
Indian export stocks: पिछले एक साल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से भारतीय एक्सपोर्ट कंपनियों के शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ आदेश को रद्द कर दिया। इससे निर्यातकों को कुछ समय के लिए राहत मिली।
हालांकि, इसके तुरंत बाद ट्रंप ने सभी देशों पर 15 प्रतिशत का नया टैरिफ लगाने का फैसला कर दिया। इससे फिर अनिश्चितता बढ़ गई और एक्सपोर्ट कंपनियों के शेयरों को लेकर उलझन भी।
नए ट्रंप टैरिफ पर एक्सपर्ट की राय
Geojit Financial Services के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गौरांग शाह का कहना है कि ज्यादातर एक्सपोर्ट वाले स्टॉक्स पहले ही अंतरिम ट्रेड डील के फायदे को अपने भाव में शामिल कर चुके हैं। इसलिए यहां से लंबी और मजबूत रैली की गुंजाइश सीमित दिखती है।
शाह के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ समय के लिए तेजी आ सकती है, लेकिन अभी असली और टिकाऊ बढ़त की उम्मीद नहीं है। ये तभी आएगी, जब अंतिम टैरिफ दर और लॉन्ग टर्म व्यापार समझौते पर साफ तस्वीर सामने आए। तब तक एक्सपोर्ट पर निर्भर सेक्टरों में उतार चढ़ाव बना रह सकता है और बाजार सीमित दायरे में घूम सकता है।
टेक्सटाइल, झींगा और जेम्स सेक्टर में जोरदार उछाल
जिन सेक्टरों की अमेरिका पर भारी निर्भरता है, वे अप्रैल में 50 प्रतिशत तक के टैरिफ और बाद में अतिरिक्त पेनल्टी बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। जैसे टेक्सटाइल, मरीन प्रोडक्ट्स और जेम्स एंड ज्वेलरी। हाल के हफ्तों में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील के बाद इन सेक्टरों में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। इस समझौते के तहत टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिए गए।
टेक्सटाइल सेक्टर में Gokaldas Exports और Indo Count Industries अपनी करीब 70 प्रतिशत आय अमेरिका से कमाते हैं। वहीं, Welspun Living का लगभग 65 प्रतिशत कारोबार अमेरिकी बाजार से आता है। जेम्स और ज्वेलरी सेगमेंट में Goldiam International की लगभग 90 प्रतिशत आय अमेरिका से जुड़ी है। वहीं झींगा निर्यातक Avanti Feeds और Apex Frozen Foods भी अमेरिकी मांग पर काफी निर्भर हैं।
ऑटो एंसिलरी और इंजीनियरिंग कंपनियां रहीं मजबूत
टैरिफ के दबाव के बावजूद ऑटो एंसिलरी कंपनियों ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई। Bharat Forge, Samvardhana Motherson, Sona BLW Precision Forgings और Balkrishna Industries जैसे शेयरों पर इस दौरान खास दबाव नहीं दिखा। कुछ शेयरों ने तो टैरिफ के चरम दौर में भी सकारात्मक रिटर्न दिए।
Axis Securities और ICICI Securities जैसी ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और यूरोपीय बाजारों में बढ़ती हिस्सेदारी ने इंजीनियरिंग निर्यातकों को अतिरिक्त सहारा दिया है।
केमिकल कंपनियों पर मिला जुला असर
केमिकल निर्यातकों पर असर अलग अलग रहा। PI Industries, Vinati Organics, Navin Fluorine International और Clean Science and Technology जैसी कंपनियों की अमेरिकी बाजार में अहम हिस्सेदारी है।
अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह व्यापार प्रतिबंध लगाने के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ते तलाश सकता है। इसका मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यह लगातार बदलती स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि शॉर्ट टर्म में तेजी मुमकिन है, लेकिन लंबी अवधि की स्पष्टता अभी भी दूर है।
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