
अदाणी समूह ने करीब तीन साल पहले होलसिम एजी (इंडिया) से अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी का अधिग्रहण किया था। इसके बाद समूह ने कुछ छोटी सीमेंट कंपनियों का अधिग्रहण किया। इससे इनवेस्टर्स समूह के सीमेंट बिजनेस के एक कॉमन प्लेटफॉर्म के तहत आने की उम्मीद कर रहे थे। सीमेंट जैसे कमोडिटी बिजनेसेज में कंसॉलिडेशन के कई फायदे हैं। इससे कॉस्ट में कमी आती है, जिससे मुनाफा कमाने की क्षमता बढ़ती है।
समूह की कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता करीब 107 MTPA
Adani Group ने अब अपनी सभी सीमेंट कंपनियों को Ambuja Cements के तहत लाने का ऐलान किया है। इससे समूह की 24 इंटिग्रेटेड यूनिट्स, 22 ग्राइंडिंग यूनिट्स और 116 से ज्यादा रेडी-मिक्स कंक्रीट प्लांट एक अंब्रेला के तहत आ जाएंगे। अभी समूह की कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता करीब 107 मिलियन टन पर एनम (MTPA) है। विलय की पक्रिया पूरी होने के बाद अंबुजा सीमेंट्स में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 67.5 फीसदी से घटकर 60.9 फीसदी पर आ सकती है।
विलय के बाद कॉस्ट में प्रति टन 100 रुपये की सेविंग्स
अंबुजा सीमेंट्स ने बताया है कि सभी सीमेंट कंपनियों के एक प्लेटफॉर्म के तहत आ जाने से ब्रांडिंग और सेल्स प्रमोशन पर खर्च के मामले में सिनर्जी बढ़ेगी। प्रोडक्शन नेटवर्क का अधिकतम इस्तेमाल हो सकेगा। सबसे अहम यह कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, क्योंकि मास्टर सप्लाई एग्रीमेंट्स और रिलेटेड पार्टी ट्राजेक्शंस की जरूरत नहीं रह जाएगी। मैनेजमेंट का मानना है कि कॉस्ट में प्रति टन करीब 100 रुपये की सेविंग होगी।
अंबुजा की प्रॉफिट कमाने की क्षमता दूसरी कंपनियों से बेहतर
पहले हुई एक एनालिस्ट मीट में कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा था कि वह टोटल मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट प्रति टन मौजूदा 4,200 रुपये से घटाकर इस वित्त वर्ष के अंत तक 4000 रुपये और FY28 तक 3,650 रुपये लाना चाहता है। इंडस्ट्री के औसत के मुकाबले अंबुजा सीमेंट्स की प्रॉफिट कमाने की क्षमता बेहतर रही है। सितंबर तिमाही में अंबुजा का EBITDA 1,061 रुपये प्रति टन था। यह एक साल पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है। कंपनी के साथ दूसरी अच्छी बात यह है कि इसकी मौजूदगी करीब पूरे भारत में है। FY26 के अंत तक नॉर्थ और सेंट्रल इंडिया जैसे हाई डिमांड वाले इलाकों में इसकी मौजूदगी और बढ़ने जा रही है।
अल्ट्राटेक को कड़ी टक्कर दे सकेगी अंबुजा सीमेंट्स
इस विलय से अंबुजा और एसीसी ब्रांड्स का वजूद बना रहेगा। यह विलय ऐसे वक्त हो रहा है, जब अदाणी समूह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ बढ़ रहा है। जेफरीज इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी ‘इंटिग्रेटेड इंटेलिजेंस’ फ्रेमवर्क अपना रही है। इसके तहत माइनिंग से लेकर लॉजिस्टिक्स डिस्पैच तक में डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। अदाणी समूह ने अपनी सीमेंट कंपनियों के एक प्लेटफॉर्म के तहत लाने का फैसला सही समय पर लिया है। दरअसल, समूह देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट को कड़ी टक्कर देना चाहता है। अल्ट्राटेक आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी है। इसने क्षमता विस्तार पर फोकस बढ़ाया है।
EBITDA मार्जिन 200-300 प्वाइंट्स बढ़ सकता है
सीमेंट बिजनेस में बड़े साइज और ऑपरेशन का फायदा प्राइसिंग पावर के मामले में मिलता है। साथ ही रियलाइजेशन और प्रॉफिटेबिलिटी भी बढ़ती है। एनालिस्ट्स का मानना है कि FY27 तक अंबुजा सीमेंट्स का EBITDA मार्जिन 200-300 प्वाइंट्स तक बढ़ सकता है। हालांकि, सीमेंट जैसे साइक्लिकल बिजनेस में सरप्लस कपैसिटी का नुकसान भी होता है। डिमांड घटने पर कैश फ्लो और मुनाफा कमाने की क्षमता पर असर पड़ता है। विलय की खबर के बाद इनवेस्टर्स के अंबुजा सीमेंट्स के शेयरों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाने की यह वजह हो सकती है। बीते एक हफ्ते में यह शेयर सिर्फ 1.56 फीसदी चढ़ा है।