
Budget 2026: देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स (Tata Motors) ने आगामी बजट में एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को बढ़ावा देने के लिए सरकार से इनसेंटिव्स की मांग की है। इसके साथ ही कंपनी ने सरकार से PM E-DRIVE योजना के तहत फ्लीट ऑपरेशंस में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रिक कारों को भी समर्थन देने पर विचार करने का आग्रह किया है। कंपनी का कहना है कि पैसेंजर व्हीकल (PV) बाजार में भले ही रिकवरी दिख रही हो, लेकिन किफायती EV सेगमेंट अब भी दबाव में है।
न्यूज एजेंसी PTI से बातचीत में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेष चंद्रा ने कहा कि सरकार के हालिया कदमों से ऑटो सेक्टर में मांग को सहारा मिला है, लेकिन एंट्री-लेवल EV की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
उन्होंने कहा, “मैं सरकार की सराहना करना चाहूंगा कि उसने PV इंडस्ट्री और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को फिर से गति देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। लेकिन बजट में दो बातों पर विचार किया जा सकता है। पहली, एंट्री-लेवल EV सेगमेंट पर काफी दबाव है और अगर सरकार कुछ स्तर पर इंसेंटिव देने पर विचार करे तो इससे राहत मिल सकती है।”
शैलेश चंद्रा ने बताया कि GST सुधारों के बाद पेट्रोल कारों की कीमतों में कमी आई है, जिससे एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कारों पर कॉम्पिटीशिन दबाव और बढ़ गया है। उन्होंने कहा, “सरकार ने पिछले साल कई बड़े कदम उठाए हैं। सबसे बड़ा कदम GST 2.0 रहा है। इसके अलावा रेपो रेट में कटौती, टैक्स रेजीम में बदलाव जैसे फैसले भी लिए गए हैं। कुल मिलाकर सरकार ने पूरे PV सेक्टर में मांग बढ़ाने के लिए अहम हस्तक्षेप किए हैं।”
फ्लीट EV को दोबारा समर्थन देने की मांग
फ्लीट सेगमेंट के महत्व को रेखांकित करते हुए शैलेश चंद्रा ने कहा कि भले ही फ्लीट में इस्तेमाल होने वाले EV कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री का सिर्फ 7% हों, लेकिन ये कुल पैसेंजर किलोमीटर ट्रैवल का करीब 33–35% हिस्सा कवर करते हैं। उन्होंने बताया कि पहले FAME-II के तहत फ्लीट EVs को समर्थन मिलता था, लेकिन मौजूदा PM E-DRIVE योजना में इन्हें शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, “एक फ्लीट कार एक आम पैसेंजर कार के मुकाबले करीब पांच गुना ज्यादा चलती है। ऐसे में अगर इस सेगमेंट को सपोर्ट दिया जाए तो इसका पर्यावरणीय स्तर पर मल्टीप्लायर असर होता है। चाहे वह पार्टिकुलेट मैटर में कमी हो, जीरो एमिशन हो या फिर तेल आयात में कटौती। यह वही सेगमेंट है जिसे FAME स्कीम में पहचाना गया था और सरकार इसे PM E-DRIVE में शामिल करने पर विचार कर सकती है।”
कीमतों पर भी दिख सकता है असर
कीमतों को लेकर पूछे गए सवाल पर शैलेश चंद्रा ने कहा कि बढ़ती कमोडिटी कीमतों और विदेशी मुद्रा (Forex) से जुड़े दबावों ने कंपनी के मार्जिन पर असर डाला है। उनके मुताबिक, इन कारकों का राजस्व पर करीब 2% तक का प्रभाव पड़ा है, जिसका बड़ा हिस्सा अभी ग्राहकों तक ट्रांसफर नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, “हमने कुछ स्तर तक लागत में कटौती करने में सफलता पाई है, लेकिन आने वाले दिनों में हम यह तय करेंगे कि कीमतों में कब और कितनी बढ़ोतरी करनी है। इसका ऐलान जल्द किया जाएगा।”
बता दें कि हाल के हफ्तों में कई अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियां भी इनपुट कॉस्ट और करेंसी से जुड़े दबावों का हवाला देते हुए वाहनों की कीमतें बढ़ाने की घोषणा कर चुकी हैं।
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