Indigo Crisis: इंडिगो मामले में बढ़ सकती है सरकार की सख्ती, बोर्ड के पुनर्गठन तक जा सकता है मामला – indigo crisis government may toughen stance on airline could move towards board restructuring



Indigo Crisis: इंडिगो एयरलाइन मामले में सरकार का रुख और सख्त हो सकता है। मनीकंट्रोल को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार इंडिगो की पैरेंट कंपनी, इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड के बोर्ड के पुनर्गठन की मांग कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि सरकार का दखल को सिर्फ अस्थायी राहत और मैनेजमेंट को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस तक ही नहीं रहने वाला है और यह मामला कंपनी के बोर्ड के पुनर्गठन तक जा सकता है।

सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पिछले एक सप्ताह में इंडिगो की 3,200 से अधिक उड़ानें रद्द होने से हजारों यात्री देशभर के एयरपोर्ट्स पर फंस गए। सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है और एयरलाइन की गवर्नेंस स्ट्रक्चर को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

सरकार क्यों कर रही है बोर्ड पुनर्गठन पर विचार?

इस मामले से वाकिफ उच्चस्तरीय सूत्रों ने बताया कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इंडिगो के बोर्ड में ऐसे लोग हों जिन्हें एविएशन सेक्टर का गहरा तकनीकी और ऑपरेशनल अनुभव हो। इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है, जिसके पास करीब 65 प्रतिशत मार्केट शेयर है। इसके चलते इंडिगो नेटवर्क पर देश के एविएशन इंडस्ट्री की काफी निर्भरता हो जाती है।

सूत्रों को कहना है कि इसके चलते इंडिगो के बोर्ड में ऐसे और लोगों को रखना सही रहेगा जो नेटवर्क डिजाइन, क्रू यूटिलाइजेशन, रोस्टरिंग, एयरक्राफ्ट ग्राउंड टाइम और डोमेन अथॉरिटी के साथ रेगुलेटरी एक्सपोजर पर सवाल उठा सकें, ताकि ऑपरेशनल रिस्क को बोर्ड-लेवल पर देखा जा सके, न कि वह मैनेजरियल स्तर पर ही दबा रहे।

इस मामले में इंडिगो और सिविल एविशन मिनस्ट्री दोनों को ईमेल से भेजे गए सवालों को खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया था।

इंडिगो का मौजूदा बोर्ड

इंडिगो का बोर्ड फिलहाल विक्रम सिंह मेहता की अध्यक्षता में काम करता है, जो बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं। वे इससे पहले भारत में शेल इंडिया के चेयरमैन रह चुके हैं। शेल ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन थे। वह L&T, महिंद्रा एंड महिंद्रा और कोलगेट पामोलिव जैसी कई कंपनियों के बोर्ड के साथ इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर जुड़े रहे हैं।

बोर्ड में कंपनी के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया भी शामिल हैं। इनके अलावा बोर्ड के दूसरे सदस्यों में रिटायर्ड एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ, नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत, सीनियर एडवोकेट पल्लवी श्रॉफ, सेबी के पूर्व चेयरपर्सन एम दामोदरन और इंटरग्लोब ग्रुप के अनुभवी सदस्य अनिल पराशर शामिल हैं। पराशर इंटरग्लोब ग्रुप की कई दूसरी कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं।

इंडिगो के बोर्ड के एविएशन सेक्टर का बैकग्राउंड रखने वाले सदस्यों में माइकल व्हिटेकर शामिल हैं, जो US फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के पूर्व एडमिनिस्ट्रेटर हैं। FAA एजेंसी यूनाइटेड स्टेट्स में एयर सेफ्टी, एफिशिएंसी और एयर ट्रैफिक सिस्टम के ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार है। इनके ग्रेग सारेत्स्क भी इंडिगो के बोर्ड में शामिल हैं, जो कैनेडियन एयरलाइन वेस्टजेट के पूर्व CEO और अलास्का एयरलाइंस के COO हैं।

कहां कमी दिख रही है?

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और सरकारी अधिकारियों के अनुसार, बोर्ड में एविएशन एक्सपर्ट्स की संख्या कम होना अब एक बड़ी कमी के रूप में देखा जा रहा है। पहले कंपनी के को-फाउंडर और एयरलाइन इंडस्ट्री के पुराने खिलाड़ी राकेश गंगवाल बोर्ड में बड़ी भूमिका निभाते थे, लेकिन अब वैसी तकनीकी और ऑपरेशनल समझ बोर्ड स्तर पर पर्याप्त रूप से मौजूद नहीं दिखाई देती। सूत्रों का कहना है कि मौजूदा संकट ने इस कमजोरी को उजागर कर दिया है, और इसी कारण सरकार बोर्ड स्ट्रक्चर पर दोबारा गंभीरता से विचार कर रही है।

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