। दोपहर करीब 02:15 बजे सिल्वर फ्यूचर्स 1.11% गिरकर 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ गया। वहीं गोल्ड फ्यूचर्स करीब 0.13% गिरकर 10 ग्राम के लिए 1,61,426 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग 5,163.90 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर रही। वहीं कॉमेक्स पर सिल्वर पहले 81 डॉलर प्रति औंस तक गिर गई थी, लेकिन बाद में कुछ नुकसान की भरपाई करते हुए 82.71 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।

किन 5 कारणों से गिरे सोना-चांदी
1. मजबूत डॉलर : सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में ट्रेड होते हैं। जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरी करेंसी वाले निवेशकों के लिए गोल्ड-सिल्वर महंगे हो जाते हैं, जिससे डिमांड घटती है और कीमतें गिरती हैं। डॉलर इंडेक्स एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा है, जिससे सोने-चांदी पर प्रेशर आया।
2. ब्याज दर बढ़ने की आशंका: ईरान युद्ध से महंगाई बढ़ने की आशंका है। ऐसे में अनुमान है कि अमेरिका का फेडरल रिजर्व ब्याज दरें ऊंची रखेगा। इसके चलते निवेशक गोल्ड-सिल्वर छोड़कर बॉन्ड या अन्य ब्याज देने वाले एसेट में पैसा लगाते हैं। क्योंकि सोना-चांदी ‘नॉन-यील्डिंग एसेट’ हैं यानी इनसे ब्याज नहीं मिलता।
3. रिकॉर्ड तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग: पिछले महीनों में सोना और खासकर सिल्वर में तेज रैली आई थी। जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती हैं तो बड़े निवेशक मुनाफा निकालते हैं। इससे कीमतें गिरती हैं या फिर कुछ समय के लिए सीमित दायरे में ठहर जाती हैं।
4. बॉन्ड यील्ड और अन्य एसेट: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशक सुरक्षित रिटर्न वाले विकल्पों की तरफ शिफ्ट होते हैं। इससे गोल्ड-सिल्वर में निवेश कम हो जाता है और कीमतों पर दबाव पड़ता है।
5. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: पश्चिम एशिया में तनाव ने कच्चे तेल का दाम बढ़ा दिया है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका है। इसके चलते केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति अपना सकते हैं। इससे लिक्विडिटी कम होती है और कमोडिटी बाजार दबाव में आ जाता है।

गोल्ड-सिल्वर पर एक्सपर्ट की राय
Geojit Investments के कमोडिटी रिसर्च प्रमुख हरीश वी का कहना है कि मौजूदा हालात में सोने का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है। उनके मुताबिक भू राजनीतिक तनाव और मजबूत फंडामेंटल के कारण सोने की कीमतों को सहारा मिल रहा है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चांदी में उतार चढ़ाव ज्यादा रह सकता है, क्योंकि इसमें सट्टा कारोबार यानी स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग ज्यादा होती है। फिर भी इसका कुल मिलाकर रुख फिलहाल हल्का सकारात्मक है।
गोल्ड की चाल इन फैक्टर का असर
Ventura के कमोडिटी और CRM प्रमुख एन एस रामास्वामी ने सोने की चाल को ‘रस्साकशी’ जैसा बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ भू राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर भी कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
अगर संभावित सप्लाई दिक्कतों के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई बढ़ सकती है और रियल यील्ड ऊपर जा सकती है। आमतौर पर इससे सोने जैसे ऐसे एसेट पर दबाव आता है जिनसे ब्याज नहीं मिलता। लेकिन, दूसरी ओर कुछ फैक्टर सोने को सहारा भी दे रहे हैं। इनमें अमेरिका का बढ़ता राजकोषीय घाटा और केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की लगातार खरीद शामिल है।
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