
डिजिलॉजिक सिस्टम्स की 28 जनवरी को BSE SME पर लिस्टिंग निराशाजनक रही। शेयर 20 प्रतिशत घाटे में 83.20 रुपये पर लिस्ट हुआ। जल्द ही इसमें और 5 प्रतिशत की गिरावट आई और 79.05 रुपये पर लोअर सर्किट लग गया। कंपनी का 81 करोड़ रुपये का IPO 20 जनवरी को खुला था और 22 जनवरी को बंद हुआ। IPO प्राइस 104 रुपये प्रति शेयर था।
Digilogic Systems Ltd. डिफेंस और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग सेक्टर के लिए ऑटोमेटेड टेस्ट इक्विपमेंट (ATE) सिस्टम, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिमुलेटर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और एंबेडेड सिग्नल प्रोसेसिंग सॉल्यूशंस के डिजाइन, डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई और सपोर्ट का काम करती है।
IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल
डिजिलॉजिक सिस्टम्स के पब्लिक इश्यू में 69.66 करोड़ रुपये के 67 लाख नए शेयर जारी हुए। साथ ही 11.33 करोड़ रुपये के 11 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल रहा। नए शेयरों को जारी कर हासिल हुए पैसों का इस्तेमाल एक नई फैसिलिटी लगाने के लिए, कर्ज को पूरी तरह से या कुछ हद तक चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इसके IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.60 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 0.42 गुना और इंडीविजुअल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.08 गुना भरा था। कंपनी ने IPO से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 23.08 करोड़ रुपये जुटाए थे।
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