
AI impact on IT sector: भारतीय सॉफ्टवेयर शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई है। इसकी वजह यह डर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI टेक्नोलॉजी के बड़े हिस्से को ऑटोमेट कर सकता है। इससे IT सेक्टर को लेकर बाजार में निराशा बढ़ी है।
Infosys के पूर्व सीईओ विशाल सिक्का का कहना है कि AI से होने वाला बदलाव सच है। लेकिन इसका असर धीरे धीरे दिखेगा और यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इंडस्ट्री खुद को कितनी तेजी से बदलती है।
क्या बाजार जरूरत से ज्यादा घबरा रहा है?
जब सिक्का से पूछा गया कि क्या शेयर बाजार AI को लेकर ओवररिएक्ट कर रहा है, तो उन्होंने सीधा जवाब दिया, ‘शेयर बाजार जैसा करता है, वैसा करता है। निकट अवधि में शेयर क्या करेंगे, इस पर मेरी कोई टिप्पणी नहीं है।’
AI से नौकरियों पर असर कितना सच?
सिक्का ने माना कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में दोहराए जाने वाले कामों पर AI का असर शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई शक नहीं है कि सॉफ्टवेयर में जो रिपिटिटिव प्रोसेस हैं, वहां बदलाव आ रहा है। यह डिसरप्शन असली है। लेकिन इसे अलग अलग इंडस्ट्री में फैलने में समय लगता है।’
17 लाख IT प्रोफेशनल्स की ताकत
CNBC-TV18 से बातचीत में, Vianai के फाउंडर और सीईओ सिक्का ने भारत की IT वर्कफोर्स का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि IT सर्विसेज इंडस्ट्री में करीब 17 लाख लोग काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, 17 लाख लोगों की सामूहिक क्षमता बेहद बड़ी है।
सिक्का ने कहा कि मेरे नजरिए से यह क्षमता अनंत है। इतनी बड़ी वर्कफोर्स अगर सही दिशा में ढले, तो बदलाव को अवसर में बदला जा सकता है।
असली सवाल है बदलाव की रफ्तार
सिक्का के मुताबिक, सबसे बड़ा सवाल स्पीड का है। उन्होंने कहा, ‘हमारे सामने चुनौती यह है कि क्या हम इस नई हकीकत के मुताबिक खुद को उतनी तेजी से बदल पाएंगे, जितनी तेजी से बदलाव की लहरें हमारे मौजूदा काम को प्रभावित कर रही हैं? जो समय पर बदलाव करेंगे, वही टिकेंगे।’
पहले भी आए हैं बड़े बदलाव
भारत का टेक सेक्टर पहले भी कई बड़े बदलाव देख चुका है। कस्टम डेवलपमेंट से पैकेज्ड सॉफ्टवेयर, Y2K, मोबाइल कंप्यूटिंग और फिर क्लाउड सर्विसेज तक, इंडस्ट्री हर दौर में खुद को बदलती रही है।
सिक्का का कहना है कि यह भी वैसा ही एक बदलाव है, लेकिन इसकी रफ्तार पहले से कहीं ज्यादा तेज है। उन्होंने कहा, ‘हमारी इंडस्ट्री 50 साल से फल फूल रही है। हमने कई डिसरप्शन देखे हैं। लेकिन इस बार बदलाव बहुत तेज है। इंसानी दिमाग एक्सपोनेंशियल बदलाव को समझने के लिए बना ही नहीं है। और यहां बदलाव सीधे हमारे काम के केंद्र पर असर डाल रहा है।’
AI हमारे लिए मौका या खतरा?
सिक्का के मुताबिक, इसका नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां इस बदलाव को अपने लिए फायदे में बदल पाती हैं या नहीं।
उन्होंने कहा, ‘सवाल वही है। क्या हम इस बदलाव को अपने लिए टेलविंड बना सकते हैं, इससे पहले कि यह हमारे पुराने काम को खत्म कर दे? यही असली समीकरण है।’ यानी AI खतरा भी है और मौका भी, फर्क इस बात से पड़ेगा कि कंपनियां कितनी तेजी से ढलती हैं।
शेयर बाजार में क्या हो रहा है?
इन टिप्पणियों के बीच वैश्विक और भारतीय सॉफ्टवेयर शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली है। बाजार में यह धारणा बन रही है कि AI एजेंट जटिल एंटरप्राइज वर्कफ्लो को ऑटोमेट कर सकते हैं और सॉफ्टवेयर बजट का बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में ले सकते हैं।
फरवरी में भारत का IT इंडेक्स करीब 15 प्रतिशत गिर चुका है। बाजार इस संभावित बदलाव को कीमतों में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में भी 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। मेटल, IT और कमोडिटी शेयरों में व्यापक बिकवाली रही। पिछले एक हफ्ते में TCS और Infosys करीब 9 प्रतिशत तक गिर चुके हैं।
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