
Copper ETF: दुनिया भर के बाजारों में तांबे (Copper) की पहचान तेजी से बदल रही है। पहले इसे कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग साइकल से जुड़ा एक साइक्लिकल मेटल माना जाता था। लेकिन, अब यह डिजिटलाइजेशन और एनर्जी ट्रांजिशन जैसे 21वीं सदी के दो सबसे बड़े बदलावों के केंद्र में आ चुका है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर्स और पावर ग्रिड्स में तांबे की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि तांबे की कीमतें कई बार $13,000 प्रति टन के पार जा चुकी हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि 2026 तक ग्लोबल मार्केट में तांबे की सप्लाई में स्ट्रक्चरल कमी देखने को मिल सकती है। अब चर्चा ओवरसप्लाई के डर से निकलकर लॉन्ग टर्म कमी की ओर बढ़ चुकी है।
तांबे में क्यों बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी?
तांबे की बदलती भूमिका ने निवेशकों का ध्यान तेजी से खींचा है। Wealth Enrich के फाउंडर और वेल्थ एक्सपर्ट अद्वैत अरोड़ा ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा कि अब तांबे को पारंपरिक स्ट्रैटेजिक एसेट्स की तरह देखा जाना चाहिए।
उनके मुताबिक, अगर कोई निवेशक तांबे में दिलचस्पी रखता है, तो उसे EVs, रिन्यूएबल एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘नए दौर के गोल्ड’ के रूप में सोचना चाहिए। यह बयान साफ करता है कि आने वाले समय में तांबा भविष्य की इंडस्ट्रीज का अहम हिस्सा बनने जा रहा है।
तांबे में निवेश के लिए क्या विकल्प हैं?
जो निवेशक तांबे की इस थीम में हिस्सा लेना चाहते हैं, उनके लिए अद्वैत अरोड़ा ने तीन प्रमुख एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) बताए हैं। ये ETF अलग-अलग तरीके से कॉपर में एक्सपोजर देते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखने वाली बात है कि भारत में अभी कॉपर के लिए कोई ETF नहीं है। लेकिन, इनमें भारत से भी निवेश किया जा सकता है।
Global X Copper Miners ETF (COPX) : COPX इस कैटेगरी का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा स्थापित ETF माना जाता है। इसके पास करीब $5.83 अरब की नेट एसेट्स हैं और इसका एक्सपेंस रेशियो 0.65 प्रतिशत है। यह ETF दुनियाभर की लगभग 40 कॉपर माइनिंग कंपनियों में निवेश करता है।
United States Copper Index Fund (CPER) : जो निवेशक माइनिंग कंपनियों की बजाय सीधे तांबे की कीमतों से जुड़ा एक्सपोजर चाहते हैं, उनके लिए CPER एक अलग विकल्प है। यह ETF कॉपर फ्यूचर्स को ट्रैक करता है, यानी इसकी परफॉर्मेंस सीधे कमोडिटी प्राइस मूवमेंट से जुड़ी होती है। इस फंड की नेट एसेट्स करीब $456 मिलियन हैं। पिछले एक साल में इसने लगभग 38 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
iShares Copper and Metals Mining ETF (ICOP) : ICOP थोड़ा व्यापक अप्रोच अपनाता है। यह सिर्फ तांबे तक सीमित नहीं है, बल्कि STOXX Global Copper and Metals Mining Index को ट्रैक करता है। 2023 में लॉन्च हुए इस ETF ने कम समय में अच्छी लोकप्रियता हासिल की है। साल 2025 में इस ETF ने करीब 78 प्रतिशत का रिटर्न दिया।
भारतीय निवेशक इन ETF में कैसे करें निवेश?
भारतीय निवेशक Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत ओवरसीज इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन ग्लोबल ETF में निवेश कर सकते हैं। हालांकि, निवेश से पहले कुछ अहम बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
इसमें करेंसी रिस्क, ETF का एक्सपेंस रेशियो और LRS की तय लिमिट शामिल हैं। यह भी समझना जरूरी है कि ज्यादातर ऐसे ETF सीधे स्पॉट कॉपर की बजाय माइनिंग कंपनियों में निवेश के जरिए तांबे का एक्सपोजर देते हैं।
तांबा: बड़ा मौका, लेकिन जोखिम के साथ
लॉन्ग टर्म में तांबे की कहानी मजबूत दिखती है, लेकिन यह अभी भी एक साइक्लिकल कमोडिटी है। यह गोल्ड की तरह सेफ हेवन नहीं है। आर्थिक सुस्ती के दौरान इसकी मांग तेजी से कमजोर पड़ सकती है। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल घटनाएं और बड़े तांबा उत्पादक देशों की पॉलिसी में बदलाव भी कीमतों पर सीधा असर डालते हैं।
दूसरी तरफ, सप्लाई साइड की चुनौतियां बनी हुई हैं। नई खदानों को शुरू होने में अक्सर 10 साल या उससे ज्यादा समय लग जाता है। बढ़ती स्ट्रक्चरल डिमांड और धीमी सप्लाई का यही मेल तांबे को एक आकर्षक लेकिन वोलैटाइल निवेश विकल्प बनाता है।
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