
Gold Silver ETF: मार्केट रेगुलेटर SEBI अब ETF बाजार में बढ़ती अस्थिरता को काबू में करने की तैयारी कर रहा है। 13 फरवरी 2026 को जारी एक कंसल्टेशन पेपर में रेगुलेटर ने कहा कि वह एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF के बेस प्राइस और प्राइस बैंड की समीक्षा करेगा। इस प्रस्ताव पर जनता से सुझाव भी मांगे गए हैं। माना जा रहा है कि इससे ETF सेगमेंट में बड़े बदलाव हो सकते हैं।
गोल्ड और सिल्वर ETF के मौजूदा नियम
अभी रोलिंग सेटलमेंट में आने वाले ज्यादातर शेयरों पर दोनों तरफ 20 प्रतिशत तक का प्राइस बैंड लागू होता है। हालांकि जिन शेयरों में डेरिवेटिव उपलब्ध हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होता।
निगरानी के दायरे में आने वाले शेयरों पर सख्त प्राइस बैंड लगाए जाते हैं। इसके अलावा 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत के मार्केट-वाइड सर्किट ब्रेकर भी हैं। ये BSE Sensex या NSE Nifty 50 में से जो पहले तय सीमा तोड़े, उसके आधार पर लागू होते हैं।
गोल्ड और सिल्वर ETF में क्यों बढ़ी चिंता
SEBI ने कहा कि जनवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में सोना और चांदी की घरेलू और वैश्विक कीमतों में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिला। इस वजह से गोल्ड और सिल्वर ETF में भी अस्थिरता बढ़ गई। इन ETF पर लागू मौजूदा प्राइस बैंड T-2 दिन के NAV पर आधारित था। लेकिन तेज उतार चढ़ाव के दौर में यह व्यवस्था बाजार कीमत को अंडरलाइंग एसेट के साथ तालमेल में रखने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई।
इस स्थिति से निपटने के लिए एक्सचेंजों ने अंतरिम कदम उठाया। गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए T-1 दिन के क्लोजिंग NAV या क्लोजिंग प्राइस को बेस प्राइस बनाया गया। यह बदलाव संभव हो सका, क्योंकि T-1 और T दिन के बीच अवकाश था।
इक्विटी और डेट ETF के लिए नया प्रस्ताव
SEBI ने प्रस्ताव दिया है कि इक्विटी और डेट ETF के लिए शुरुआती प्राइस बैंड प्लस या माइनस 10 प्रतिशत रखा जाए। जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाकर प्लस या माइनस 20 प्रतिशत तक किया जा सके। इसमें 15 मिनट का कूलिंग ऑफ पीरियड होगा और दिन में अधिकतम दो बार बैंड को फ्लेक्स करने की अनुमति होगी।
गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए अलग व्यवस्था
गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए शुरुआती प्राइस बैंड प्लस या माइनस 6 प्रतिशत रखने का प्रस्ताव है। जरूरत पड़ने पर इसे भी बढ़ाकर प्लस या माइनस 20 प्रतिशत तक किया जा सकेगा। इसमें भी 15 मिनट का कूलिंग ऑफ पीरियड शामिल होगा।
निवेशकों पर क्या होगा असर
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो निवेशकों के लिए ETF में अचानक आने वाली तेज कीमतों की उछाल या गिरावट पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है। नया प्राइस बैंड और 15 मिनट का कूलिंग ऑफ पीरियड बाजार को शांत होने का समय देगा, जिससे घबराहट में की जाने वाली ट्रेडिंग कम हो सकती है।
खासकर गोल्ड और सिल्वर ETF में NAV और बाजार कीमत के बीच अंतर घटने की उम्मीद है। हालांकि, बहुत तेज मूवमेंट के दौरान ट्रेडिंग अस्थायी रूप से रुकने से शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को दिक्कत भी हो सकती है।
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