
Home Loan Market: अपना घर खरीदना अब सिर्फ सपना नहीं, बल्कि तेजी से बदलते आर्थिक और सामाजिक ढांचे का हिस्सा बन चुका है। बेसिक होम लोन की हालिया रिसर्च रिपोर्ट How Bharat Finances its Housing Dreams के मुताबिक, देश का हाउसिंग फाइनेंस बाजार मजबूत ग्रोथ के दौर में है। इसमें डिजिटल टेक्नोलॉजी, अफोर्डेबल फाइनेंस, युवा खरीदारों- खासकर मिलेनियल और Gen Z की बड़ी भूमिका है।
330 अरब डॉलर का बाजार
इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत का होम लोन बाजार करीब 329.9 अरब डॉलर का था। 2025 से 2033 के बीच इसमें 8.9% की कंपाउंड सालाना ग्रोथ का अनुमान है। नेशनल हाउसिंग बैंक के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2024 की दूसरी तिमाही तक व्यक्तिगत हाउसिंग लोन 14% सालाना बढ़कर 33.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए।
यह ग्रोथ केवल बड़े शहरों या उच्च आय वर्ग तक सीमित नहीं है। मिडिल इनकम ग्रुप (MIG) कुल डिस्बर्सल का 44% हिस्सा रखता है, जबकि EWS और LIG मिलकर 39% योगदान देते हैं। इससे साफ है कि अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में भी तेजी बनी हुई है।
मिलेनियल और Gen Z चला रहे हैं बाजार
90-95% घर खरीदारी मिलेनियल और Gen Z कर रहे हैं। 26 से 35 साल का आयु वर्ग सबसे सक्रिय है। यह पीढ़ी डिजिटल माध्यमों पर भरोसा करती है, जल्दी फैसले लेती है और घर को लंबी अवधि की संपत्ति के रूप में देखती है। इसी वजह से हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को अब तेज, पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है।
BASIC Home Loan के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा ने कहा, ‘आज मिलेनियल और Gen Z भारत के हाउसिंग बाजार को आगे बढ़ा रहे हैं। वे तेज, साफ और पूरी तरह डिजिटल लोन प्रक्रिया चाहते हैं, और यही मांग पूरे सिस्टम को बदल रही है। अगर हम कागजी प्रक्रिया आसान करें, IndiaStack का बेहतर इस्तेमाल करें और ग्राहकों का समय बचाएं, तो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक होम लोन पहुंचाया जा सकता है।’
ऑनलाइन होम लोन की ओर बढ़ता रुझान
40 साल से कम उम्र के लगभग 72% लोग ऑनलाइन होम लोन अप्लाई करना पसंद करते हैं। 60 साल से ऊपर के 47% लोग भी डिजिटल प्रक्रिया से सहज हैं।
DigiLocker का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। 35 साल से कम उम्र के लगभग 80% उधारकर्ताओं ने लोन प्रक्रिया में DigiLocker का इस्तेमाल किया। हालांकि, ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों में डिजिटल साक्षरता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
सरकारी बैंक से ज्यादा ले रहे हैं लोन
हाउसिंग लोन में पब्लिक सेक्टर बैंकों की हिस्सेदारी 44% से ज्यादा है। लेकिन प्राइवेट बैंक और NBFC भी तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।
40 साल से ऊपर के और अनियमित कमाई वाले ग्राहक अक्सर NBFC का रुख करते हैं। क्योंकि उनकी प्रक्रिया थोड़ी लचीली होती है। FY24 में NBFC की क्रेडिट ग्रोथ 18.5% रही। उनका ग्रॉस एनपीए घटकर 3.5% पर आया। इसका मतलब है कि अब ज्यादा ग्राहक होम लोन चुका रहे हैं।
ब्याज दर अभी भी सबसे बड़ा निर्णायक
किस बैंक या NBFC से होम लोन लेना है, यह तय करने के लिए ग्राहक सबसे पहले ब्याज दर देखते हैं। 2022-23 में रेपो रेट बढ़ने से EMI बढ़ी और मांग पर असर पड़ा। लेकिन, 2025 में रेपो रेट घटकर 5.25% होने से होम लोन सस्ता हुआ और मांग में सुधार दिखा।
हालांकि अब केवल कम ब्याज दर ही काफी नहीं है। युवा और स्व-रोजगार वर्ग तेज प्रोसेसिंग और आसान डॉक्यूमेंटेशन को भी अहमियत दे रहा है।
डॉक्यूमेंटेशन और मिस सेलिंग बड़ी समस्या
बेसिक होम लोन की रिपोर्ट में करीब 76% लोगों ने बताया कि ज्यादा डॉक्यूमेंटेशन और मिस सेलिंग बड़ी परेशानी है। 11 से 20 लाख रुपये सालाना आय वाले मिडिल इनकम ग्रुप में लोन अपटेक 74% है। वहीं 5 लाख से कम आय वर्ग में यह 56% है। उच्च आय वर्ग में लोन लेने का प्रतिशत कुछ कम है, क्योंकि कई लोग बिना कर्ज के घर खरीदना पसंद करते हैं।
संभावित खरीदारों की बदलती प्राथमिकताएं
21 से 34 साल के कई युवा अभी किराए पर रहना पसंद कर रहे हैं या डाउन पेमेंट के लिए बचत कर रहे हैं। 60 साल से ऊपर के 44% लोगों को हिडन चार्ज की चिंता रहती है। युवा वर्ग ब्याज दर को प्राथमिकता देता है, जबकि 50 साल से अधिक आयु वाले ग्राहक लेंडर की साख और ऑफलाइन संबंधों को ज्यादा महत्व देते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च आय वर्ग के लोग अब अपनी मासिक आय का 25% से 40% तक EMI में देने को तैयार हैं। इससे बड़े घरों और ज्यादा टिकट साइज के लोन की मांग बढ़ रही है।
टियर 2 और टियर 3 शहर बन रहे ग्रोथ इंजन
बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती वित्तीय जागरूकता ने मेट्रो और नॉन मेट्रो शहरों के बीच का अंतर कम करना शुरू कर दिया है। टियर 2 और टियर 3 शहर अब हाउसिंग फाइनेंस के लिए नए ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहे हैं। इससे औपचारिक कर्ज तक पहुंच मजबूत हो रही है और ज्यादा लोगों के लिए घर खरीदना मुमकिन हो रहा है।
कैसे बदल रहा हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर
बेसिक होम लोन की रिपोर्ट बताती है कि देश का हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर तेजी से बदल रहा है। इसकी ग्रोथ अब तीन बड़े आधारों पर टिकती दिख रही है- डिजिटल इनोवेशन, अफोर्डेबिलिटी और ग्राहक केंद्रित मॉडल। नई पीढ़ी, खासकर मिलेनियल और Gen Z, पूरी तरह डिजिटल अनुभव चाहती है।
वे लोन आवेदन से लेकर डॉक्युमेंट अपलोड और अप्रूवल तक सब कुछ ऑनलाइन और तेज चाहते हैं। इसलिए कंपनियों को टेक्नोलॉजी आधारित, आसान और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी होगी। वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण इलाकों के ग्राहकों के लिए पूरी तरह डिजिटल मॉडल हमेशा कारगर नहीं होता। उनके लिए हाइब्रिड मॉडल जरूरी है, जिसमें डिजिटल सुविधा के साथ इंसानी मदद भी मिले और प्रक्रिया सरल हो।
प्रोडक्ट डिजाइन में भी बदलाव दिख रहा है। कम डाउन पेमेंट, स्टेप-अप EMI और लचीली अवधि जैसे विकल्प उन लोगों के लिए मददगार हैं जिनकी कमाई समय के साथ बढ़ने की संभावना है। इससे ज्यादा लोग औपचारिक हाउसिंग लोन सिस्टम में आ सकते हैं और बाजार की पहुंच गहरी हो सकती है।
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