ज्यादातर रिटेल इन्वेस्टर्स को क्यों होता है नुकसान, Zerodha के नितिन कामत ने बताई वजह – why most retail investors lose money in stock market zerodha ceo nithin kamath explains how frequent trading hurts returns



शेयर बाजार में बहुत से रिटेल इन्वेस्टर्स हैं, जिन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। Zerodha के को-फाउंडर और CEO नितिन कामत का कहना है कि ज्यादातर रिटेल निवेशक जितनी ज्यादा बार ट्रेडिंग करते हैं, उतना ही उनके लिए मुनाफा कमाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर लिखा कि बार-बार ट्रेड करने से रिटर्न बेहतर नहीं होता, बल्कि नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है।

Zerodha के आंकड़े क्या बताते हैं

नितिन कामत के मुताबिक, Zerodha की ब्रोकरेज इनकम, क्लाइंट्स के कुल फंड के मुकाबले, लिस्टेड ब्रोकरेज कंपनियों की तुलना में सिर्फ 20-25% है। इसका मतलब यह है कि Zerodha के ग्राहक अपनी पूंजी के अनुपात में करीब 75% कम ट्रेड करते हैं। कामत का मानना है कि कम ट्रेडिंग निवेशकों के लिए लंबे समय में बेहतर नतीजे देती है।

ज्यादा एक्टिविटी का मतलब बेहतर रिटर्न नहीं

नितिन कामत ने कहा कि कुछ गिने-चुने मामलों को छोड़ दें, तो ज्यादा ट्रेडिंग और कमजोर परफॉर्मेंस के बीच साफ संबंध दिखता है। उनके शब्दों में, ज्यादा एक्टिविटी अक्सर इस बात का संकेत होती है कि निवेशक अपना अकाउंट नुकसान की ओर ले जा रहा है। आम रिटेल निवेशकों के लिए लगातार ट्रेडिंग से मुनाफा बढ़ना बहुत मुश्किल है।

रेवेन्यू के लिए ट्रेडिंग को नहीं बढ़ाता Zerodha

कामत ने यह भी कहा कि किसी ब्रोकरेज के लिए लंबी अवधि में यह जरूरी नहीं कि वह ज्यादा ट्रेडिंग को बढ़ावा दे, भले ही इससे शॉर्ट टर्म में कमाई बढ़े। उन्होंने बताया कि Zerodha न तो ट्रेडिंग को उकसाने वाले पुश नोटिफिकेशन भेजता है और न ही ‘ट्रेंडिंग स्टॉक्स’ या ‘सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाले F&O कॉन्ट्रैक्ट्स’ जैसे फीचर्स दिखाता है।

ऐसे फीचर्स जो ट्रेडिंग कम करें

नितिन कामत के मुताबिक Zerodha ने समय के साथ ऐसे फीचर्स जोड़े हैं जिनका मकसद यूजर्स की ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे कम करना है। कंपनी का फोकस निवेशकों को गैरजरूरी ट्रेडिंग से बचाने पर है।

कर्मचारियों पर ब्रोकरेज का दबाव नहीं

कामत ने बताया कि Zerodha में कर्मचारियों को ब्रोकरेज रेवेन्यू के आधार पर कोई इंसेंटिव नहीं दिया जाता। यह पॉलिसी कंपनी की शुरुआत से लागू है। उन्होंने माना कि शॉर्ट टर्म रेवेन्यू बढ़ाने वाले तरीकों से दूर रहना आसान नहीं होता, लेकिन पूरी ब्रोकरेज इंडस्ट्री इस तरह के दबावों से जूझती है।



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