
स्टॉक मार्केट्स पर फिलहाल मध्यपूर्व क्राइसिस का असर दिख रहा है। यह लड़ाई थमने के बाद शेयर बाजार में तेजी आ सकती है। हालांकि, मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि निवेशकों को मार्केट्स से अपने रिटर्न के अनुमान को व्यावहारिक रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शेयरों की वैल्यूएशंस में रीरेटिंग की गुंजाइश सीमित दिखती है।
12-15 फीसदी रिटर्न की उम्मीद व्यावहारिक
अग्रवाल ने सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में मार्केट के बारे में कई अहम बातें बताईं। उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में निवेशकों को मार्केट से करीब 12-15 फीसदी सालाना रिटर्न की उम्मीद करनी चाहिए। यह कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ के हिसाब से सही लगता है। उन्होंने कहा, “मैं बाजार से 12 से 15 फीसदी के बीच सामान्य रिटर्न की उम्मीद रखना चाहूंगा। यह वह रिटर्न है जो अर्निंग्स के हिसाब से है।”
वैल्यूएशन मल्टीपल ज्यादा बढ़ने के संकेत नहीं
उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में वैल्यूएशन मल्टीपल में ज्यादा इजाफा के संकेत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि शेयरों में आगे तेजी कंपनियों की अर्निंग्स पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा, “मुझे प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल में रीरेटिंग की उम्मीद नहीं है। यह रीरेटिंग अक्सर बुल साइकिल के दौरान दिखती है।” उन्होंने बताया कि शेयर बाजार में रिटर्न अक्सर दो स्रोतों से आता है। इसमें पहला अर्निंग्स ग्रोथ और दूसरा वैल्यूएशन एक्सपैंशन है।
हालिया करेक्शंस से वैल्यूएशन घटी है
मार्केट की वैल्यूएशन के बारे में अग्रवाल ने कहा हालिया करेक्शंस और उतार-चढ़ाव के बाद मार्केट की वैल्यूएशन में कमी आई है। अब यह ज्यादा सही लेवल पर आ गई है। उन्होंने बताया कि अभी निफ्टी में करेंट ईयर अर्निंग्स के करीब 21.5 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। इसे ‘फेयर्ली प्राइस्ड’ जोन कहा जा सकता है। उन्होंने कहा, “अभी बाजार ज्यादा महंगा नहीं है। यह फेयर्ली प्राइस्ड मार्केट है।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस लेवल पर बाजार को सस्ता नहीं कहा जा सकता।
तीसरी तिमाही के नतीजें अच्छे प्रदर्शन के संकेत
रामदेव अग्रवाल ने कहा कि वैल्यूएशन स्टैबल होने पर मार्केट के रिटर्न का अगल चरण काफी ज्यादा कॉर्पोरेट अर्निंग मोमेंटम पर निर्भर करेगा। उन्होंने हालिया तिमाही नतीजों के बारे में कहा कि इनसे संकेत मिलता है कि सभी सेक्टर्स में कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर आप तीसरी तिमाही के नतीजों को देखें तो आप पाएंगे कि करीब 300 से 350 कंपनियों का प्रदरशन बहुत अच्छा है।”
कंपनियां कारोबार की स्थिति को लेकर आशावान
उन्होंने कहा कि कंपनियों के मैनेजमेंट से बातचीत करने पर पता चलता है कि कारोबार की स्थितियों को लेकर वे आशावान हैं। उन्होंने कहा, “अगर आप कंपनियों में जाए तो आप पाएंगे कि आशावादी कंपनियों की संख्या निराशावादी कंपनियों से ज्यादा है।” उन्होंने उन इकोनॉमिक इंडिकेर्स का हवाला दिया, जो अर्निंग्स ग्रोथ आउटलुक को सपोर्ट करेत हैं। उन्होंने कहा कि इंडियन इकोनॉमी में मजबूती के संकेत हैं। इसकी पुष्टि ग्रोथ के हालिया डेटा से होती है।
5 मार्च को शेयर बाजार में लौटी तेजी
अग्रवाल ने ये बातें तब कही हैं, जब काफी ज्यादा वैश्विक अनिश्चितता है। जियोपॉलिटिकल टेंशन बहुत ज्यादा है। एनर्जी मार्केट में उथलपुथल है। इससे फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। 5 मार्च को शेयर बाजार में अच्छी तेजी आई। निफ्टी 1.17 फीसदी यानी 285 अंक चढ़कर 24,765 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 899 प्वाइंट्स के उछाल के साथ 80,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार बंद हुआ।