Gold-Silver ETF: सोना और चांदी की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को अपनी ओर खींचा है। खासकर गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश बढ़ा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ तेजी देखकर इन एसेट्स में पैसा लगाना समझदारी होगी, या निवेश से पहले कुछ बातों पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है?
गोल्ड और सिल्वर ETF ने कितना रिटर्न दिया?
पिछले एक साल में गोल्ड ETF ने 82.32 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है। वहीं 10 साल की अवधि में इनका रिटर्न 16.65 प्रतिशत से शुरू होता है।
सिल्वर ETF का प्रदर्शन और भी तेज रहा है। एक साल में 171.30 प्रतिशत तक का रिटर्न दर्ज हुआ है। 10 साल के आधार पर रिटर्न 59.24 प्रतिशत तक रहा है। अगर घरेलू फ्यूचर्स कीमतों से तुलना करें तो पिछले एक साल में गोल्ड करीब 87 प्रतिशत और सिल्वर करीब 181 प्रतिशत चढ़ा है।
ETF और फिजिकल कीमतों में अंतर क्यों?
गोल्ड और सिल्वर ETF आमतौर पर London Bullion Market Association यानी LBMA से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय कीमतों को फॉलो करते हैं। वे सीधे घरेलू बाजार की दरों से लिंक नहीं होते।
इसी वजह से ETF और फिजिकल मेटल के रिटर्न में थोड़ा अंतर दिख सकता है। इसके अलावा AMC द्वारा लगाया गया प्रीमियम या डिस्काउंट और ट्रैकिंग एरर भी फर्क पैदा करते हैं।
25 फरवरी 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 13 गोल्ड ETF और 10 सिल्वर ETF के ट्रेलिंग रिटर्न दर्ज किए गए हैं।
गोल्ड ETF की परफॉर्मेंस

- Quantum Gold ETF ने एक साल में 82.32 प्रतिशत का रिटर्न देकर सबसे बेहतर प्रदर्शन किया।
- UTI Gold ETF ने 2 से 10 साल की अवधि में अपेक्षाकृत ज्यादा स्थिर और संतुलित प्रदर्शन दिखाया।
- कुल मिलाकर 13 गोल्ड ETF का रिटर्न 16.65 प्रतिशत से 82.32 प्रतिशत के बीच रहा है।
सिल्वर ETF की परफॉर्मेंस

- भारत में सिल्वर ETF अपेक्षाकृत नया निवेश विकल्प है। ICICI Prudential Silver ETF 5 जनवरी 2022 को लॉन्च हुआ था। इसने दो साल में 92.19 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
- एक साल की अवधि में Tata Silver ETF ने 171.30 प्रतिशत का सबसे ज्यादा रिटर्न दिया।
- कुल 10 सिल्वर ETF का रिटर्न 57.19 प्रतिशत से 168.85 प्रतिशत के बीच रहा है। इसी दौरान घरेलू सिल्वर फ्यूचर्स करीब 181 प्रतिशत चढ़े हैं।
गोल्ड और सिल्वर ETF कैसे काम करते हैं?
भारत में Sebi से रजिस्टर्ड एसेट मैनेजमेंट कंपनियां स्टॉक एक्सचेंज पर गोल्ड और सिल्वर ETF उपलब्ध कराती हैं। निवेशक सीधे सोना या चांदी खरीदने के बजाय ETF यूनिट के जरिए निवेश करते हैं।
इन ETF का NAV उस धातु की बाजार कीमत पर आधारित होता है। निवेशकों का पैसा एक ही धातु में लगाया जाता है और उसकी कीमत मांग और सप्लाई के अनुसार बदलती रहती है। हाल में सोना और चांदी तीन हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंचे हैं। सेफ हेवन डिमांड और वैश्विक अनिश्चितता ने कीमतों को सहारा दिया है। हालांकि उतार चढ़ाव बना हुआ है।
क्या अभी निवेश करना चाहिए?
Stockify के फाउंडर और CEO पीयूष झुनझुनवाला के मुताबिक, सोना और चांदी की कीमतों में उतार चढ़ाव सामान्य है क्योंकि ये वैश्विक घटनाओं से प्रभावित होती हैं। उनका कहना है कि निवेशकों को हर एसेट की भविष्य की कीमत का अनुमान लगाने के बजाय संतुलित एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए।
झुनझुनवाला की सलाह है कि गोल्ड और सिल्वर ETF को पोर्टफोलियो में 5 से 15 प्रतिशत तक रखा जा सकता है। यह अनुपात निवेशक की जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है। उनके मुताबिक, कुछ निवेशक शॉर्ट टर्म उतार चढ़ाव का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन ज्यादातर निवेश ETF को डाइवर्सिफिकेशन के लिए कर रहे हैं, न कि सिर्फ तेजी पकड़ने के लिए।
झुनझुनवाला का यह भी कहना है कि एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय SIP के जरिए निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। इससे कीमतों के उतार चढ़ाव का असर कम हो सकता है।
निवेश से पहले किन बातों पर ध्यान दें?
कीमती धातु ETF में निवेश करते समय वोलैटिलिटी, ट्रैकिंग एरर और एक्सपेंस रेशियो जैसी बातों को समझना जरूरी है। निवेशकों को ETF की शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म परफॉर्मेंस दोनों देखनी चाहिए। आम तौर पर सोना और चांदी धैर्य रखने वाले निवेशकों को बेहतर रिटर्न देते हैं।
सिर्फ हालिया तेजी देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं है। एक्सपर्ट के मुताबिक, गोल्ड और सिल्वर ETF पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन तय रणनीति और अनुशासन के साथ ही निवेश करना बेहतर है।
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