गोल्डमैन सैक्स ने बढ़ाई भारत की रेटिंग, निफ्टी के 29,000 तक पहुंचने का अनुमान – goldman sachs upgrades india to overweight sets nifty 50 target at 29000



ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारतीय शेयर मार्केट की रेटिंग को बढ़ाकर ‘ओवरवेट’ कर दिया है। गोल्डमैन सैक्स ने लगभग 13 महीने बाद यह कदम उठाया है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में इसने भारत की रेटिंग को घटाकर न्यूट्रल कर दिया था।

रेटिंग बढ़ाने के साथ ही गोल्डमैन सैक्स ने निफ्टी 50 के लिए 29,000 अंक का टारगेट दिया है, जिसे दिसंबर 2026 के अंत तक हासिल होने की उम्मीद है। यह मौजूदा स्तरों से करीब 14 प्रतिशत की उछाल की संभावना को दिखाता है।

ब्रोकरेज ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि निवेशकों को आने वाले समय में फाइनेंशियल्स, कंज्यूमर स्टेपल्स, डिफेंस और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों जैसे सेक्टरों पर दांव लगाना चाहिए। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि कमाई में कमी, बाहरी आर्थिक चुनौतियां और AI (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) को लेकर बढ़ती चिंताएं बाजार के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।

गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि इस साल अब तक भारतीय शेयर बाजार डॉलर के संदर्भ में 3% ऊपर है, जबकि दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स लगभग 30% तक बढ़े हैं। यह पिछड़ापन पिछले दो दशकों में सबसे बड़ा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका कारण महंगे वैल्यूएशन, धीमी ग्रोथ और मुनाफे में गिरावट की उम्मीदें रही हैं।

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, जैसे-जैसे यह साल आगे बढ़ा, अर्निंग्स अनुमान घटने और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं ने विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। हालांकि अब ब्रोकरेज को लगता है कि आने वाले साल में भारतीय शेयर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से ब्याज दरों में नरमी, GST में कटौती और धीमी राजकोषीय सख्ती अगले दो सालों में भारत की ग्रोथ रिकवरी को मजबूत कर सकते हैं।

गोल्डमैन सैक्स ने यह भी बताया कि भारत की EPS (अर्निंग प्रति शेयर) डाउनग्रेड साइकिल सामान्य 10 महीने की तुलना में ज्यादा लंबी चली है, लेकिन पिछले तीन महीनों से इसमें स्थिरता आई है। अभी तक के सितंबर तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिससे चुनिंदा सेक्टर्स में अपग्रेड की संभावना बनी है।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि MSCI इंडिया इंडेक्स में शामिल कंपनियों का प्रॉफिट ग्रोथ 2025 में 10% से बढ़कर 2026 में 14% हो सकती है।

गोल्डमैन सैक्स ने यह भी बताया कि पिछले एक साल में विदेशी निवेशकों ने 30 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली की है, जिससे विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी और म्यूचुअल फंड आवंटन दो दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि हाल के हफ्तों में विदेशी फंड्स की वापसी के संकेत दिखने लगे हैं, जिससे जोखिम लेने की भावना में सुधार दिख रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के साथ व्यापारिक तनावों में नरमी बाजार के लिए एक अतिरिक्त पॉजिटिव ट्रिगर बन सकती है।

फिलहाल भारतीय बाजार का वैल्यूएशन 23 गुना प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) पर है, जो ऊंचा जरूर है, लेकिन गोल्डमैन सैक्स को इसमें डाउनसाइड या डी-रेटिंग का खतरा सीमित दिख रहा है। फर्म का कहना है कि भारत का एशिया के मुकाबले वैल्यूएशन प्रीमियम 85-90% से घटकर अब 45% पर आ गया है, जो एक संतुलित स्तर दिखाता है।

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