Gold-Silver ETFs: गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में 3% की गिरावट, SEBI के नए प्रस्तावों ने बढ़ाई निवेशकों की हलचल – gold silver etfs fall up to 3 percnt as sebi s new proposals on etf price band stir investor concerns



Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETF) में आज 16 फरवरी गिरावट देखने को मिली। शुक्रवार के कारोबार में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने आज मुनाफावसूली की, जिसके चलते कीमतों पर दबाव बना। इस बीच मार्केट रेगुलेटर SEBI ने गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में हालिया तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए इनके प्राइस बैंड की समीक्षा का प्रस्ताव रखा है।

दोपहर करीब 12:45 बजे तक एडेलवाइस सिल्वर ETF लगभग 3% गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। इसके अलावा बंधन सिल्वर ETF, कोटक सिल्वर ETF, आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ETF, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ETF, 360 वन सिल्वर ईटीएफ, एसबीआई सिल्वर ETF, मिराए एसेट सिल्वर ETF और निपॉन इंडिया सिल्वर (Silverbees) में 2% से अधिक की गिरावट देखने को मिली।

गोल्ड ETFs में भी कमजोरी रही। चॉइस गोल्ड ETF करीब 2% गिरकर कारोबार कर रहा। वहीं एंजेल वन गोल्ड ETF, मोतीलाल ओसवाल गोल्ड ETF और कोटक गोल्ड ETF हल्की गिरावट के साथ ट्रेड करते दिखे। हालांकि कुछ गोल्ड ETF में सीमित बढ़त भी देखी गई।

आज सोना-चांदी के दाम

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव करीब 2% की गिरावट के साथ 12:50 बजे तक 2,40,034 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले दिन में यह कॉन्ट्रैक्ट करीब 4% तक टूटकर 2,35,208 रुपये प्रति किलो तक फिसल गया था। सोना का वायदा भाव भी करीब 0.5% की गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा।

गिरावट की वजह क्या?

ग्लोबल बाजारों में भी सोना और चांदी की कीमतों में कमजोरी रही। अमेरिका और चीन के बाजार स्थानीय छुट्टियों के कारण बंद रहे, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम कम रहा और कीमतों पर दबाव बना। हल्की ट्रेडिंग और सीमित गतिविधि के बीच निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया।

शुक्रवार को महंगाई (CPI) आंकड़ों के बाद कीमती धातुओं में तेज उछाल आया था। ऐसे में कई निवेशकों ने आज मुनाफा काटना बेहतर समझा, जिससे कीमतें फिसल गईं।

रॉयटर्स के मुताबिक, केसीएम के चीफ एनालिस्ट टिम वाटरर ने कहा कि कम ट्रेडिंग और नए पॉजिटिव संकेतों की कमी के कारण सोने ने शुक्रवार की तेजी का कुछ हिस्सा गंवा दिया। फिलहाल बाजार को आगे बढ़ाने वाला कोई बड़ा नया ट्रिगर नहीं दिख रहा है।

ETF में अस्थिरता पर सेबी की नजर

हाल के महीनों में गोल्ड और सिल्वर ETFs में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। इसे देखते हुए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने ETF के लिए बेस प्राइस तय करने और प्राइस बैंड से जुड़े मौजूदा ढांचे की समीक्षा का प्रस्ताव रखा है। सेबी का कहना है कि मौजूदा सिस्टम में वोलैटिलिटी के बेहतर तालमेल और कुछ ऑपरेशनल कमियों को दूर करने की जरूरत है।

नियामक को चिंता है कि ETFs की कीमतों में बढ़ते उतार-चढ़ाव से निवेशकों को जोखिम बढ़ सकता है। इससे पहले अगस्त 2025 में मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि सेबी इस तरह के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

सेबी ने सुझाव दिया है कि मौजूदा ±20% के यूनिफॉर्म प्राइस बैंड को तर्कसंगत बनाया जाए। नियामक का मानना है कि मौजूदा ढांचे में कुछ ऑपरेशनल कमियां हैं और वोलैटिलिटी के साथ बेहतर तालमेल की जरूरत है।

सेबी ने सुझाव दिया है कि ज्यादातर ईटीएफ पर लागू मौजूदा ±20% के प्राइस बैंड की समीक्षा कर उसे तर्कसंगत बनाया जाए। फिलहाल अधिकांश ईटीएफ पर 20% का प्राइस बैंड लागू है, जबकि TREPs में निवेश करने वाले ओवरनाइट ईटीएफ पर ±5% की सीमा है। नियामक का मानना है कि बदलती बाजार परिस्थितियों के हिसाब से इन सीमाओं को संतुलित करने की जरूरत है, ताकि अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर काबू पाया जा सके।

आगे का रुख क्या?

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी के अनुसार, 2026 की शुरुआत में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद गोल्ड का लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चर अभी भी मजबूत दिखता है। उनका कहना है कि डॉलर की चाल, फेड की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और सट्टेबाजी गतिविधियां हालिया अस्थिरता की वजह हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यम अवधि में केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर में संभावित कमजोरी सोने को सहारा दे सकती है।

PL Capital के संदीप रायचुरा का कहना है कि ग्लोबलअनिश्चितताओं और महंगाई के दबाव के बीच सोना अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। उनके मुताबिक, हालिया गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है।

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