
Rupee at record low : रुपये में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। एक डॉलर का भाव 90 रुपये के पार निकल गया है। डॉलर के मुकाबले रुपए में रिकॉर्ड गिरावट आई है। रुपया रिकॉर्ड 90.29 रुपए प्रति डॉलर तक फिसला है। आज रुपया 40 पैसे से ज्यादा गिरा है। इसमें 2022 के बाद अब तक सबसे ज्यादा गिरावट आई है। रुपया 2025 में सभी एशियाई करेंसियों में मुकाबले ज्यादा गिरा है। आज की गिरावट को मिलाकर 2 हफ्ते में रुपया 2 फीसदी फिसला है। इस साल रुपये में 5 फीसदी की गिरावट आई है।
कब-कब कमजोर हुआ रुपया?
JAN 2012 में रुपया डॉलर के मुकाबले 50 के स्तर पर था। JUN 2013 में यह 60 के स्तर पर पहुंच गया। AUG 2018 में यह 70 रुपए प्रति डॉलर पर आ गया। NOV 2022 में यह 80 के लेवल पर आ गया। वहीं, DEC 2025 में एक डॉलर का भाव 90 रुपये के पार निकल गया।
क्यों टूट रहा है रुपया?
FPIs की लगातार बिकवाली, भारत-US ट्रेड डील में देरी, ज्यादा तेल इंपोर्ट और कमजोर एक्सपोर्ट से CAD में उछाल के चलते अहम टेक्निकल स्तर टूट गए हैं और SL हिट हुए हैं। मजबूत GDP के बाद दरें घटने की गुंजाइश कम हुई है। इससे भी रुपए पर असर पड़ा है।
रुपये की गिरावट पर डीलर्स
डीलर्स का कहना है कि रुपए के RBI की तरफ से सपोर्ट कम है। यह किसी लेवल को नहीं बचा रहा है। RBI ने इसमें व्यापार घाटे से निपटने का तरीका खोजा है। कमजोर करेंसी के सहारे एक्सपोर्ट्स को राहत मिलेगी। वहीं, इंपोर्ट महंगे होंगे।
कमजोर रुपए का शेयर बाजार पर असर
कमजोर रुपए से IT मार्जिन सुधरेंगे, क्योंकि इनकी आय डॉलर में आती है। ज्यादातर कंपनियों का US में कारोबार है। वहीं,फार्मा सेक्टर पर इसका मिलाजुला असर होगा। ज्यादातर कंपनियां पोजीशन हेज रखती हैं। पहले ही भाव पर मोलभाव हो चुका है। इक इनपुट कॉस्ट पर भी असर होगा। फार्मा कंपनियों की बिक्री का 40-60 फीसदी हिस्सा डॉलर में होता है।
ऑटो सेक्टर पर इसका पॉजिटिव असर होगा। 2-व्हीलर्स में TVS मोटर, बजाज ऑटो को सबसे ज्यादा फायदा होगा। ऑटो एंसिलरी में भारत फोर्ज और संवर्धन मदरसन को फायदा होगा। वहीं, Uno मिंडा के लिए निगेटिव असर देखने को मिलेगा।
TVS मोटर के एक्सपोर्ट वॉल्यूम में डॉलर की 30 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, आय में 25-26 फीसदी भागीदारी है। बजाज ऑटो पर भी रुपए में कमजोर का पॉजिटिव असर होगा। कंपनी की कुल आय में एक्सपोर्ट का 50 फीसद हिस्सा है। डॉलर के मुकाले 1 रुपया गिरने से कंपनी का सालाना EBITDA 200 करोड़ रुपए बढ़ता है।
संवर्धन मदरसन पर भी रुपए की कमजोर का पॉजिटिव असर होगा। कंपनी की यूरोप और US से 60-65 फीसदी आय होती है। कमजोर रुपये से इनके नतीजों में सुधार होता है। हालंकि विदेश में ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग से कॉस्ट बढ़ती है।
भारत फोर्ज पर भी इसका पॉजिटिव असर होगा। कंपनी की कुल आय में एक्सपोर्ट का 60 फीसदी हिस्सा है। कंपनी की US/EU ऑर्डरबुक में मुनाफा बढ़ेगा। लेकिन Uno मिंडा पर इसका निगेटिव असर होगा। आय में ज्यादातर हिस्सा घरेलू कारोबार (70%+) की हिस्सेदारी है। कंपनी बड़ी मात्रा में इंपोर्ट पर निर्भर है। रुपए में कमजोरी का ONGC और ऑयल इंडिया पर पॉजिटिव असर होगा। 1 रुपया गिरने से EPS 1-2 फीसदी सुधरता है।
रुपए में कमजोरी का RIL पर मिलाजुला असर होगा। कंपनी LNG और इथेन का इंपोर्ट करती है। इसका निगेटिव असर होगा। वहीं, GRMs डॉलर में आते हैं, ये पॉजिटिव है।
सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों पर असर
सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों की बात करें तो LNG इंपोर्ट करने से इनकी इनपुट कॉस्ट बढ़ती है। इसके चलते EPS पर 4-11 फीसदी का असर पड़ सकता है।
केमिकल कंपनियों पर असर
केमिकल कंपनियों पर रुपए में कमजोरी के असर की बात करें तो ये US में काम करने वाली कंपनियों के लिए पॉजिटिव है। इससे Navin fluorine, SRF, Aarti Ind और Atul को फायदा हो सकता है।
(डिस्क्लेमर: नेटवर्क 18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट लिमिटेड पर इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट का मालिकाना हक है। इसकी बेनफिशियरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।)