
CLSA Report: भारतीय उद्योग जगत की कमाई पर आई ब्रोकरेज फर्म CLSA की लेटेस्ट रिपोर्ट एक साफ तस्वीर दिखाती है। मिडकैप कंपनियां लगातार छठी तिमाही में कमाई के मामले में आगे हैं। वहीं, स्मॉलकैप कंपनियों पर अर्निंग कटौती का दबाव बढ़ रहा है। CLSA की स्ट्रैटेजी रिपोर्ट बताती है कि बाजार में उम्मीदें ऊंची हैं, लेकिन जमीन पर प्रदर्शन हर जगह उतना मजबूत नहीं है।
CLSA ने निफ्टी 500 कंपनियों की रिव्यू में पाया कि दिसंबर तिमाही में मिडकैप कंपनियों ने मजबूत प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई। दूसरी ओर, स्मॉलकैप कंपनियों के FY27 और FY28 के अर्निंग अनुमान में कटौती की गई है। दिलचस्प बात यह है कि इसके बावजूद अगले दो साल में सबसे तेज कमाई बढ़ोतरी का अनुमान अब भी स्मॉलकैप के लिए लगाया जा रहा है।
CLSA का मानना है कि हालिया प्रदर्शन और भविष्य की उम्मीदों के बीच का यह अंतर आगे और डाउनग्रेड का जोखिम बढ़ा सकता है। ब्रोकरेज ने साफ कहा है कि वह लार्जकैप को प्राथमिकता देता है और स्मॉलकैप में ज्यादा जोखिम देखता है।
लगातार छठी तिमाही मिडकैप की बढ़त
CLSA की तिमाही समीक्षा के मुताबिक, दिसंबर तिमाही (Q3FY26) में मिडकैप कंपनियां सबसे मजबूत अर्निंग परफॉर्मर रहीं। निफ्टी 500 कंपनियों का कुल प्रॉफिट आफ्टर टैक्स यानी PAT सालाना आधार पर 9 प्रतिशत बढ़ा। लेकिन जब इसे अलग-अलग मार्केट कैप के आधार पर देखा गया तो तस्वीर बदल जाती है।
मिडकैप कंपनियों ने 19.6 प्रतिशत PAT ग्रोथ दर्ज की। इसके मुकाबले लार्जकैप में यह ग्रोथ 6.6 प्रतिशत रही और स्मॉलकैप में 12.9 प्रतिशत। CLSA ने कहा कि PAT ग्रोथ के मामले में यह मिडकैप की लगातार छठी तिमाही की लीडरशिप है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि तिमाही में बढ़े अतिरिक्त मुनाफे में मिडकैप का बड़ा योगदान रहा। निफ्टी 500 की कुल सेल्स ग्रोथ 10 तिमाहियों के उच्च स्तर 12.9 प्रतिशत पर पहुंची, लेकिन प्रॉफिट ग्रोथ की रफ्तार उतनी तेज नहीं रही।
हालांकि, CLSA ने एक अहम बात भी कही। कुल अर्निंग ग्रोथ का दायरा सिमट गया है। लगभग 80 प्रतिशत अतिरिक्त मुनाफा ऑयल एंड गैस और फाइनेंशियल सेक्टर से आया। यानी कमाई कुछ चुनिंदा सेक्टरों में केंद्रित रही। ऊर्जा और बैंकिंग सेक्टर को हटा दें तो PAT ग्रोथ सिर्फ 0.6 प्रतिशत सालाना रही। इसे CLSA ने अर्निंग ब्रेड्थ में तेज गिरावट बताया।
स्मॉलकैप में सबसे ज्यादा अर्निंग कटौती
जहां मिडकैप मजबूत दिखे, वहीं स्मॉलकैप कंपनियों में अर्निंग डाउनग्रेड ज्यादा देखने को मिले। CLSA के मुताबिक, तिमाही के दौरान स्मॉलकैप कंपनियों के FY27 और FY28 के अर्निंग अनुमान में क्रमशः 3.9 प्रतिशत और 3.1 प्रतिशत की कटौती की गई। यह लगातार तीसरी तिमाही है जब स्मॉलकैप इस मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।
इसके उलट, लार्जकैप कंपनियों के FY27 और FY28 के अनुमान में क्रमशः 0.6 प्रतिशत और 0.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। मिडकैप में FY27 के लिए हल्की कटौती हुई, लेकिन FY28 के लिए अनुमान बढ़ाया गया। CLSA ने कहा कि तिमाही प्रदर्शन बहुत खराब नहीं था, फिर भी बाजार में गिरावट आई क्योंकि अर्निंग उम्मीदों से बेहतर नहीं रही। यानी निवेशकों को जो सरप्राइज चाहिए था, वह नहीं मिला।
स्मॉलकैप के लिए उम्मीदें अब भी बहुत ऊंची
दिलचस्प बात यह है कि अर्निंग कटौती के बावजूद अगले दो साल के लिए सबसे तेज ग्रोथ की उम्मीद अब भी स्मॉलकैप से ही की जा रही है। CLSA के आंकड़ों के मुताबिक FY26 से FY28 के बीच स्मॉलकैप कंपनियों के लिए 28.4 प्रतिशत अर्निंग CAGR का अनुमान है। मिडकैप के लिए यह 22 प्रतिशत और लार्जकैप के लिए 13.4 प्रतिशत है।
लेकिन यहां एक बड़ा अंतर दिखता है। CLSA के अनुसार, करीब 62 प्रतिशत स्मॉलकैप कंपनियों से अगले दो साल में 20 प्रतिशत से ज्यादा सालाना कंपाउंड ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि पिछली चार तिमाहियों में सिर्फ 39 प्रतिशत कंपनियां ही ऐसा कर पाईं।
30 प्रतिशत से ज्यादा ग्रोथ के मामले में भी यही तस्वीर है। पिछली चार तिमाहियों में 26 प्रतिशत स्मॉलकैप कंपनियों ने 30 प्रतिशत से ज्यादा ग्रोथ दी। वहीं, अगले दो साल में 35 प्रतिशत कंपनियों से इतनी ग्रोथ की उम्मीद की जा रही है। CLSA का कहना है कि स्मॉलकैप में उम्मीदों की गर्मी बढ़ रही है, जबकि असल प्रदर्शन उतना मजबूत नहीं रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कवरेज में शामिल 36 प्रतिशत स्मॉलकैप शेयरों ने पिछली चार तिमाहियों में नेगेटिव रिटर्न दिया है।
CLSA लार्जकैप को क्यों तरजीह दे रहा है
CLSA का मानना है कि जब उम्मीदें ऊंची हों और वैल्यूएशन भी महंगा हो, तब निराशा की गुंजाइश बढ़ जाती है। इसी वजह से उसने स्मॉलकैप में ज्यादा EPS डाउनग्रेड जोखिम की चेतावनी दी है और लार्जकैप को प्राथमिकता दी है।
कंसेंसस के मुताबिक निफ्टी 500 की कमाई FY26 से FY28 के बीच 16 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। लेकिन CLSA ने साफ कहा है कि अर्निंग डाउनग्रेड को सीमित रखना बेहद अहम होगा। अगर अनुमान लगातार घटते रहे तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है। ब्रोकरेज का मानना है कि उम्मीदों का बोझ और ऊंचा वैल्यूएशन बड़े अपसाइड की गुंजाइश को सीमित कर रहा है।
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।