
Budget 2026 Analysis : बुओयंट कैपिटल के को-फाउंडर जिगर मिस्त्री ने कहा कि यूनियन बजट का मुख्य संदेश फिस्कल डिसिप्लिन है, भले ही यह शॉर्ट-टर्म मार्केट सेंटिमेंट के खिलाफ हो। उनके अनुसार, सरकार का 4.4% (FY26 में) और 4.3% (FY27 में) के फिस्कल डेफिसिट टारगेट को पूरा करने पर फोकस यह दिखाता है कि ग्रोथ-ओरिएंटेड रियायतों के बजाय फिस्कल समझदारी को प्राथमिकता दी गई है।
जिगर मिस्त्री का मानना है कि भारत में इंटरेस्ट रेट में कटौती शायद जल्दी न हो। उन्होंने कहा कि बजट का हिसाब-किताब मुश्किल लग रहा है और सरकार द्वारा बताए गए टाइट आंकड़ों को देखते हुए, कोविड काल के बाद पहली बार इसे हासिल करना मुश्किल साबित हो सकता है। उन्होंने कैपिटल एलोकेशन स्ट्रैटेजी में बदलाव पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ने बायबैक को सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) के साथ कैसे बैलेंस किया है। इससे कैपिटल मैनेजमेंट के लिए सरकार के ज़्यादा सोचे-समझे और कुशल तरीके का संकेत मिलता है।
इक्विटी मार्केट के नज़रिए बजट पर बात करते हुए मिस्त्री ने आगे कहा कि बजट का बाजार पर बहुत ज्यादा असर नहीं होगा। उन्होंने कह यह “उतना अहम बजट नहीं है जितना मार्केट इसे बता रहा है, चाहे वह पॉजिटिव हो या नेगेटिव। यह बजट सरकार के मौजूदा पॉलिसी ट्रैक के मुताबिक ही है, न कि उससे बिल्कुल अलग”।
सेक्टोरल नजरिए से बात करते हुए मिस्त्री ने कहा कि इस बजट से डेटा सेंटर और कैपिटल खर्च से होने वाली ग्रोथ जैसी सरकार की मौजूदा प्राथमिकताओं को मज़बूती मिली है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि घोषित आवंटन इतने बड़े होने की संभावना नहीं है कि वे इस सेक्टर के मोमेटम में कोई बड़ा बदलाव ला सके। हालांकि इससे इस सेक्टर की दिशा जरूर साफ हो सकती है।
मेटल्स पर कमेंट करते हुए, मिस्त्री ने कहा कि खास तौर पर कीमती धातुओं में कीमतों में तेज़ी पर भरोसा कम होने की वजह से यह सेक्टर दबाव में है। उन्होंने इस तेज़ गिरावट का कारण ग्लोबल फ्यूचर्स और ऑप्शंस मार्केट के आपस में जुड़े होने को बताया, और कहा कि मेटल्स में उनके पोर्टफोलियो का एक्सपोज़र लिमिटेड है।
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