
Infosys Share Buyback: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंफोसिस का ₹18 हजार करोड़ का शेयर बायबैक कल 20 नवंबर को खुलेगा और 26 नवंबर को बंद होगा। यह इंफोसिस के लिए अब तक का सबसे बड़ा बायबैक होगा। इस बायबैक के लिए प्रति शेयर ₹1800 का भाव फिक्स किया गया है। बायबैक के एक दिन पहले आज इंफोसिस के शेयर चमक उठे और करीब 4% उछल पड़े। हालांकि इस तेजी का निवेशकों ने फायदा उठाया और मुनाफावसूली की तो भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन अब भी यह काफी मजबूत स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 3.32% की बढ़त के साथ ₹1535.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 3.85% उछलकर ₹1542.80 तक पहुंच गया था।
Infosys Share Buyback में 15% हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित?
बायबैक के तहत कंपनी मौजूदा शेयरहोल्डर्स से शेयरों को वापस खरीदती है। आमतौर पर कंपनी इसे मार्केट प्राइस से अधिक भाव पर खरीदती है। इस बार ₹18 हजार करोड़ के बायबैक के लिए ₹1800 का भाव फिक्स किया गया है। इसके तहत कंपनी ₹5 की फेस वैल्यू वाले 10 करोड़ फुल्ली पेड-अप इक्विटी शेयरों को वापस खरीदेगी जो कंपनी की कुल पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल की 2.41% हिस्सेदारी है। इससे पहले वर्ष 2022 में इंफोसिस ने शेयर बायबैक किया था और यह ₹9300 करोड़ का प्रोग्राम था।
बायबैक को दो कैटेगरी में बांटा गया है- आरक्षित (रिटेल इंवेस्टर्स) और जनरल कैटेगरी। रिटेल इंवेस्टर्स का मतलब है ₹2 लाख तक निवेश वाले निवेशक और बायबैक की रिकॉर्ड डेट 14 नवंबर के हिसाब से इंफोसिस में 25,85,684 रिटेल इंवेस्टर्स हैं। बायबैक के तहत 15% हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। आरक्षित कैटेगरी में कंपनी 2:11 के रेश्यो में यानी हर 11 शेयर पर 2 शेयरों को बायबैक करेगी। जनरल कैटेगरी के लिए यह रेश्यों 17:706 है।
क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?
इंफोसिस ने 22 अक्टूबर को एक्सचेंज फाइलिंग में खुलासा किया था कि इसके प्रमोटर्स बायबैक में हिस्सा नहीं लेंगे। सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक इंफोसिस में प्रमोटर्स की कंपनी में हिस्सेदारी 14.30% है। इसमें इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि की हिस्सेदारी 1.08% है तो एनआर नारायणमूर्ति की 0.40% और सुधामूर्तिकी 0.91% है। वहीं रोहन मूर्ति की 1.60% और अक्षतामूर्ति की 1.03% हिस्सेदारी है।
बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि चूंकि प्रमोटर्स बायबैक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं तो पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए एस्सेप्टेंस रेश्यो अधिक हो सकता है यानी कि अधिक निवेशकों को बायबैक का फायदा मिल सकता है।
न्यूज एजेंसी रायटर्स से बातचीत में एसएमसी ग्लोबल के सौरेभ जैन ने कहा कि प्रमोटर्स का बायबैक में हिस्सा न लेना कंपनी के भविष्य के प्रति उनका भरोसा दिखाता है और इससे खुदरा निवेशकों को बायबैक में फायदा मिलेगा। न्यूज एजेंसी रायटर्स से अरिहंत कैपिटल मार्केट्स की फाउंडर और इंस्टीट्यूशनल बिजनेस हेड अनीता गांधी का कहना है कि प्रमोटर्स बायबैक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं यानी कि वह कारोबार को लेकर आश्वस्त हैं जिससे आईटी सेक्टर में निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्र का कहना है कि बायबैक करना है यानी कि कंपनी को शेयर बेचना है या नहीं, इस पर फैसला टैक्स से भी प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 से बायबैक के पैसे पर टैक्स की देनदारी शेयरहोल्डर्स पर ही बन रही तो हाई टैक्स ब्रैकेट में आने वालों के लिए यह ऑफर कम आकर्षक है लेकिन कम टैक्स या टैक्स-छूट वाले निवेशकों के लिए, खासकर छोटे शेयरहोल्डर्स के लिए यह फायदेमंद हो सकता है।
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