
केन्स टेक्नोलॉजीज 8 दिसंबर को गवर्नेंस और अकाउंटिंग में लैप्सेज को लेकर हरकत में आई। ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी रिपोर्ट में कंपनी के गवर्नेंस और अकाउंटिंग में कई तरह की गड़बड़ी को लेकर चिंता है। इसका असर कंपनी के शेयरों पर पड़ा। बीते एक हफ्ते में शेयर करीब 50 फीसदी क्रैश कर गया।
Kaynes Technology ने माना है कि उसकी सब्सिडियरी Iskraemeco से जुड़े एक रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन को FY24 के स्टैंडएलोन रिजल्ट्स में डिसक्लोज नहीं किया गया था। हालांकि, इसे कंसॉलिडेटेड रिजल्ट्स में डिसक्लोज किया गया था। ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल में एनालिस्ट प्रवीण सहाय ने कहा, “उन्होंने इसे अपनी गलती मानी है। ऑडिटर से भी इस मामले में चूक हुई। कंपनी ने कहा है कि वे डिसक्लोजर में इस गड़बड़ी को ठीक करेगी। कंपनी अपना ऑडिटर भी बदल सकती है।”
Elara Securities ने कहा है कि केन्स अपनी इनटर्नल रिपोर्टिंग को मजबूत बनाना चाहती है। वह ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने जा रही है, जो अपने आप कॉन्ट्रा-एंट्री चेक करेगा। कंपनी अपने मौजूदा ऑडिटर्स को बदल सकती है। वह प्रतिष्ठित फर्मों को ऑडिटर्स नियुक्त कर सकती है। 8 दिसंबर को कंपनी का शेयर 11.53 फीसदी गिरकर 3,851 रुपये पर बंद हुआ।
Kaynes Tech के मैनेजमेंट ने एनालिस्ट्स के साथ बातचीत में स्टैंडएलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में ‘रिपोर्टिंग लैप्सेज’ की बात मानी है। उसने ऑडिटर बदलने के भी संकेत दिए हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी के रुख से ऐसा लगा कि वह गलती ठीक करने को तैयार है। कोटक की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि केन्स के एक्विजिशन की अकाउंटिंग पारदर्शी नहीं थी। खासकर Iskraemeco और Sensonic के मामले में गुडविल और इंटैनजिबल एसेट्स के मामले में ऐसा देखने को मिला।
केन्स टेक्नोलॉजीज ने नवंबर 2022 में आईपीओ पेश किया था। कंपनी ने आईपीओ में इनवेस्टर्स को प्रति शेयर 587 रुपये के प्राइस पर शेयर एलॉट किए थे। शेयरों की लिस्टिंग 700 रुपये से ज्यादा कीमत पर हुई थी। तब से शेयर की कीमत करीब पांच गुनी हो गई है।