
Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों को झकझोर दिया है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर संयुक्त हमले के बाद हालात तेजी से बदले हैं। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि सोने और कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी की आशंका जताई जा रही है।
बाजार की असली परीक्षा
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद जब रविवार दे रात को वैश्विक ट्रेडिंग फिर शुरू होगी, तब तेल और सोने में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। ट्रेडर्स पहले से आशंका जता रहे थे कि दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ता अमेरिका और OPEC के प्रमुख उत्पादकों में से एक ईरान के बीच टकराव हो सकता है। अब कच्चे तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम साफ दिख सकता है।
सोना बना सुरक्षित ठिकाना
शुक्रवार को सोना 5,278 डॉलर पर बंद हुआ था। उम्मीद है कि ट्रेडिंग दोबारा शुरू होने पर यह गैप-अप के साथ खुलेगा। 1 मार्च 2026 को गोल्ड फ्यूचर्स 5,296.4 डॉलर पर 1.97 प्रतिशत की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे।
आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान किस स्तर तक जवाबी कार्रवाई करता है और संघर्ष कितना फैलता है। अगर तनाव बढ़ता है तो सोना नए ऑल-टाइम हाई तक जा सकता है। ऐसे समय में वैश्विक पूंजी के लिए सोना अंतिम सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय
LKP Securities में कमोडिटी और करेंसी के VP रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के मुताबिक मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक बाजार में बेचैनी बढ़ा दी है। ऐसे हालात में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतें गैप-अप के साथ खुल सकती हैं और इनमें तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
उनका कहना है कि लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई से अनिश्चितता बढ़ी है और फिलहाल जल्दी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कमजोर दिख रही है। इस तरह का ऊंचा भू-राजनीतिक जोखिम निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों, यानी सोना और चांदी, की ओर धकेलता है।
हालांकि त्रिवेदी यह भी चेतावनी देते हैं कि असर एकतरफा नहीं होगा। अगर वीकेंड के दौरान कोई कूटनीतिक पहल होती है या तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं, तो शुरुआती 3 से 6 प्रतिशत की तेजी के बाद सोने और चांदी में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।
हमले से पहले तेल का स्तर
अमेरिका और इजराइल के हमले से पहले शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 72.48 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 67.02 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। एनालिस्टों का मानना है कि जब ट्रेडिंग फिर शुरू होगी तो कीमतों में 2019 के बाद सबसे बड़ा गैप देखने को मिल सकता है।
त्रिवेदी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी दिख रही है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्गों से सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण। इससे बाजार में जोखिम से बचने की भावना और मजबूत होती है। यह फैक्टर गोल्ड की कीमतों में और भी ज्यादा तेजी ला सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नजर
Equirus Securities ने चेतावनी दी है कि अगर तनाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक पहुंचता है तो कच्चे तेल में 20 से 40 डॉलर प्रति बैरल तक का अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम जुड़ सकता है। इससे ब्रेंट 95 से 110 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर तक जा सकता है। यह बढ़ोतरी केवल ईरान की सप्लाई पर असर से कहीं ज्यादा होगी।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक, 2024 में रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल, कंडेन्सेट और ईंधन उत्पाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरे। यह वैश्विक तरल तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक बाजार पर गहरा होगा।
कितना बढ़ सकता है तेल?
फरवरी में 34 अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों के सर्वे में कच्चे तेल के लिए भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम 4 से 10 डॉलर प्रति बैरल के बीच आंका गया था। Barclays का कहना है कि सप्लाई में बड़ी रुकावट होने पर ब्रेंट 80 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
अगर संघर्ष और बढ़ता है या शिपिंग रूट और ईरान के निर्यात बाधित होते हैं तो तेल 15 से 20 डॉलर और चढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में ब्रेंट 85 डॉलर के ऊपर और WTI 80 डॉलर के पार जा सकता है।
पूर्ण नाकाबंदी की आशंका कम
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की पूर्ण नाकाबंदी की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो असर बेहद गंभीर होगा। इससे ईरान के खुद के निर्यात पर भी चोट पहुंचेगी। ईरान का उत्पादन फिलहाल करीब 3.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, जो प्रतिबंधों से पहले 6 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आसपास था।
चार दशकों के प्रतिबंधों के बावजूद ईरान दुनिया के शीर्ष दस तेल उत्पादकों में शामिल है। उसकी तेल उत्पादन लागत लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल है। यह सऊदी अरब, इराक, कुवैत और UAE के बराबर है। साथ ही, कनाडा और अमेरिका की 40 से 60 डॉलर प्रति बैरल लागत से काफी कम है।
चीन पर संभावित असर
ईरान के 80 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का निर्यात चीन को जाता है। अगर हमलों या प्रतिबंधों के कारण यह निर्यात बाधित होता है तो चीन को स्पॉट मार्केट से वैकल्पिक सप्लाई खरीदनी पड़ेगी। इससे ऐसे समय में वैश्विक सप्लाई और सख्त हो सकती है, जब भू-राजनीतिक तनाव पहले से ही मांग को बढ़ा रहे हैं।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मसला नहीं है। इसका सीधा असर सोने, तेल, वैश्विक सप्लाई और निवेशकों की रणनीति पर पड़ सकता है।
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