
मोतीलाल ओसवाल ग्रुप के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल का मानना है कि ईरान से जुड़े बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा डर शायद शेयर बाजार पहले ही कीमतों में शामिल कर चुका है। उन्होंने CNBC TV18 से बातचीत में कहा कि वित्तीय बाजार अक्सर भू राजनीतिक घटनाओं से तेज चलते हैं। बाजार असली असर दिखने से पहले ही जोखिम को कीमतों में शामिल कर लेते हैं।
अग्रवाल के मुताबिक, जब तक ईरान से जुड़ी कोई बिल्कुल अप्रत्याशित घटना नहीं होती, तब तक युद्ध से जुड़ा सबसे बड़ा डर बाजार में पहले ही शामिल माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाजार दो तीन दिनों में उन जोखिमों को भी कीमतों में शामिल कर देता है, जिनका असली असर बाद में धीरे धीरे दिखता है।
वैश्विक हालात ने निवेश को जटिल बना दिया
रामदेव अग्रवाल ने कहा कि इस समय निवेश का माहौल काफी जटिल हो गया है क्योंकि दुनिया में कई बड़े घटनाक्रम एक साथ हो रहे हैं। निवेशकों को बाजार में समझदारी और सावधानी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज की चुनौती यह है कि इतने हलचल वाले माहौल में निवेशक संतुलन कैसे बनाएं। पश्चिम एशिया में भू राजनीतिक तनाव उन कई कारणों में से एक है जो बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं।
बाजार की दिशा तय करेंगे कॉरपोरेट नतीजे
रामदेव अग्रवाल ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में कॉरपोरेट नतीजे सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि तीसरी तिमाही के नतीजों में कई कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
उन्होंने कहा कि करीब 300 से 350 कंपनियों के नतीजों का विश्लेषण करने पर यह साफ दिखता है कि ज्यादातर कंपनियां सकारात्मक संकेत दे रही हैं। इसके साथ ही असली अर्थव्यवस्था में भी सुधार दिखाई दे रहा है। उन्होंने GDP आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि तीसरी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज हुई है। यह आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी का संकेत देती है।
गिरावट के बाद वैल्यूएशन ज्यादा संतुलित
रामदेव अग्रवाल के मुताबिक हालिया उतार चढ़ाव के बाद भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन कुछ हद तक संतुलित हो गया है। उन्होंने कहा कि निफ्टी इस समय मौजूदा साल की कमाई के करीब 21.5 से 22 गुना पर ट्रेड कर रहा है। उनके अनुसार यह स्तर बाजार को निवेश के लिहाज से ज्यादा संतुलित बनाता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसे सस्ता बाजार नहीं कहा जा सकता।
निवेश में सेलेक्टिव रहना जरूरी
अग्रवाल का मानना है कि मौजूदा वैश्विक जोखिमों के बीच निवेशकों को बहुत सोच समझकर स्टॉक्स चुनने चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकिंग और घरेलू खपत से जुड़े सेक्टर ऐसे हैं जिन पर वैश्विक घटनाओं का असर अपेक्षाकृत कम पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज बाजार में लाखों नए निवेशक आए हैं, लेकिन हर किसी के पास सही स्टॉक्स चुनने का अनुभव नहीं होता। ऐसे निवेशकों के लिए इंडेक्स निवेश या प्रोफेशनल फंड मैनेजर के जरिए निवेश करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
बहुत ज्यादा रिटर्न की उम्मीद न रखें
रामदेव अग्रवाल के मुताबिक मौजूदा बाजार में निवेशकों को बहुत ज्यादा रिटर्न की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कमाई की वृद्धि के हिसाब से 12 से 15 प्रतिशत के आसपास रिटर्न की उम्मीद रखना ज्यादा यथार्थवादी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बाजार के वैल्यूएशन मल्टीपल में बहुत बड़ी तेजी आने की संभावना कम है।
सप्लाई सिस्टम सामान्य होने की उम्मीद
अग्रवाल ने कहा कि ऊर्जा सप्लाई से जुड़े जोखिम अभी भी बाजार के लिए एक बड़ा फैक्टर बने हुए हैं। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आपूर्ति रुकती है तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात के मोरबी में गैस की कमी के कारण कुछ समय के लिए टाइल उत्पादन रोकना पड़ा था।
रामदेव अग्रवाल का मानना है कि मौजूदा संकट लंबे समय तक नहीं चलेगा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति आखिरकार सामान्य हो जाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति कुछ चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन आने वाले हफ्तों में इसके सामान्य होने की संभावना 90 से 95 प्रतिशत तक है।
गिरावट में मिल सकते हैं अच्छे मौके
अग्रवाल ने कहा कि निवेशकों को सिर्फ इंडेक्स नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्टॉक्स पर भी ध्यान देना चाहिए। कई अच्छे स्टॉक्स बाजार की गिरावट में 25 से 30 प्रतिशत तक टूट चुके हैं।
उनके मुताबिक अगर किसी कंपनी का सही मूल्य 1000 रुपये है और वह 700 या 600 रुपये पर मिल रही है, तो यह निवेश के लिहाज से एक अच्छा मौका हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गिरावट और आगे भी आ सकती है, लेकिन मौजूदा स्तर कई अच्छे स्टॉक्स में एंट्री के अवसर दे सकते हैं।
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