
Gold-Silver Crash: गोल्ड और सिल्वर आज 30 जनवरी को बजट से पहले अचानक क्रैश हो गए। सिल्वर ETF में तो 20 से 23 फीसदी तक की भारी गिरावट आई। गोल्ड ETF भी बुरी तरह टूट गए। इस गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। सवाल बड़ा है कि क्या ये गिरावट केवल मुनाफावसूली है? या फिर सोने और चांदी की कीमतों में जारी ऐतिहासिक तेजी का अब अंत आ गया है? सबसे अहम सवाल क्या यह गिरावट निवेशकों के लिए खरीदने का मौका है या इस समय इनसे दूरी बनाकर रहना बेहतर है?
कितना बड़ा था क्रैश?
गोल्ड और सिल्वर से जुड़े ETF में आज शुक्रवार को भारी गिरावट आई। इसे हाल के कुछ सालों की सबसे तेज गिरावटों में से एक माना जा रही है। खासतौर पर सिल्वर ETF निवेशकों को एक ही दिन में बड़ा झटका लगा। SBI Silver ETF करीब 22 फीसदी तक टूट गया। वहीं Zerodha Silver ETF, Nippon India Silver ETF और Kotak Silver ETF में 20 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। ICICI Prudential Silver ETF तो लगभग 23 फीसदी नीचे आ गया।
गोल्ड ETFs भी इस गिरावट से बचे नहीं रहे। Nippon India Gold ETF करीब 11 फीसदी टूटा, जबकि ICICI Prudential Gold ETF में लगभग 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।
गिरावट से पहले कैसी थी ऐतिहासिक तेजी?
लेकिन इस गिरावट को सही मायने में समझने के लिए हमें यह देखना जरूरी है कि इससे पहले बाजार में कैसी जबरदस्त तेजी आई थी। जनवरी महीने में चांदी ने करीब 42 फीसदी की छलांग लगाई थी, जो किसी एक महीने में इसमें आई अब तक की सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है। वहीं सोने का भाव डॉलर के टर्म्स में 15 फीसदी से अधिक बढ़ा है, जो 1999 के बाद की सबसे बड़ी मंथली तेजी थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव ने 5,594 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को छू लिया था। वहीं चांदी 121 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई। इतनी तेज रफ्तार से कीमतों का बढ़ना अपने आप में एक संकेत था कि बाजार काफी हद तक ओवरबॉट जोन में पहुंच चुका है।
गिरावट की वजह क्या रही?
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिका से आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि वह जल्द ही फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा करेंगे। बाजार में यह चर्चा तेज हो गई कि फेडरल रिजर्व बैंक का जो भी अगला अध्यक्ष होगा, उसकी रुख अभी के समय से ज्यादा सख्त यानी हॉकिश हो सकता है।
इसका सीधा मतलब यह निकाला गया कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं और मॉनिटरी पॉलिसी के नरम होने की उम्मीदों को झटका लग सकता है। इस खबर के बाद अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखने को मिली। डॉलर इंडेक्स करीब 0.4 फीसदी चढ़कर 96.60 के स्तर पर पहुंच गया।
मजबूत डॉलर का असर सीधे तौर पर सोने और चांदी पर पड़ता है, क्योंकि ये डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटी हैं। डॉलर मजबूत होने पर ये दूसरी करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिससे बिकवाली बढ़ती है। इसके साथ ही, जब बाजार पहले से ही ओवरबॉट हो और ऐसी खबर आए, तो मुनाफावसूली और तेज हो जाती है। यही वजह रही कि निवेशकों ने सोने और चांदी में ऊपरी स्तरों पर तेजी से प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी।
क्या यह गिरावट सोने और चांदी की कीमतों में जारी ऐतिहासिक तेजी का अंत है?
ज्यादातर कमोडिटी एक्सपर्ट्स और एनालिस्ट्स इस सवाल पर सहमत नहीं हैं कि तेजी खत्म हो चुकी है। उनका मानना है कि आज की गिरावट को एक नॉर्मल करेक्शन की तौर पर देखा जाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड के भाव में लगातार छह महीनों से तेजी जारी है। वहीं सिल्वर का भाव नौ महीने से लगातार ऊपर जा रहा था। इतने लंबे समय की तेजी के बाद थोड़ा ठहराव या गिरावट आना बाजार की सेहत के लिए भी जरूरी माना जाता है।
इसके अलावा, इन दोनों धातुओं के लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल अब भी मजबूत बने हुए हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, AI और डेटा सेंटर्स में सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड लगातार बढ़ रही है। वहीं दुनिया भर के सेंट्रल बैंक सोने की खरीद जारी रखे हुए हैं।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स की राय साफ है कि यह समय न तो घबराकर बेचने का है और न ही एकमुश्त खरीदारी करने का। इतने तेज उतार-चढ़ाव वाले बाजार में सही रणनीति बेहद जरूरी है। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की एसोसिएट डायरेक्टर तन्वी कंचन का कहना है कि अगर निवेश करना है तो चरणबद्ध तरीके से करना ज्यादा समझदारी होगी। एक ही बार में पूरा पैसा लगाने की बजाय SIP या कई चरणों में खरीदारी से जोखिम कम किया जा सकता है।
कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए यह भी सलाह दी जा रही है कि गोल्ड और सिल्वर मिलाकर कुल पोर्टफोलियो का 5 से 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सा न रखें। खासतौर पर सिल्वर ज्यादा वोलाटाइल हो चुकी है, जबकि गोल्ड फिलहाल तुलनात्मक रूप से ज्यादा स्थिर दिखाई देता है। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए यह समय बेहद जोखिम भरा है, क्योंकि थोड़ी सी खबर पर कीमतों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।
तो कुल मिलाकर तस्वीर साफ है। गोल्ड और सिल्वर में आई यह गिरावट डरने की वजह नहीं, बल्कि समझदारी से फैसले लेने की घड़ी है। लॉन्ग टर्म में इनकी कहानी अब भी मजबूत है, लेकिन जल्दबाजी भारी नुकसान करा सकती है।
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