
दिग्गज अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी अल्फाबेट बॉन्ड्स के जरिए काफी पैसे जुटा रही है। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए इस पैसे का इस्तेमाल करेगी। कंपनी कई करेंसी में बॉन्ड्स इश्यू कर रही है, जिनमें ब्रिटिश पौंड में 100 साल के बॉन्ड्स शामिल हैं। आम तौर पर कंपनियां 100 साल के बॉन्ड्स इश्यू नहीं करती हैं।
इससे पहले अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी IBM ने 1996 में 100 साल के बॉन्ड्स इश्यू किए थे। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, इस इश्यू से जुड़े बैंकर्स का कहना है कि पौंड में बॉन्ड्स इश्यू के जरिए अल्फाबेट लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के एक नए पूल से पैसे जुटा सकेगी। वह इस इश्यू के जरिए अमेरिकी मार्केट के मुकाबले कम इंटरेस्ट रेट पर पैसा जुटा सकेगी।
ब्लूमबर्ग ने खबर दी थी कि अल्फाबेट ने अमेरिका में अपने सबसे बड़े बॉन्ड इश्यू के जरिए 20 अरब डॉलर जुटाए थे। पहले कंपनी ने इस इश्यू से 15 अरब डॉलर जुटाने का प्लान बनाया था। लेकिन, इनवेस्टर्स की तरफ से 100 अरब डॉलर से ज्यादा के ऑर्डर मिलने पर उसने इश्यू साइज थोड़ा बढ़ा दिया था। अल्फाबेट स्विस फ्रैंक में भी बॉन्ड इश्यू पेश करने वाली है। कंपनी सिर्फ डॉलर में बॉन्ड पेश करने की जगह तीन अलग-अलग करेंसी में बॉन्ड्स जारी कर पैसे जुटाने जा रही है।
अल्फाबेट अमेरिकी डॉलर बॉन्ड्स इश्यू की 7 किस्तें पेश करेगी। इसमें 40 साल मैच्योरिटी वाले बॉन्ड्स सबसे लंबी अवधि के हैं। ये 2066 में मैच्योर होंगे। इसका इंटरेस्ट रेट अमेरिकी सरकार के बॉन्ड्स से 0.95 फीसदी ज्यादा है। 3 साल वाले बॉन्ड्स का इंटरेस्ट रेट अमेरिकी सरकार के बॉन्ड्स के इंटरेस्ट रेट से सिर्फ 0.27 फीसदी ज्यादा है। इससे अल्फाबेट के बॉन्ड्स में निवेशकों की दिलचस्पी का पता चलता है।
अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी ने कुछ दिन पहले बताया था कि वह इस साल कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 185 अरब डॉलर खर्च कर सकती है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब दोगुना है। अल्फाबेट अपने जेमनाई जैसे अपने एआई मॉडल्स, क्लाउड सर्विसेज और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी निवेश कर रही है। 2025 में कंपनी पर लंबी अवधि का कर्ज बढ़कर 46.5 अरब डॉलर हो गया था। हालांकि, कंपनी के पास 126.8 अरब डॉलर का कैश है। इससे कंपनी की आर्थिक ताकत का पता चलता है।
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि हायपरस्कैलर्स इस साल कर्ज से 400 अरब डॉलर जुटा सकती हैं। यह पिछले साल जुटाए गए 165 अरब डॉलर के कर्ज से काफी ज्यादा है। हायपरस्कैलर्स का मतलब उन कंपनियों से है, जो बड़े पैमाने पर क्लाउ सर्विस ऑफर करती हैं। Amazon Web Service (AWS), Microsoft Azure और गूगल क्लाउड (जीसीपी) इसके उदाहरण हैं। इस साल दिग्गज अमेरिकी कंपनियां बॉन्ड्स से रिकॉर्ड 2.25 लाख करोड़ डॉलर जुटा सकती हैं।