Rupee Breaches 91-Mark: रुपए ने पहली बार पार किया 91 का लेवल, पिछले 5 सत्रों में 1% से ज्यादा टूटा, आखिर क्यों नहीं संभल रही गिरावट – rupee crosses 91 for the first time loses over 1percent in last 5 sessions why is it not recovering its decline



डॉलर के मुकाबले रुपए में रिकॉर्ड गिरावट देखने को मिल रही है। रुपए ने 91.08 का रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ है। एक डॉलर का भाव पहली बार 91 के पार निकला है। पिछले 5 सत्रों में रुपया 1% से ज्यादा फिसला है जबकि पिछले 5 सत्रों में यह 1.29 तक कमजोर हुआ । 2022 के बाद अब तक रुपए में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। 2025 में सभी एशियाई करेंसियों में मुकाबले ज्यादा गिरा है। इस साल यह करीब 6% गिरा है।

सुबह 11.45 बजे डॉलर के मुकाबले रुपया 91.14 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 36 पैसे कम था।

क्यों नहीं संभल रहा है रुपया?

भारत पर अमेरिका के लगाए गए ऊंचे टैरिफ ने रुपए पर दबाव बनाया है। भारत का बढ़ता करंट अकाउंट डेफिसिट, विदेशों में ऊंची दरों से कैपिटल आउटफ्लो और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण रुपया औंधे मुंह गिरा है। वहीं दूसरी तरफ RBI द्वारा करेंसी मार्केट में कम दखल देना भी इसमें दबाव का कारण बन रही है।

 लंबी अवधि में गिरता है रुपया !

50 सालों में औसतन 4-5% की सालाना गिरावट देखने को मिलती है। इस बार कमजोरी हाल के सालों से ज्यादा तेज है। 2024 में रुपया ओवरवैल्यूड माना जा रहा था। जबकि 2025 में यह थोड़ा अंडरवैल्यूड हो गया है। रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) के 100 से नीचे आने से संकेत मिलता है। 10 सालों में REER चौथी बार 100 के नीचे फिसला।

 बॉन्ड मार्केट में असर

सेंट्रल बैंक बॉन्ड की खरीदारी कर रहा है। बॉन्ड की कीमतें बढ़ती हैं, यील्ड घटती है। इससे FIIs की खरीद-बिक्री का सीधा असर पड़ता है। 10 सालों की यील्ड 6.48% पर पहुंची है। 4 महीनों बाद 1 हफ्ते में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। 2035 में बॉन्ड की मैच्योरिटी होनी है।

FIIs की भारी बिकवाली से बॉन्ड बाजार दबाव बना रहा । ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप रेट अचानक तेजी से बढ़ी। ऑफशोर बाजार में ब्याज चुकाने की वजह से तेजी आई। यील्ड 6.55% से 6.65% के दायरे में रहने की उम्मीद है। पिछले हफ्ते RBI ने 500 बिलियन के बॉन्ड खरीदे। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव कम नहीं हो रहा।

क्या कहते है एक्सपर्ट

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP के ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा, “US-इंडिया ट्रेड डील अभी भी काफी दूर लग रही है, कॉमर्स सेक्रेटरी ने कहा है कि पहले फेज़ पर साल के आखिर से पहले साइन हो जाएगा और खबर है कि हम डील साइन होने के सबसे करीब हैं। अनिश्चितता ने USD/INR पेयर की रिकवरी पर असर डाला है। हर दिन डॉलर की खरीदारी हो रही है।”



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