Demat Account in India: कम हो रहा स्टॉक मार्केट का क्रेज! 6 साल में सबसे सुस्त रफ्तार से बढे़ डीमैट खाते – demat account additions slow to six-year low in 2025 despite all-time high base



Demat Account in India: पिछले साल 2025 में देश में डीमैट खातों की ग्रोथ तेजी से नीचे गिरी। यह स्थिति तो तब है, जब इन खातों की संख्या रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई। इसका खुलासा CDSL (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड) और NSDL (नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) के आंकड़ों से हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2025 के आखिरी में डीमैट खातों की कुल संख्या सालाना आधार पर 18.53 करोड़ से बढ़कर 21.59 करोड़ पर पहुंच गई। हालांकि इसकी रफ्तार सुस्त पड़ी और 16.5% की स्पीड से बढ़ी जोकि छह साल में सबसे कम है। अबसॉलूट टर्म में बात करें तो पिछले साल 2025 में 3.06 करोड़ डीमैट खाते बढ़े थे जबकि साल 2024 में यह आंकड़ा 4.60 करोड़ था।

कुल डीमैट खातों में NSDL से अधिक CDSL की हिस्सेदारी

पिछले साल जिनते डीमैट खाते बढ़े, उनमें सबसे अधिक हिस्सेदारी सीडीएसएल की रही। सीडीएसएल के पास डीमैट खातों की संख्या पिछले साल 2.62 करोड़ यानी 17.9% बढ़कर 17.28 करोड़ पर पहुंच गई। वहीं दिसबंर 2025 के आखिरी तक एनएसडीएल के पास डीमैट खातों की संख्या 44 लाख यानी 11.4% उछलकर 4.32 करोड़ पर पहुंच गई।

पिछले कुछ वर्षों का ऐसा रहा है हाल

सीडीएसएल और एनएसडीएल पर डीमैट खातों की संख्या में पिछले साल तेज गिरावट आई। वर्ष 2020 में डीमैट खातों की कुल संख्या वर्ष 2019 में 3.94 करोड़ से 26.40% बढ़कर 4.98 करोड़, फिर 61.85% की रफ्तार से उछलकर वर्ष 2021 में साल 2021 के आखिरी में यह 8.06 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि इसके बाद रफ्तार थोड़ी सुस्त पड़ी वर्ष 2022 में यह 34.3%, वर्ष 2023 में 28.7% और फिर वर्ष 2024 में 33% की रफ्तार से बढ़ा। इसके बाद वर्ष 2025 में यह और सुस्त पड़ा।

अब सीडीएसएल और एनएसडीएल की अलग-अलग बात करें तो सीडीएसएल पर डीमैट खातों की संख्या वर्ष 2019 के आखिरी में 1.97 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2020 के आखिरी में 2.89 करोड़ और वर्ष 2021 के आखिरी में 5.56 करोड़ पर पहुंच गई। वर्ष 2022 में यह बढ़कर 7.79 करोड़, वर्ष 2023 में 10.47 करोड़ और वर्ष 2025 में 17.28 करोड़ पर पहुंच गया। अब एनएसडीएल पर बात करें तो इसके डीमैट खातों की संख्या दिसंबर 2019 के आखिरी में 1.96 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2020 के आखिरी में 2.09 करोड़, वर्ष 2021 में 2.50 करोड़, वर्ष 2022 में 3.04 करोड़, वर्ष 2023 में 3.46 करोड़, वर्ष 2024 में 3.88 करोड़ और वर्ष 2025 के आखिरी में 4.32 करोड़ पर पहुंच गई।



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