मार्केट के अगले उछाल में लार्ज कैप्स करेंगे लीड, गिरे हुए स्मॉल कैप्स के पीछे भागने के लालच से बचें – जिमीत मोदी – in the next market rally large-cap stocks will take the lead avoid the temptation to chase after beaten down small cap stocks



हाल ही में निफ्टी 26,000 और सेंसेक्स को 86,000 के पार जाता दिखा है। दोनों ने नए ऑल-टाइम हाई बनाए हैं। मार्केट की हेडलाइंस जश्न वाली हैं। लेकिन अगर आप अपना पोर्टफोलियो चेक करेंगे,तो कहानी शायद बहुत अलग लगेगी। पोर्ट फोलियो में कोई खुशी नहीं है, कोई आतिशबाजी नहीं, शायद थोड़ा नुकसान भी हो। यही वह मैसेज है जो मार्केट आपको देना चाहता है। जब आप इंडेक्स की नई ऊंचाइयों की चमक के इतर देखेंगे, तो आपको पता चलेगा कि यह रैली ब्रॉड बेस्ड नहीं है। यह बड़े शेयरों का चुपचाप लीडरशिप वापस हथियाने का एक क्लासिक और ऐतिहासिक मामला है। जबकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप दो साल की तेज़ी के बाद अब थोड़ा आराम कर रहे हैं।

पिछले दो दशकों में कई बार इस तरह के साइकिल देखने को मिले हैं। यह पैटर्न शायद ही कभी फेल होता है। जब बाजार में रिस्क लेने की इच्छा कम होती है, लिक्विडिटी घट जाती है, वैल्यूएशन बढ़ जाते हैं और अनिश्चितता बढ़ती है, तो पैसा अपने आप सेफ्टी की ओर रुख कर लेता। भारतीय इक्विटी बाजार में,”सेफ्टी” का मतलब हमेशा एक ही रहा है और वह है लार्ज कैप कंपनियां जिनमें अच्छी लिक्विडिटी हो और जिनकी कमाई स्टेबल हो।

बाजार की तेजी में टॉप 10 शेयरों का सबसे बड़ा योगदान

पिछले आठ महीनों में,निफ्टी अप्रैल 2025 के अपने निचले स्तर से 17.4 फीसदी ऊपर चढ़ा है। लेकिन इस बढ़त का लगभग 63 फीसदी हिस्सा सिर्फ़ टॉप 10 शेयरों का है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, SBI, भारती एयरटेल, L&T और दूसरी बड़ी कंपनियों ने ही सारा काम किया है, जबकि, छोटे-मझलों शेयरों के सेगमेंट में मुश्किल से ही कोई हलचल हुई है। निफ्टी माइक्रो कैप 250 इंडेक्स 10 फीसदी नीचे है। वहीं, स्मॉल कैप 250 9 फीसदी नीचे है। माइक्रो कैप और स्मॉल कैप,जिनमें ज़्यादातर रिटेल निवेशकों का पैसा लगा है, उन्होंने इस तेजी में बिल्कुल भी हिस्सा नहीं लिया है।

इस बीच, CNX100/CNX स्मॉल कैप रेशियो अपने लॉन्ग-टर्म सपोर्ट ट्रेंडलाइन से साफ तौर पर ऊपर दिख रहा है। पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो यह एक ऐसा लेवल है जहां से अक्सर लार्ज कैप के बेहतर परफॉर्मेंस के बड़े फेज़ की शुरुआत के संकेत मिले हैं। 2008 में, इस सपोर्ट के बाद लार्ज कैप ने 80 फीसदी का रिलेटिव आउटपरफॉर्मेंस दिखाया था। 2018 में यहां सपोर्ट लेने के बाद लार्ज कैप कंपनियों में 105 फीसदी का उछाल लाया। 2025 की शुरुआत में भी इसी तरह की स्थिति बनती दिखी उसके बाद से हमें लार्ज कैप का परफॉर्मेंस बेहतर होता दिखा है।

वैल्यूएशन भी दे रहे कुछ ऐसे ही संकेत

वर्तमान में मिड कैप 25 गुना फॉरवर्ड अर्निंग पर ट्रेड कर रहे हैं। ये उनके 10-साल के एवरेज 23 गुना से ज़्यादा है। स्मॉल कैप 23 गुना पर हैं, जो उनके लॉन्ग-टर्म एवरेज 18 से काफी ज़्यादा है। ये ऐसे लेवल हैं जिन पर संस्थागत निवेशक निवेश करने से हिचकिचाते हैं और रिटेल इन्वेस्टर्स घबरा जाते हैं। 2025 में हुई 2.67 लाख करोड़ रुपये की भारी FPI बिकवाली से भी इस बात को सपोर्ट मिलता। इस तरह के मार्केट में पैसा स्वाभाविक रूप से सेफ्टी खोजता है, जो लार्जकैप के पक्ष में हैं।

आगे लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद

उम्मीद है कि नए फेड चेयरमैन 2026 में रेट कट की गति को तेज़ करेंगे। ग्लोबल रेट कम होने का मतलब है कि इमर्जिंग मार्केट में लिक्विडिटी की बाढ़ आएगी। ऐसे में अगर बड़े पैमाने पर पैसा भारत में आता है तो शायद यह सबसे पहले और सबसे ज़्यादा लिक्विड शेयरों में जाएगा,जो कि लार्ज कैप कटेगरी में आते है। बहुत बाद में यह पैसा मिड और स्मॉल कैप कंपनियों तक पहुंचेगा। इन सभी बातों को एक साथ रख कर देखें तो तस्वीर एकदम साफ़ है।

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गिरे हुए स्मॉल कैप्स के पीछे भागने के लालच से बचें

इतिहास पर नजर डालें तो साफ होता है कि हम एक ऐसे दौर की शुरुआत में हैं जहां बड़ी कंपनियां मार्केट को लीड करती हैं, मार्केट को मजबूत करती हैं और उसे स्टेबलाइज़ करती हैं। फिर इसके बाद शादी के जश्न में छोटी-मझोली कंपनियां भी बाराती बन कर शामिल हो जाती हैं।

ऐसे में अगर आप इन्वेस्टर हैं तो गिरे हुए स्मॉल कैप्स के पीछे भागने के लालच से बचें। यह अपने पोर्टफोलियो में क्वालिटी स्टॉक्स को जगह दें। मार्केट के दिग्गजों पर फोकस करें।

जिमीत मोदी SAMCO सिक्योरिटीज के CEO और फाउंडर हैं.

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