गोल्ड, शेयर बाजार, FD, रियल एस्टेट… कहां लगाएं पैसा? एक्सपर्ट से जानिए किसमें मिलेगा तगड़ा रिटर्न – gold vs stock market vs fd vs real estate where to invest money expert advice on asset allocation and returns



इस समय निवेशकों के सामने बड़ी उलझन है कि अलग-अलग एसेट क्लास में पैसा कहां लगाया जाए। पिछले करीब डेढ़ साल से शेयर बाजार सुस्त बना हुआ है और रिटर्न सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित रहे हैं। सोना और चांदी में तेज तेजी देखने को मिली, लेकिन अब वे ठहराव के दौर में हैं। रियल एस्टेट मध्यम वर्ग के लिए लगातार महंगा होता जा रहा है। वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट के अपने फायदे हैं, लेकिन रिटर्न सीमित हैं।

ऐसे समय में एक्सपर्ट का कहना है कि निवेश का फैसला भावनाओं से नहीं, बल्कि लक्ष्य और समय सीमा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

लक्ष्य और समय सीमा सबसे अहम

UNIVEST Wealth Multiplier Summit 2026 के दौरान News18 से बातचीत में UNIVEST के को फाउंडर और सीईओ प्रणित अरोड़ा ने कहा कि निवेश पूरी तरह व्यक्ति के लक्ष्य और समय अवधि पर निर्भर करता है।

उन्होंने कहा, ‘हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है। अगर मुझे अपनी बहन की शादी के लिए निकट भविष्य में पैसे चाहिए, तो मैं वह रकम शेयर बाजार में नहीं रख सकता। बाजार अस्थिर होता है और अगर जरूरत अगले दो से तीन साल में है, तो इक्विटी सही विकल्प नहीं हो सकता।’

उन्होंने यह भी जोड़ा कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए तस्वीर अलग होती है। अरोड़ा ने कहा, ‘अगर मेरे पास 10 से 15 साल का नजरिया है और अगले तीन चार साल तक उस पैसे की जरूरत नहीं है, तो बाजार का उतार चढ़ाव चिंता की बात नहीं है। बल्कि यह अवसर भी बन सकता है। कमाई के आंकड़ों और कंपनियों के फंडामेंटल देखें तो हम शायद निचले स्तर के आसपास हों, लेकिन इसकी पक्की भविष्यवाणी कोई नहीं कर सकता।’

एसेट एलोकेशन कैसे तय करें

अरोड़ा ने साफ कहा कि एसेट एलोकेशन समय सीमा और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर मेरी 80 प्रतिशत बचत निकट भविष्य में काम नहीं आने वाली है, तो उसे इक्विटी या म्यूचुअल फंड में लगाया जा सकता है। लेकिन जो पैसा किसी खास छोटे लक्ष्य के लिए चाहिए, उसे एफडी या डेट जैसे सुरक्षित साधनों में रखना समझदारी है।’

हर एसेट क्लास का अपना चक्र

FinEdge के को फाउंडर और सीईओ हर्ष गहलोत ने भी कहा कि हर एसेट क्लास अपने चक्र में चलता है और अलग अलग बाजार चरणों में अलग व्यवहार करता है। उन्होंने कहा, ‘जो निवेशक अपने साफ तय लक्ष्यों के साथ लंबी अवधि में पोर्टफोलियो ग्रोथ चाहते हैं, उनके लिए इक्विटी अभी भी सबसे उपयुक्त एसेट क्लास है।’

गहलोत के मुताबिक, इक्विटी बाजार में सुस्ती का दौर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए नुकसान नहीं, बल्कि मौका हो सकता है। ऐसे समय में धीरे धीरे निवेश बढ़ाकर मजबूत पोर्टफोलियो बनाया जा सकता है। जब बाजार रुख बदलता है, तो कंपाउंडिंग का फायदा साफ नजर आता है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।



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